1. समाचार
  2. मुख्य ख़बरें
  3. गुजरात
  4. Death sentences of 38 convicts upheld in 2008 Ahmedabad serial blast case

अहमदाबाद 2008 सीरियल ब्लास्ट केस, गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा रखी बरकरार

Death sentences of 38 convicts upheld in 2008 Ahmedabad serial blast case
वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के फैसले को पूरी तरह मान्य रखते हुए 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा और 11 दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषियों द्वारा सजा के खिलाफ दायर की गई सभी अपीलों को खारिज कर दिया है। इस फैसले के मद्देनजर गुजरात हाईकोर्ट परिसर में बम स्क्वॉड और भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
 

साल 2008 का वो काला दिन : 21 धमाके, 56 मौतें और देश के इतिहास का सबसे बड़ा फैसला

गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर के 20 अलग-अलग स्थानों पर हुए 21 सीरियल बम ब्लास्ट में 56 बेकसूर लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में साल 2022 में अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट ने एक साथ 38 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे देश के न्यायिक इतिहास में सबसे बड़ा फैसला माना गया था। इस मामले में कुल 78 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चलाया गया था, जिसमें से सेशंस कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी करार दिया था और 29 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।

घायलों को मुआवजा देने का आदेश : मार्च 2027 तक की समय सीमा तय

गुजरात हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखने के साथ ही पीड़ितों के लिए मुआवजे की भी घोषणा की है। कोर्ट ने अपने फैसले में आदेश दिया है कि इस ब्लास्ट में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को 5 लाख रुपए और मामूली रूप से घायल हुए लोगों को 1 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। मुआवजे की यह राशि चुकाने के लिए हाईकोर्ट ने 31 मार्च, 2027 तक की समय सीमा (डेडलाइन) तय की है।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट का आखिरी विकल्प

निचली अदालत के फैसले के बाद राज्य सरकार ने फांसी की सजा की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जबकि दूसरी तरफ दोषियों ने भी सजा के खिलाफ अपील की थी। अब गुजरात हाईकोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाने के बाद, कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषियों के पास देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का आखिरी विकल्प बचा है। यदि दोषी वहां याचिका दायर करते हैं, तो इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी।
लेखक के बारे में
चेतन गौड़
अगला लेख
पीएम मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान, कई समझौतों पर लगी मुहर