यहां स्वास्थ्य और योग के अद्भुत लाभों को दर्शाती एक बेहद प्रेरणादायक और सुंदर कविता है:
सुबह की पहली किरण के साथ, नया एक मोड़ लाएं,
चलो आज से अपनी ज़िंदगी में, हम योग को अपनाएं।
यह केवल तन की कसरत नहीं, यह जीने का विज्ञान है,
स्वस्थ, निरोग और शांत जीवन का, यह सच्चा वरदान है।
भगाता है यह तन का आलस, नस-नस में ऊर्जा भरता है,
ताड़ासन और सूर्य नमस्कार, रीढ़ की हड्डी को लचीला करता है।
भीतर सोई हुई रोग-प्रतिरोधक शक्ति को यह जगाता है,
ब्लड प्रेशर हो या शुगर, हर बीमारी को घुटनों पर लाता है।
धीमी गहरी सांसों का जादू, जब प्राणायाम दिखलाता है,
अनुलोम-विलोम से फेफड़ों का, कोना-कोना खिल जाता है।
बढ़ती उम्र के थपेड़ों को भी, यह हंसकर मोड़ देता है,
'स्वस्थ बुढ़ापे' की चाबी बनकर, जीवन से रोगों को छोड़ देता है।
चिंताओं के इस दौर में, जो मन को असीम शांति दे,
भटके हुए उन विचारों को, जो नई एक दिशा और क्रांति दे।
शवासन और ध्यान की गोदी में, सारा तनाव मिट जाता है,
इंसान अपनी आत्मा से जुड़कर, वर्तमान में जीना सीख जाता है।
ना कोई खर्चा, ना कोई दवाई, बस इच्छाशक्ति की बात है,
रोज सुबह के बीस-तीस मिनट, सेहत की नई शुरुआत है।
तो उठो साथियों, कमर कसो, एक संकल्प आज दोहराएं,
'करें योग, रहें निरोग' का संदेश हम घर-घर पहुंचाएं।
कविता का संदेश: योग हमें दवाइयों पर निर्भर रहना नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली को सुधारकर खुद को भीतर से मजबूत बनाना सिखाता है। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और एक खुशहाल, लंबा और स्वस्थ जीवन जिएं।
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