Vande Mataram Git: जन गण मन- यह भारत का राष्ट्रगान है और वन्दे मातरम् भारत का राष्ट्रीय गीत है। वंदे मातरम गीत की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने संस्कृत और बांग्ला मिश्रित भाषा में की थी और यह गीत स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहे लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। इस गीत को चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में शामिल किया गया था।
वंदे मातरम्: फुल लिरिक्स
वंदे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्य-श्यामलाम् मातरम्॥ वंदे मातरम् ॥1॥
शुभ्र-ज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम्,
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर-भाषिणीम्।
सुखदाम् वरदाम् मातरम्॥ वंदे मातरम् ॥2॥
कोटि-कोटि कंठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले, अबला केन मा एत बले,
बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणीम् मातरम्।। वंदे मातरम्।। 3।।
तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणा: शरीरे, बाहु ते तुमि मां शक्ति,
हृदये तुमि मां भक्ति,
तोमाराई प्रतिमा गढ़ी मंदिरे-मंदिरे॥ वंदे मातरम्।। 4।।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणीम्,
कमला कमलदलविहारिणी, वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वाम्, नमामि कमलाम्।
अमलाम्, अतुलाम्, सुजलाम्, सुफलाम्, मातरम्।।5।।
श्यामलाम्, सरलाम्,
सुस्मिताम्, भूषिताम्,
धरणीम्, भरणीम्, मातरम्॥ वंदे मातरम् ॥6॥
वंदे मातरम गीत का हिंदी अनुवाद
हे माता, मैं आपकी वंदना करता हूँ (प्रणाम करता हूँ)!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयजशीतलाम्,
अच्छे जल वाली, अच्छे फलों वाली, मलय (दक्षिण) की हवाओं से शीतल,
फसलों से हरी-भरी, श्यामला (सुंदर), हे माता!
चांदनी रात में प्रफुल्लित (आनंदित) रहने वाली,
खिले हुए फूलों और घने वृक्षों वाली,
सुंदर मुस्कान वाली, मीठा बोलने वाली,
सुख देने वाली और वरदान देने वाली, हे माता!
गीत का मूल भाव: यह गीत भारत को एक देवी के रूप में प्रतिष्ठित करता है, जो पोषण करती है और शक्ति प्रदान करती है। इसमें माता को सुख और वरदान देने वाली (वरदा) कहा गया है। यह गीत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशभक्ति का सबसे प्रमुख प्रतीक बना।
संक्षिप्त भावार्थ: "हे माता, मैं आपकी वंदना करता हूँ। आप मीठे जल वाली, फलों से लदी हुई, दक्षिण की शीतल हवा (मलयज) से शांत और हरी-भरी फसलों से सुशोभित हैं। आपकी रातें चांदनी से खिली हुई हैं, आप फूलों और लदे हुए पेड़ों से सुंदर दिखती हैं। आप सुख देने वाली और वरदान देने वाली हैं।"
वंदे मातरम गीत के बारे में मुख्य तथ्य
रचनाकार: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय।
प्रथम गायन: इसे पहली बार 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था।
दर्जा: 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे 'राष्ट्रीय गीत' के रूप में स्वीकार किया। इसे 'जन गण मन' (राष्ट्रगान) के समान दर्जा प्राप्त है।
महत्व: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह गीत क्रांतिकारियों का मुख्य नारा और प्रेरणा बना। ब्रिटिश शासन के दौरान देशवासियों के दिलों में गुलामी के खिलाफ आग भड़काने वाले सिर्फ दो शब्द थे- 'वंदे मातरम्'।
इतिहास: 'आनंदमठ' उपन्यास के माध्यम से यह गीत प्रचलित हुआ। उन दिनों बंगाल में बंग-भंग का आंदोलन उफान पर था। दूसरी ओर महात्मा गाँधी के असहयोग आंदोलन ने लोकभावना को जाग्रत कर दिया था। बंग भंग आंदोलन और असहयोग आंदोलन दोनों में 'वंदे मातरम्' ने प्रभावी भूमिका निभाई। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के लिए यह गीत पवित्र मंत्र बन गया था। बंकिम बाबू ने 'आनंदमठ' उपन्यास सन् 1880 में लिखा। कलकत्ता की 'बंग दर्शन' मासिक पत्रिका में उसे क्रमशः प्रकाशित किया गया। अनुमान है कि 'आनंदमंठ' लिखने के करीब पाँच वर्ष पहले बंकिम बाबू ने 'वंदे मातरम्' को लिख दिया था।
Edited by: Anirudh Joshi