पानी के संकट से जूझता भारत
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बीबीसी संवाददाता जुबैर अहमद के अनुसार मुंबई के करीब दो करोड़ लोगों को पानी की आपूर्ति में तीस प्रतिशत की कटौती कर दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि उनके पास सिर्फ अगले दो महीनों के लिए पानी बचा हुआ है और अगर मानसून अपने पूरे जोर से समय पर नहीं आता तो मुंबई के लोगों के लिए पानी ही नहीं होगा। अधिकारी कृत्रिम वर्षा के लिए बादल बनाने की योजना पर भी विचार कर रहे हैं।
महानगरों, अनेक राज्यों में समस्या : मुंबई ही नहीं देश के की इलाके पहले से ही पानी की समस्या से जूझ रहे हैं लेकिन यह समस्या महानगरों में विकराल रुप लेती जा रही है।
राजधानी दिल्ली में कुछ ही समय पहले पानी और बिजली की कमी के कारण लोगों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किए थे। अभी भी दिल्ली के कई इलाक़ों में पानी की आपूर्ति पर्याप्त नहीं मानी जाती है।
देश के बड़े राज्य मध्यप्रदेश, बिहार और राजस्थान के अनेक क्षेत्रों में ऐसी ही हालत है। वहाँ कई इलाक़ों में हर साल गर्मियों में पानी की कमी हो जाती है।
बीबीसी संवाददाता फैसल मोहम्मद अली इस वर्ष मध्य प्रदेश के उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों में सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि इस बार पानी की दिक्कत होगी।
इन स्थानों पर अब पाँच-पाँच दिनों पर एक बार पानी मिल पाता है। राजधानी भोपाल में स्थित सबसे बड़ा ताल पूरी तरह सूख गया है और इसमें बिल्कुल पानी नहीं है।
इसके पीछे मानसून के समय पर न आने को भी एक कारण बताया जा रहा है। पिछले दिनों भोपाल में पानी की आपूर्ति को लेकर स्थानीय लोगों के बीच झड़पों में तीन लोगों की मौत हो गई है।
राज्य के कुछ स्थानों पर पानी की पाइपलाइनों पर पुलिस का पहरा लगा दिया है क्योंकि लोग इन पाइपों को तोड़ कर पानी निकाल ले रहे हैं।
फ़ैसल मोहम्मद अली का कहना है कि पानी की कमी के पीछे पानी के टैंकर बेचने वाले व्यवसायियों का हाथ भी हैं क्योंकि पानी के व्यवसाय में उन्हें बड़ा फायदा है और इससे कई राजनीतिक नेता भी जुड़े हुए हैं।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली में भी कुछ इलाकों के बारे में ऐसा ही कहा जाता है कि पानी का बड़ा व्यवसाय फल फूल रहा है। बीबीसी संवाददाता मणिकांत ठाकुर के अनुसार पूरे राज्य में पानी का संकट बना हुआ है।
जहाँ नालंदा के देहाती क्षेत्र में पानी का स्तर बहुत नीचे चला गया है, वहीं औरंगाबाद में डेढ़ महीने से लोग बोरिंग कराने के प्रयास में हैं ताकि पीने के पानी की सप्लाई सुनिश्चित हो सके। पालीगंज और विक्रमगंज समेत पटना के आसपास भी अनेक क्षेत्रों में हजारों लोग काफी दिक्कत झेल रहे हैं।
विशेषज्ञ की राय : जल संसाधनों के लिए काम करने वाले राजेंद्र सिंह कहते हैं कि पानी को लेकर दिक्कत भारत में तब तक रहेगी जब तक इस पर कोई व्यापक नीति नहीं बनाई जाती।
विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह कहते हैं कि सरकार के पास जल से जुड़ी न तो कोई व्यापक नीति है और न ही इस पर कोई गंभीर काम हो रहा है। शहरों में पानी की बर्बादी अधिक होती है और ये शहरों में पानी की कमी का एक बड़ा कारण है।
वो जैसलमेर जैसे रेगिस्तानी शहर का उदाहरण देते हैं और कहते हैं कि जब ऐसे शहर कम पानी के साथ फल-फूल सकते हैं तो भारत के अन्य शहर ऐसा क्यों नहीं कर सकते लेकिन देश में इससे जुड़ी नीतियाँ नहीं हैं।

