Iran US War 2026: नवीनतम खबरों के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए ईरानी सरकार के सामने एक 15 सूत्री योजना पेश की है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने मंगलवार, 24 मार्च को दो अज्ञात अधिकारियों के हवाले से बताया कि यह प्रस्ताव पाकिस्तानी सरकार के माध्यम से तेहरान तक पहुंचाया गया है। पाकिस्तान ने इसके लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी। बताया जा रहा है कि इस योजना में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल है।
इसराइली मीडिया चैनल 12 ने, इस संदर्भ में बताया कि अमेरिका और ईरान एक महीने के लिए युद्धविराम की घोषणा करेंगे, जिसके दौरान वाशिंगटन के प्रस्ताव के आधार पर बातचीत होगी। इस योजना में ईरानी ज़मीन पर यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से बंद करने और संवर्धित सामग्री अमेरिका को सौंप देने की बात कही गई है। ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना होगा। आश्चर्य की बात यह है कि इस अमेरिकी योजना में तेहरान में 'सत्ता परिवर्तन' की मांग नहीं की गई है।
सभी प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे
इसराइली मीडिया चैनल 12 के अनुसार, 'सत्ता परिवर्तन' के बदले में ईरान पर लगे सभी प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे। ईरान को बुशहर में नागरिक परमाणु ऊर्जा के विकास के लिए सहायता भी मिलेगी। इससे पहले, ईरानी सरकार ने इसरायल पर वहां के परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमला करने का आरोप लगाया था। व्हाइट हाउस और अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इन रिपोर्टों पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की।
अमेरिकी योजना से संबंधित रिपोर्टों के आते ही तेल की कीमतों में पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई बताई जा रही है। ब्रेंट क्रूड के एक बैरल की कीमत 5.92 प्रतिशत गिरकर 98.30 डॉलर हो गई। इसी बीच, अमेरिकी ग्रेड 'डब्ल्यूटीआई' (वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट) की कीमत में 5.01 प्रतिशत की गिरावट आई और वह 87.72 डॉलर पर पहुंच गई।
ईरान से बातचीत चल रही है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले ईरान के साथ चल रही बातचीत के बारे में अपने निवास व्हाइट हाउस में कहा कि ईरान से बातचीत 'अभी' हो रही है। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जेरेड कुशनर इस बातचीत में शामिल हैं। ट्रंप ने गर्व से कहा, 'मैं आपको बता सकता हूं कि दूसरा पक्ष समझौता करने के लिए तैयार है।'
राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी कहा कि तेहरान जल्द ही किसी समझौते पर पहुंचना चाहता है; जबकि दूसरी ओर ईरानी नेतृत्व ने युद्ध के संभावित अंत के बारे में अमेरिका के साथ ऐसी किसी भी बातचीत से इनकार किया था। अन्य बातों के अलावा, राष्ट्रपति ट्रंप ने इससे पहले ईरान द्वारा अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से त्याग देने को युद्ध रोकने की एक शर्त बना दिया था। बातचीत 'बहुत अच्छी और सार्थक' रही ट्रंप ने इस से पहले ईरान के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों पर हमले की धमकी को यह कहते हुए टाल दिया था कि शत्रुता समाप्त करने के लिए बातचीत 'बहुत अच्छी और सार्थक' रही है। उन्हीं के शब्दों में, 'वे (ईरानी) परमाणु हथियार नहीं रखने पर सहमत हुए हैं। वे इस बात पर राजी हो गए हैं।' ट्रम्प ने दावा किया कि यदि हम पहले हमला नहीं करते, तो 'तेहरान दो सप्ताह बाद खुद (हमारे ऊपर) परमाणु हमला कर सकता था।'
दूसरी ओर, ईरानी सशस्त्र बलों की कमांड के एक प्रवक्ता ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे वे 'अपने आप से ही' बातचीत कर रहे हैं। मध्यस्थता की पेशकश करने वाले पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने स्पष्ट किया कि ईरान और अमेरिका के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है -- न तो प्रत्यक्ष और न ही अप्रत्यक्ष। इस बीच, बुधवार 25 मार्च को इसराइल और ईरान ने एक-दूसरे पर बमबारी भी जारी रखी। कुवैत तथा सऊदी अरब से भी नए ड्रोन हमलों की खबरें आईं। सुविज्ञ सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के बार-बार बातचीत जारी होने के दावों के बावजूद, अमेरिका मध्य पूर्व में हजारों और सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा था।
इसराइली सेना के एक बयान के अनुसार, इसराइली वायु सेना ने 23 मार्च को दिन भर ईरान में दर्जनों ठिकानों को हमले का निशाना बनाया, जिनमें मिसाइल प्रक्षेपण स्थल भी शामिल थे। इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। उस दिन शाम को ईरान की ओर से इसराइल पर रॉकेटों से भारी हमला किया गया, जिसके चलते इसराइल के तटवर्ती महानगर तेल अवीव और अन्य स्थानों पर चेतावनी सायरन बजने लगे। इसराइली मीडिया के अनुसार, ईरान द्वारा दागे गए रॉकेटों में से एक में क्लस्टर बम होने की ख़बर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित इन हथियारों के इस्तेमाल की ईरान ने हाल ही में पुष्टि की है।
नेतन्याहू की चिंता
शुक्रवार, 27 मार्च को अमेरिका और ईरान के बीच ओमान में अप्रत्यक्ष वार्ता होनी है। बैठक से पहले, ईरान ने एक नई आक्रामक रणनीति की घोषणा की है। इससे इसराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू बहुत चिंतित हैं। हुआ यह है कि इस वार्ता से ठीक पहले, ईरान ने पहली बार अपनी नई खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल को कुख्यात 'पसदारान' (रिवोल्यूशनरी गार्ड) के एक भूमिगत ठिकाने पर तैनात किया है। यह जानकारी वहां की 'फार्स' समाचार एजेंसी ने दी है। 'पसदारान' ईरानी सेना से भिन्न, जनता के दमन के लिए बनी किसी निर्मम सेना जैसी एक अलग विशिष्ट इकाई है।
रिपोर्टों के अनुसार, ये नई और शक्तिशाली खोर्रमशहर-4 मिसाइलें ईरान की आक्रामक रणनीति का एक प्रभावी हिस्सा हैं। बताया जाता है कि इनकी मारक क्षमता लगभग 2,000 किलोमीटर है और ये एक टन से अधिक विस्फोटक सामग्री ले जा सकती हैं। ये मिसाइलें अन्य लक्ष्यों के अलावा, इस क्षेत्र में इसराइल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला कर सकती हैं। 'फार्स' ने 'पसदारान' के अंतरिक्ष केंद्र में एक नए भूमिगत 'मिसाइल शहर' के उद्घाटन की भी सूचना दी है।
ईरान की सैन्य रणनीति में इस कथित 'बदलाव' को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। उस के बारे में उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जून 2025 में इसराइल के साथ तथाकथित 'बारह दिवसीय युद्ध' के बाद, ईरान ने अपनी पिछली रक्षात्मक नीति को त्याग दिया और अब एक नई आक्रामक रणनीति अपना रहा है। नई ईरानी मिसाइलों की तैनाती का उद्देश्य बड़े पैमाने पर पहले स्वयं, या फिर जवाबी हमले करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन करना है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala