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गुजरात में कॉन्ट्रैक्ट नौकरियों में आरक्षण लागू करने की तैयारी में सरकार

Bhupendra Patel
Gujarat Contracts Jobs Quota News: गुजरात सरकार ने लंबी विचार-विमर्श के बाद राज्य की संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) नौकरियों में आरक्षित वर्ग के लिए सीटें सुरक्षित करने की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यदि यह नीति लागू होती है, तो भविष्य में सभी कॉन्ट्रैक्ट आधारित नियुक्तियां आरक्षण के नियमों के अनुसार ही की जाएंगी। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के उम्मीदवारों को यह लाभ देने की संभावनाओं को गंभीरता से जांच रही है, जो सरकारी भर्ती प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

विभिन्न वर्गों की मांग और मंत्री स्तर पर समीक्षा

जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार को विभिन्न सामाजिक संगठनों और वर्गों से कॉन्ट्रैक्ट आधारित भर्तियों में आरक्षण लागू करने की मांगें मिलने के बाद यह मामला विचारधीन आया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा शिक्षा मंत्री प्रद्युम्न सिंह जाडेजा ने इस प्रस्ताव की गंभीरता को समझते हुए गुरुवार को शिक्षा और सामाजिक न्याय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक आयोजित की। इस बैठक में प्रस्तावित नीति की कानूनी और व्यावहारिक संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

राज्य में कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की सटीक संख्या जुटाने की कवायद

समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत सभी कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों का सटीक डेटा तुरंत एकत्र करने के निर्देश दिए। सरकारी तंत्र के पास वर्तमान में ऐसे कर्मचारियों का एकीकृत डेटा आसानी से उपलब्ध न होने के कारण यह निर्देश जारी किया गया है। एक अनुमान के अनुसार, पूरे गुजरात में वर्तमान में 3,00,000 से अधिक लोग कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर काम कर रहे हैं, और वास्तविक संख्या इससे भी काफी अधिक हो सकती है।

वर्ग 3-4 से लेकर डॉक्टरों तक कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम का विस्तार

वर्तमान में राज्य सरकार के लगभग सभी विभागों में कॉन्ट्रैक्ट आधारित नियुक्तियां आम हो गई हैं। विशेष रूप से वर्ग-3 और वर्ग-4 के अधिकांश पद इसी प्रकार भरे जाते हैं। इतना ही नहीं, अब डॉक्टर, नर्स और अन्य विशिष्ट तकनीकी पदों के साथ-साथ राज्य सचिवालय के कई महत्वपूर्ण पद भी कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर भरे जा रहे हैं, जिसके कारण इस क्षेत्र में आरक्षण की आवश्यकता और अधिक तीव्र हो गई है।

वर्तमान भर्ती पद्धति और आरक्षण का अभाव

मौजूदा स्थिति में सरकारी विभागों में कॉन्ट्रैक्ट भर्ती दो तरीकों से होती है: पहला, विभागों द्वारा सीधी नियुक्ति और दूसरा, निजी एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग। सामान्य स्थायी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में नियमानुसार SC, ST और OBC वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान होता है, लेकिन वर्तमान कॉन्ट्रैक्ट या आउटसोर्सिंग भर्तियों में किसी भी प्रकार का कोटा या आरक्षण नियम लागू नहीं होता है।

टेंडर प्रक्रिया में ही आरक्षण के नियम जोड़ने का प्रस्ताव

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी सरकारी खजाने से ही किया जाता है, इसलिए आरक्षण लागू करना न्यायसंगत होगा। इसके लिए एक व्यावहारिक समाधान यह विचाराधीन है कि आउटसोर्सिंग करने वाली निजी एजेंसियों के लिए जारी किए जाने वाले सरकारी टेंडरों में ही आरक्षण की शर्तें जोड़ दी जाएं। ऐसा करने से एजेंसियां भर्ती करते समय स्वतः ही आरक्षण नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगी।

देशभर में कॉन्ट्रैक्ट आरक्षण की वर्तमान स्थिति

आउटसोर्सिंग और कॉन्ट्रैक्ट भर्तियों में कानूनी सुधार करके स्पष्ट आरक्षण नीति लागू करने वाला कर्नाटक देश का पहला राज्य बना था। अब गुजरात ने भी इस दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार अभी भी इस पर विचार कर रही है। गुजरात में 50 प्रतिशत से अधिक OBC आबादी और उल्लेखनीय आदिवासी (ST) आबादी होने के कारण यह निर्णायक कदम बड़ा सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव डाल सकता है।
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