9 साल पुरानी शादी खत्म, शहडोल MP हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी का तलाक
BJP MP Himadri Singh divorce: मध्य प्रदेश के शहडोल संसदीय क्षेत्र से दो बार की भाजपा (BJP) सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति व मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिंह मरावी का वैवाहिक रिश्ता कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। अदालत ने दोनों की तलाक की अर्जी पर अंतिम मुहर लगाते हुए डिक्री पारित कर दी है। दोनों नेता पिछले कई सालों (करीब 5 साल) से एक-दूसरे से अलग रह रहे थे।
2017 में हुई थी हाई-प्रोफाइल शादी
हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी का विवाह 23 नवंबर 2017 को अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ में हुआ था। लगभग नौ साल पुरानी इस शादी के आधिकारिक रूप से समाप्त होने के बाद अब दोनों की राहें कानूनी रूप से अलग हो गई हैं। दंपत्ति की एक बेटी है, जिसका नाम गिरिशा कुमारी सिंह है। बेटी अपनी मां हिमाद्री सिंह के साथ ही रहती है।
दिग्गज घराने से संबंध रखती हैं हिमाद्री
हिमाद्री सिंह मध्य प्रदेश के एक बेहद प्रतिष्ठित आदिवासी राजनीतिक परिवार की विरासत संभाल रही हैं। उनके पिता स्वर्गीय दलवीर सिंह कांग्रेस के दिग्गज नेता थे और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के मंत्रिमंडल में केंद्रीय मंत्री रह चुके थे। उनकी मां स्वर्गीय राजेश नंदिनी सिंह भी कोतमा सीट से विधायक और शहडोल से कांग्रेस की सांसद रह चुकी हैं। दिल्ली से शुरुआती शिक्षा प्राप्त करने वाली हिमाद्री देश के प्रमुख युवा आदिवासी चेहरों में शुमार हैं। वे उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित युवा सांसदों के वैश्विक सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं।
सास के खिलाफ ही चुनाव लड़ चुके हैं नरेंद्र मरावी
नरेंद्र सिंह मरावी का राजनीतिक सफर भी काफी चर्चित रहा है। छात्र राजनीति के दौरान वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से उभरे और बाद में मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष बने। दिलचस्प पहलू यह है कि वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मरावी ने भाजपा के टिकट पर अपनी होने वाली सास (हिमाद्री की मां) राजेश नंदिनी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था, हालांकि उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 2018 के राज्य विधानसभा चुनाव में भी वे पुष्पराजगढ़ सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे।
कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आईं
हिमाद्री सिंह ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत वर्ष 2016 में कांग्रेस के टिकट पर शहडोल सीट से उपचुनाव लड़कर की थी। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा शामिल हो गईं। माना जाता है कि उस समय उन्हें भाजपा में लाने में नरेंद्र मरावी ने अहम भूमिका निभाई थी।
भाजपा के टिकट पर हिमाद्री ने 2019 और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में शहडोल सीट से लगातार दो बार बड़े अंतर से जीत दर्ज की। समय के साथ एक ओर जहां हिमाद्री का राजनीतिक कद बढ़ता गया, वहीं दूसरी ओर पति नरेंद्र मरावी के साथ उनके पारिवारिक मतभेद गहरे होते चले गए, जिसका अंत अंततः कानूनी तलाक के रूप में हुआ।

