prostitution_films | ''बिना कंडोम के डबल पैसे ले लो''
- मधु पाल
BBC |
मुंबई का कमाठीपुरा इलाका। यहां पिछले दिनों अभिनेत्री वीना मलिक ने अपनी पहली फिल्म 'ज़िदंगी 50-50' के प्रमोशन के लिए कंडोम बांटे। इस फिल्म में एक वेश्या का रोल निभा रही वीना ने कहा कि अपने किरदार को समझने के लिए उन्होंने कई बार इस जगह के चक्कर लगाए।
रेड लाइट एरिया के रूप में मशहूर ऐसे कई इलाकों से निकले किरदारों को हिंदी फिल्मों में जगह मिली है। फिर वो गुरुदत्त की 'प्यासा' में वहीदा रहमान द्वारा निभाया गया गुलाबो का रोल हो या फिर पिछले साल रिलीज़ हुई आमिर खान की फिल्म 'तलाश' में करीना कपूर का रोज़ी नाम का किरदार।
हिंदी सिनेमा में वेश्यावृत्ति के इर्द-गिर्द कई फिल्में बनाई गई हैं लेकिन वीना मलिक का दावा है कि वो पहली कलाकार है जो अपनी फिल्म के प्रमोशन के लिए मीडिया के सामने इस इलाके में पहुंची हैं।
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सेक्स वर्कर के लिए अहमियत : ये इलाका फिल्मों के प्रमोशन के लिए खासा ध्यान बटोरता है, लेकिन कौन-सी फिल्में यहां रहने वालों का ध्यान बटोरती हैं? फिल्म प्रमोशन के लिए बंटने वाले कंडोम इस इलाके में रहने वाले सेक्स वर्कर के लिए असल में कितनी अहमियत रखते हैं?
पद्मा ने दो साल बतौर बार-डांसर भी काम किया। फिलहाल उनकी एक बेटी है जिसे वो इस काम से दूर रखना चाहती हैं। अपनी बेटी की अच्छी पढ़ाई के लिए पद्मा अब भी रेड लाइट एरिया में काम करती हैं।
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