सम्बंधित जानकारी
- बिना सात फेरे के कैसा विवाह? गुजरात हाईकोर्ट ने शून्य घोषित की शादी, मैरिज सर्टिफिकेट को किया खारिज
- Sathankulam Death Case : 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा, मदुरै कोर्ट का बड़ा फैसला, हिरासत में हुई पिता-पुत्र की मौत
- आसाराम को बड़ा झटका, मोटेरा में अवैध कब्जे पर हाईकोर्ट सख्त, आश्रम पर चलेगा बुलडोजर
- और कठिन हुई शेख हसीना की बांग्लादेश वापसी की राह
- Sheikh Hasina : क्या शेख हसीना को बांग्लादेश को सौंपेगा भारत, मौत की सजा पर विदेश मंत्रालय का बयान
अहमदाबाद 2008 सीरियल ब्लास्ट केस, गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा रखी बरकरार
वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के फैसले को पूरी तरह मान्य रखते हुए 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा और 11 दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषियों द्वारा सजा के खिलाफ दायर की गई सभी अपीलों को खारिज कर दिया है। इस फैसले के मद्देनजर गुजरात हाईकोर्ट परिसर में बम स्क्वॉड और भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
साल 2008 का वो काला दिन : 21 धमाके, 56 मौतें और देश के इतिहास का सबसे बड़ा फैसला
गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर के 20 अलग-अलग स्थानों पर हुए 21 सीरियल बम ब्लास्ट में 56 बेकसूर लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में साल 2022 में अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट ने एक साथ 38 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे देश के न्यायिक इतिहास में सबसे बड़ा फैसला माना गया था। इस मामले में कुल 78 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चलाया गया था, जिसमें से सेशंस कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी करार दिया था और 29 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
घायलों को मुआवजा देने का आदेश : मार्च 2027 तक की समय सीमा तय
गुजरात हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखने के साथ ही पीड़ितों के लिए मुआवजे की भी घोषणा की है। कोर्ट ने अपने फैसले में आदेश दिया है कि इस ब्लास्ट में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को 5 लाख रुपए और मामूली रूप से घायल हुए लोगों को 1 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। मुआवजे की यह राशि चुकाने के लिए हाईकोर्ट ने 31 मार्च, 2027 तक की समय सीमा (डेडलाइन) तय की है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट का आखिरी विकल्प
निचली अदालत के फैसले के बाद राज्य सरकार ने फांसी की सजा की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जबकि दूसरी तरफ दोषियों ने भी सजा के खिलाफ अपील की थी। अब गुजरात हाईकोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाने के बाद, कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषियों के पास देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का आखिरी विकल्प बचा है। यदि दोषी वहां याचिका दायर करते हैं, तो इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी।
