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Last Updated :इस्लामाबाद/वाशिंगटन , बुधवार, 27 मई 2026 (17:10 IST)

ट्रंप के जाल में फंसे मुनीर, लश्कर की खुली चेतावनी, पाकिस्तान में भड़क सकता है गृहयुद्ध

Trump Munir
Pakistan Civil War Threat: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने पाकिस्तान के सियासी और सैन्य गलियारों में खलबली मचा दी है। ट्रंप ने ईरान से जुड़ी शांति वार्ता को 'अब्राहम एकॉर्ड्स' (Abraham Accords) के विस्तार से जोड़ते हुए पाकिस्तान समेत कई प्रमुख मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ राजनयिक संबंध सामान्य करने की अपील की है। पारंपरिक रूप से फिलिस्तीन समर्थक रुख रखने वाले पाकिस्तान के लिए ट्रंप का यह प्रस्ताव एक बड़े कूटनीतिक और घरेलू संकट का कारण बन सकता है। यहां तक कहा जा रहा है कि यदि मुनीर ने ट्रंप की बात मान ली तो पाकिस्तान में गृहयुद्ध भड़क सकता है। 

ट्रंप की पोस्ट से बढ़ा विवाद

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक विस्तृत पोस्ट में दावा किया कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों को अब्राहम एकॉर्ड्स का हिस्सा बनना चाहिए। इस पोस्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बजाय वहां के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर (जिन्हें उन्होंने 'फील्ड मार्शल जनरल' के रूप में संबोधित किया) का नाम लिया है। ट्रंप द्वारा चुनी गई इस शब्दावली ने पाकिस्तान में एक बार फिर सिविल-मिलिट्री (नागरिक-सैन्य) संतुलन और सत्ता के असली केंद्र को लेकर बहस तेज कर दी है। ALSO READ: दलाई लामा के बाद अब कश्मीर पर भी बोला चीन, पाकिस्तान के सुर में मिलाया सुर

लश्कर की खुली चेतावनी

इस दबाव के बाद पाकिस्तान में हालात बेहद विस्फोटक हो चुके हैं। कट्टरपंथियों और आतंकवादी संगठनों के तीखे तेवरों के बाद देश में गृहयुद्ध और तख्तापलट जैसी स्थिति की आशंका पैदा हो गई है। ट्रंप की इस घोषणा के बाद पाकिस्तान के भीतर सक्रिय संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसकी राजनीतिक शाखाओं में हड़कंप मच गया है। लश्कर की तरफ से जारी एक बेहद आक्रामक और भड़काऊ बयान में जनरल आसिम मुनीर को सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है।
 
लश्कर ने कहा कि पाकिस्तानी फौज और जनरल मुनीर अमेरिकी खुशामद और वाशिंगटन से मिलने वाली तारीफों के बदले हमारे मजहब और फिलिस्तीन के शहीदों का सौदा कर रहे हैं। अगर मुनीर ने अमेरिकी दबाव में आकर इजराइल को मान्यता देने या अब्राहम अकॉर्ड पर दस्तखत करने की जुर्रत की, तो इसे पाकिस्तान के अवाम और इस्लाम के साथ सबसे बड़ी गद्दारी माना जाएगा। लश्कर ने कहा कि पाकिस्तानी फौज याद रखे कि मुजाहिदीन और अवाम खामोश नहीं बैठेंगे। अगर अमेरिकी आकाओं के इशारे पर यह फैसला थोपा गया, तो इस्लामाबाद और रावलपिंडी की सड़कें जंग का मैदान बन जाएंगी। ALSO READ: Cockroach janta party पर सियासी घमासान, पाकिस्तान और जॉर्ज सोरोस का समर्थन, रिजिजू के आरोपों पर क्या बोले अभिजीत दिपके

पाकिस्तान का कड़ा रुख

ट्रंप के इस प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान सरकार ने अपने आधिकारिक रुख को पूरी तरह स्पष्ट किया है। रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि यह प्रस्ताव हमारे मौलिक सिद्धांतों के पूरी तरह खिलाफ है। जब तक एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना नहीं हो जाती, तब तक पाकिस्तान इजराइल को मान्यता देने का सोच भी नहीं सकता। उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने भी दोहराया कि देश की विदेश नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। गौरतलब है कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पर आज भी स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि यह इजराइल की यात्रा के लिए वैध नहीं है।

मुनीर पर क्यों है चौतरफा दबाव?

सेना प्रमुख असीम मुनीर ने हाल के दिनों में ईरान-इजराइल तनाव को कम करने और गाजा में शांति प्रयासों के लिए मध्यस्थ के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिसकी ट्रंप ने सराहना भी की थी। हालांकि, अब्राहम एकॉर्ड्स को लेकर ट्रंप की इस नई शर्त ने मुनीर को धर्मसंकट में डाल दिया है। 
 
घरेलू अस्थिरता का डर : राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान में इजराइल के साथ किसी भी तरह के संबंधों को जनता और धार्मिक संगठनों द्वारा 'इस्लाम और फिलिस्तीन के साथ विश्वासघात' माना जाता है।
 
विपक्ष और कट्टरपंथियों का आक्रामक रुख : यदि सेना या सरकार कूटनीतिक मजबूरियों के कारण अमेरिका के सामने थोड़ी भी नरमी दिखाती है, तो देश के कट्टरपंथी संगठन और विपक्षी दल सड़कों पर उतर सकते हैं, जिससे देश में गृहयुद्ध जैसे हालात पैदा होने का खतरा है।
 
ट्रंप का यह प्रस्ताव पाकिस्तान के लिए 'आगे कुआं, पीछे खाई' जैसी स्थिति लेकर आया है। एक तरफ जहां देश गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और उसे अमेरिकी समर्थन की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ इजराइल की ओर बढ़ाया गया छोटा सा कदम भी देश के भीतर एक बड़े जन-आक्रोश और गृहयुद्ध की चिंगारी को भड़का सकता है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
 
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