क्या था Bilkis Bano Gang Rape Case जिसमें मिली थी 11 लोगों को रिहाई, अब सभी दोषी फिर जाएंगे जेल
2002 से लेकर 2023 तक क्या है बिलकिस की कहानी
- 11 दोषियों को 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया गया था
- दुष्कर्म और 7 लोगों की हत्या के मामले में काट रहे थे सजा
- अब सुप्रीम कोर्ट ने पलटा फैसला, दोषियों को जाना होगा जेल
गुजरात सरकार के सभी दोषियों की रिहाई के फैसले को सोमवार (8 जनवरी) को सर्वोच्च न्यायालय ने पलटते हुए सभी दोषियों की सजा में मिली छूट को रद्द कर दिया। अब उन्हें फिर से जेल की सजा काटना होगी। बता दें कि दोषियों की रिहाई के बाद उन्हें फूलमाला पहनाकर और मिठाई खिलाकर स्वागत किया गया था। इस पर भी जमकर विवाद हुआ था।
कौन हैं बिलकिस बानो, 2002 में क्या हुआ था?
बता दें कि 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस में गोधरा स्टेशन के पास आग लगा दी गई। इस घटना में अयोध्या से लौट रहे 59 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। घटना के चलते गुजरात में दंगे भड़क उठे। दंगों की आग तीन मार्च 2002 को बिलकिस के परिवार तक पहुंच गई। उस वक्त 21 साल की बिलकिस के परिवार में बिलकिस और उनकी साढ़े तीन साल की बेटी के साथ 15 अन्य सदस्य भी थे। चार्जशीट के मुताबिक बिलकिस के परिवार पर हसिया, तलवार और अन्य हथियारों से लैस 20-30 लोगों ने हमला बोल दिया था। इनमें दोषी करार दिए गए 11 लोग भी शामिल थे।
घटना के बाद क्या हुआ : घटना के बाद बिलकिस लिमखेड़ा पुलिस स्टेशन पहुंचीं। जहां उन्होंने शिकायत दर्ज कराई। सीबीआई के मुताबिक शिकायत दर्ज करने वाले हेड कॉन्स्टेबल सोमाभाई गोरी ने भौतिक तथ्यों को दबाया और बिलकिस की शिकायत को तोड़-मरोड़ कर लिखा। यहां तक की उन्हें मेडिकल जांच के लिए सरकारी अस्पताल में तब ले जाया गया जब वो गोधरा के राहत कैंप में पहुंची। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बिलकिस का मामला सीबीआई को जांच के लिए स्थानांतरित कर दिया गया।
सीबीआई की जांच और सजा : सीबीआई ने मामले की नए सिरे जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि मारे गए लोगों का पोस्टमॉर्टम तक ठीक से नहीं किया गया था। सीबीआई जांचकर्ताओं ने हमले में मारे गए लोगों के शव निकाले और पाया कि शवों में से किसी में भी खोपड़ी तक नहीं थी। सीबीआई के मुताबिक पोस्टमार्टम के बाद लाशों के सिर काट दिए गए थे, ताकि शवों की शिनाख्त न हो सके।
कौन हैं आरोपी : जिन 11 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था उनमें जसवंतभाई नाई, गोविंदभाई नाई, नरेश कुमार मोरधिया (मृतक), शैलेष भट्ट, राधेश्याम शाह, बिपिन चंद्र जोशी, केसरभाई वोहानिया, प्रदीप वोहानिया, बाकाभाई वोहानिया, राजूभाई सोनी, नितेश भट्ट, रमेश चंदना और हेड कांस्टेबल सोमाभाई गोरी शामिल थे। जसवंत, गोविंद और नरेश को बिलकिस से दुष्कर्म किया था। वहीं, शैलेष ने बिलकिस की बेटी सालेहा को जमीन पर पटक कर मार डाला था।
मई 2017 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सामूहिक दुष्कर्म मामले में 11 लोगों की आजीवन कैद की सजा को बरकरार रखा। वहीं, पुलिसवालों और डॉक्टर समेत बाकी सात लोगों को बरी कर दिया। अप्रैल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को आदेश दिया कि वो बिलकिस को दो हफ्ते के अंदर 50 लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दे।
किस कानून के तहत रिहाई : संविधान के अनुच्छेद 72 और 161 में राष्ट्रपति और राज्यपाल के पास कोर्ट से सजा पाए दोषियों की सजा को कम करने, माफ करने और निलंबित करने की शक्ति है। कैदी राज्य का विषय होते हैं इस वजह से राज्य सरकारों के पास भी दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 432 के तहत सजा माफ करने का अधिकार है।
बिलकिस पहुंची सुप्रीम कोर्ट : बिलकिस ने सरकार के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार के इस आदेश को किसी भी अन्य सरकारी आदेश की तरह ही चुनौती दी जा सकती है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी 11 दोषियों की सजा पर मिली छूट को रद्द कर दिया। अब फिर से दोषियों को जेल जाना होगा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आम लोगों की प्रतिक्रिया आ रही हैं कि आखिरकार बिलकिस को न्याय मिला।
Written and Edited By : Navin Rangiyal

