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Hindi Poem on Deepawali : इस बार की दीपावली कुछ अधिक ही सुनहरी होगी

रविवार,अक्टूबर 20, 2019
poem on diwali
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सुरक्षा की आधुनिकतम युक्ति तुम। अचूक प्रहार की मारक शक्ति तुम। किसकी ताब है अब सके तुम्हारी मार झेल। स्वागतम् राफेल।।
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सहमी हुई थी यह जमीन सहमा था सारा आसमां जीवन के इस मोड़ पर छाई गहरी खामोशियां।।
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भगत सिंह का देश के प्रति प्रेम, दीवानगी और मर मिटने का भाव, उनके शेर-ओ-शायरी और कविताओं में साफ दिखाई देता है, जो आज भी युवाओं में आज भी जोश भरने का काम करता है।
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'उनका' संकल्प है कि भेजकर ही रहेंगे वे, हर भ्रष्टाचारी को जेल की सलाखों में।
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गूंजेगी भारत माता की जय अमेरिका के मंच से। दस गुना होगी भारी जो हर पाकिस्तानी प्रपंच से।। 370 से उभरी आत्मनिश्वासी हुंकारों से।
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हमेशा मानव सभ्यताओं का विकास नदियों के तट पर हुआ शायद नदी यह समझती थी कि उसके बलिदान के द्वारा
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चंद्रयान 2 पर कविता- भारत की इंजीनियरिंग तपस्या का प्रतीक हमारा चंद्रयान, जब यकायक ओझल हुआ संपर्क से अंतिम क्षणों में। देश हुआ स्तब्ध, उस आकस्मिक बाधा से निपट अनजान,
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डर-सा लगने लगा है एक चिंता लगी रहती है कि विलुप्त होते जा रहे हैं 'शब्द'
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चंद्रयान 2 का मिशन था जगत से काफी निराला, गर्व है 'इसरो' और 'सिवन' पर भले छिन गया निवाला।
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भाषा जब सहज बहती, संस्कृति, प्रकृति संग चलती। भाषा-सभ्यता की संपदा, सरल रहती अभिव्यक्ति सर्वदा।
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हिन्दी दिवस पर हिन्दी कविता- हिन्दी दिवस, सुना-सुनाया-सा नाम लगता है। अच्छा आज हम हिन्दी पर, हिंग्लिश में बात करेंगे।
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हिन्दी दिवस पर कविता- मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम सपनाते हो, अलसाते हो। मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुम अपनी कथा सुनाते हो
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हिन्दी दिवस कविता- क्षेत्रीयता से ग्रस्त है। राजनीति से त्रस्त है।। हिन्दी का होता अपमान। घटता है भारत का मान।।
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साइकिल हाथ में छाते के साथ में कपड़े की थैली है उजली मटमैली है कंधे पर बैग है वही मंथर वेग है खाना-पानी संग है उड़ा हुआ रंग है अफसर से तंग है नीति कर्म में जंग है गांव तो चाहता है विभाग न चाहता है बदली की धमकी है सरपंच की ...
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मोदी के कर्मठ महाकाश के टूट गए सितारे दो। भारत के दो उज्ज्वल नक्षत्र, कर्मक्षेत्र के उजियारे दो।।
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वैसे तो हारना एक दु:खदायी क्रिया है लेकिन कभी-कभी यह सुखदायी भी हो जाता है।
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अंतरिक्ष में भारत की ऊंची उड़ान। हमारा चन्द्रयान!! भारत का गौरव, इसरो की क्षमताओं का प्रमाण।
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युग-युग की शांति अहिंसा की, लेकर प्रयोग गरिमा समस्त, इतिहास नया लिखने आया, यह पुण्य पर्व पन्द्रह अगस्त। पन्द्रह अगस्त त्योहार, राष्ट्र के चिरसंचित अरमानों का, पन्द्रह अगस्त त्योहार, अनगिनत मूक-मुग्ध बलिदानों का।
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लो! अब कश्मीर में भी नए दौर की गूंजेगी शहनाई। बधाई मोदीजी को, शाह को, सौ-सौ बार बधाई।।1।।
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