Vande Mataram: भारत सरकार ने 2021 में एक आदेश जारी किया था जिसमें सार्वजनिक समारोहों में 'वंदे मातरम' के छह छंदों को गाने या सुनने को अनिवार्य कर दिया गया था। ये छंद स्वामी विवेकानंद द्वारा स्वदेशी आंदोलन के समय को प्रेरित करने के लिए गाए गए थे। इन छंदों को स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक शब्दों से प्रेरित किया गया था और ये भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बने। यह गान राष्ट्रीयता और स्वतंत्रता संग्राम की भावना को प्रकट करता है।
'वंदे मातरम्' को लेकर गृह मंत्रालय द्वारा नया नियम जारी किया है। और इसके तहत सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्र गीत वंदे मातरम् गाना या बजाया जाना अनिवार्य होगा। साथ ही यदि किसी कार्यक्रम में 'वंदे मातरम्' और राष्ट्रगान 'जन गण मन' दोनों ही प्रस्तुत किए जाते हैं, तो लोगों को सावधान मुद्रा में खड़े रहना होगा तथा सबसे पहले 'वंदे मातरम्' और उसके बाद 'जन गण मन' होगा। इसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नया प्रोटोकॉल भी जारी कर दिया है।
भारतीय राष्ट्रगीत वंदे मातरम् की रचना 1875 ई. में श्री बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। गीत की रचना 7 नवंबर 1875 को पूरी हुई थी। यह गीत उनके उपन्यास 'आनंदमठ' में सम्मिलित है। इसका पहला गायन बहुत पहले 1896 ई. में कोलकाता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में हुआ था।
वैसे तो स्वतंत्रता उपरांत वंदे मातरम् को 24 जनवरी, 1950 को भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मानना है कि यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है और यह भारत माता की अनुपम स्तुति है और इसे पूरा गाने का निर्णय लिया। बस तब से लेकर आज तक हमारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् संघ के हर आयोजन में पूरा गाया जाता है। इसी ऐतिहासिक तिथि को हाल के वर्षों में इसकी 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में देश भर में उत्सव और सामूहिक गायन आयोजित किए जाने का फैसला हुआ है।
वंदे मातरम् (छः पद- पूरा गीत)
वंदे मातरम्!
सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,
शस्य-श्यामलाम् मातरम्॥ वंदे मातरम् ॥1॥
शुभ्र-ज्योत्सनाम् पुलकित यामिनीम्,
फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,
सुहासिनीम् सुमधुर-भाषिणीम्।
सुखदाम् वरदाम् मातरम्॥ वंदे मातरम् ॥2॥
कोटि-कोटि कंठ कल-कल निनाद कराले,
कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले, अबला केन मा एत बले,
बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम्,
रिपुदलवारिणीम् मातरम्।। वंदे मातरम्।। 3।।
तुमि विद्या तुमि धर्म, तुमि हृदि तुमि मर्म,
त्वं हि प्राणा: शरीरे, बाहु ते तुमि मां शक्ति,
हृदये तुमि मां भक्ति,
तोमाराई प्रतिमा गढ़ी मंदिरे-मंदिरे॥ वंदे मातरम्।। 4।।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणीम्,
कमला कमलदलविहारिणी, वाणी विद्यादायिनी,
नमामि त्वाम्, नमामि कमलाम्।
अमलाम्, अतुलाम्, सुजलाम्, सुफलाम्, मातरम्।।5।।
श्यामलाम्, सरलाम्,
सुस्मिताम्, भूषिताम्, धरणीम्,
भरणीम्, मातरम्॥ वंदे मातरम् ॥6॥
अनिवार्य हुआ वंदे मातरम् के समय खड़ा होना
गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब वंदे मातरम् का आधिकारिक संस्करण बजाया या गाया जाए, तो श्रोताओं को सम्मान में खड़ा होना चाहिए। हालांकि, यदि किसी डॉक्यूमेंट्री में यह गीत फिल्म का हिस्सा हो, तो कार्यक्रम में अव्यवस्था न हो इसके लिए दर्शकों से खड़े होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी।
Raajshri Kasliwal
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