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कबीर जयंती विशेष : संत कबीर के कुछ चुनिंदा दोहे

सोमवार,जून 17, 2019
Kabir ke Dohe
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पापा मेरी नन्ही दुनिया, तुमसे मिल कर पली-बढ़ी, आज तेरी ये नन्ही बढ़कर, तुझसे इतनी दूर खड़ी तुमने ही तो सिखलाया था, ये ...
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जिनकी आपस की TUNING शब्दातीत, बेथाह। एक तिलस्मी-सी जोड़ी है- मोदी-शाह।।1।।
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लीजिए बज उठा दिग-दिगंत में, विजय बिगुल फिर मोदी का। जनमत में झलक उठा फिर से विश्वास, विपुल फिर मोदी का।।1।।
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मेरी कुछ कविताएं सिर्फ़ मेरे लिए होती हैं और हां! सिर्फ़ तुम्हारे लिए भी।
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रखने इस महा-प्रजातंत्र की शान, मतदान कीजिए। सर्वोच्च हो मतदाता का स्वाभिमान, मतदान कीजिए।
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मां तो मां है परवान चढ़ी की बली का नाम है मां प्रेम सुहाग के संस्कार में जीवित है मां
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मां से बढ़कर कुछ नहीं क्या तीरथ क्या धाम चरण छुए और हो गए तीरथ चारों धाम।
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मां को समझ पाना बहुत मुश्किल है। मां की ममता की थाह पाना बहुत मुश्किल है मां एक वृक्ष के समान होती है,
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मां, शुक्ल पक्ष की चांदनी तुम हमें देती रहीं स्वयं कृष्ण पक्ष की चांदनी सी ढलती रहीं
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जीवनदात्री! लहू से अपने सींचकर जीव का पहला परिचय होती है मां। वाणी का पहला सुर होती है मां
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एक शब्द भर नहीं है मां एक रिश्ता ही नहीं है मां है एक पूर्ण-संपूर्ण एहसास एक सागर समाहित कर लेता है सबको अपने ...
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तुमसा कोई नहीं है मां मेरे हर दुःख-दर्द की दवा है मेरी मां, मुसीबतों के समय मख़मली ढाल है मेरी मां,
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उसकी केशर सुगंध मेरे रोम-रोम से प्रस्फुटित होती है, मेरी सांस-सांस की हर महक उसकी आत्मा से उठती है वह देहरी पर सजी ...
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मां के आंचल की छाया संतानों का दूर करे दुःख मां के आंचल की छाया, आजीवन सेवारत होती, मां की ममतामयी काया
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कितने संदेश दे गया उनका वह रोड शो बनारस का। तोड़ गया सारी सीमाएं, श्रद्धा-उफान जन-मानस का।।
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जन-उत्सव सा भारत में ये जो उत्साहपूर्ण मतदान है। अपने इस प्रजातंत्र की परिपक्वता की पहचान है।।1।।
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परियोजनाओं के नाम पर, किया जा रहा पृथ्वी को परेशान। कोई मेधा, कोई अरुंधति बन, दे दो उसे जीवनदान।
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सोचो ज़रा अगर हम पेड़ होते जग को ठंडी छांह देते फल,पत्ते,लकड़ी भी कितने उपयोगी होते....!! नन्ही चिरैय्या अगर ...
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लोकतंत्र की लाज बचाने, वालों की पहचान करें। घर से निकलें बाहर आएं सब मिलकर मतदान करें।
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