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परोपकार: मजबूरी में नंगे पैर सफर करने वाले मजदूरों को पहना रहे जूते- चप्पल
लॉकडाउन की वजह से पलायन हो रहे मजदूरों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हजारों किलोमीटर पैदल चलना उनका अपना एक संघर्ष तो है ही।
ऐसे में कई स्थानों पर लोगों में ऐसे मजबूर मजदूरों के लिए सेवा भाव भी जाग रहा है। कोई इन मजदूरों को रास्ते में खाना खिला रहा है तो कोई पानी पिला रहा है। कहीं रसना और ठंडी छाछ का वितरण किया जा रहा है, जिससे चिलचिलाती धूप और गर्मी में हलाकान हो रहे मजूदरों, उनकी पत्नियों और मासूम बच्चों के गलों को तर किया जा सके।
इंदौर में बायपास से गुजरते ऐसे ही मजूदरों के लिए कई परिवारों ने एक अलग तरह का इंतजाम किया है। जो लोग महाराष्ट्र, छत्तीसगढ या अन्य किसी राज्य से आकर मध्यप्रदेश की सीमा से गुजर रहे हैं, उनके लिए इंदौर के लोगों ने पैरों में जूते और चप्पलों का इंतजाम किया है।
गर्मी के पारे में पिघलती सड़क की बर्फ में पैर रखना अंगारों पर चलने के समान है। ऐसे में कई लोग पलायन करने वाले मजदूरों को पुरानी चप्पलें या जूते बांट रहे हैं। कई परिवारों ने अपने घर में रखे पुराने जूते चप्पल ऐसे लोगों के लिए जमा किए और सड़क किनारे रख दिए हैं। मजदूर और उनके बच्चे ऐसी सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। यह काम कई लोगों ने किया है, बायपास पर ऐसे कई स्थानों पर मजदूर अपने लिए जूते और चप्पलों को टटोलते हुए देखे जा सकते हैं।
यह बेहद ही दर्दनाक और दुखदायी है कि लॉकडाउन की वजह से हजारों लाखों गरीब लोगों को इस तरह यह कष्टदायी सफर तय करना पड़ रहा है।
ऐसे में उन लोगों का क्या आलम होगा जिन्हें रास्ते में कहीं भोजन, पानी या नंगे पैरों के लिए जूते और चप्पल नहीं मिल रहे होंगे। क्या उनका सफर भी इतना ही आसान होगा। या वे इन लंबे रास्तों के साथ ही अपने नसीब में लिखे इस त्रासदी से भरे सफर को भी इसी तरह कष्ट में काट रहे होंगे।
ऐसे में कई स्थानों पर लोगों में ऐसे मजबूर मजदूरों के लिए सेवा भाव भी जाग रहा है। कोई इन मजदूरों को रास्ते में खाना खिला रहा है तो कोई पानी पिला रहा है। कहीं रसना और ठंडी छाछ का वितरण किया जा रहा है, जिससे चिलचिलाती धूप और गर्मी में हलाकान हो रहे मजूदरों, उनकी पत्नियों और मासूम बच्चों के गलों को तर किया जा सके।
इंदौर में बायपास से गुजरते ऐसे ही मजूदरों के लिए कई परिवारों ने एक अलग तरह का इंतजाम किया है। जो लोग महाराष्ट्र, छत्तीसगढ या अन्य किसी राज्य से आकर मध्यप्रदेश की सीमा से गुजर रहे हैं, उनके लिए इंदौर के लोगों ने पैरों में जूते और चप्पलों का इंतजाम किया है।
यह बेहद ही दर्दनाक और दुखदायी है कि लॉकडाउन की वजह से हजारों लाखों गरीब लोगों को इस तरह यह कष्टदायी सफर तय करना पड़ रहा है।
ऐसे में उन लोगों का क्या आलम होगा जिन्हें रास्ते में कहीं भोजन, पानी या नंगे पैरों के लिए जूते और चप्पल नहीं मिल रहे होंगे। क्या उनका सफर भी इतना ही आसान होगा। या वे इन लंबे रास्तों के साथ ही अपने नसीब में लिखे इस त्रासदी से भरे सफर को भी इसी तरह कष्ट में काट रहे होंगे।
