क्या E20 पेट्रोल से इंजन को नुकसान हो सकता है, आयोग के फैसले से शुरू हुई नई बहस
रायपुर में E20 पेट्रोल से 20.50 लाख की कार का इंजन खराब, आयोग ने कंपनी को नई कार देने का दिया आदेश
देशभर में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के बीच छत्तीसगढ़ के रायपुर से एक बड़ा मामला सामने आया है। इसने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के दावे, कार कंपनियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस E20 पेट्रोल को लेकर वायरल हो रहे वीडियो के बीच नई बहस शुरू कर दी है। दरअसल, रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक कार निर्माता कंपनी को ग्राहक की नई कार बदलकर देने या फिर उसकी 20.50 लाख रुपए की पूरी कीमत लौटाने का आदेश दिया है।
आयोग ने माना कि वाहन का इंजन E20 पेट्रोल के अनुकूल (Compatible) नहीं था, जिसके कारण इंजन को गंभीर नुकसान पहुंचा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है और इसकी उपयुक्तता को लेकर बहस जारी है।
कंपनी और डीलर दोनों को ठहराया जिम्मेदार
उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में कहा कि वाहन निर्माता और डीलर दोनों सेवा में कमी (Deficiency in Service) के दोषी हैं। आयोग ने निर्देश दिया कि यदि कंपनी ग्राहक को नई कार उपलब्ध नहीं कराती है, तो उसे 20.50 लाख रुपये की पूरी खरीद राशि लौटानी होगी। इसके अलावा
- 1 लाख रुपए मानसिक उत्पीड़न (Mental Harassment) के मुआवजे के रूप में।
- 10 हजार रुपए मुकदमे के खर्च (Litigation Cost) के रूप में भी देने होंगे।
इस तरह कंपनी की कुल देनदारी करीब 21.60 लाख रुपए होगी। आयोग ने आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करने को कहा है। तय समय में आदेश का पालन नहीं होने पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
क्या है E20 पेट्रोल विवाद?
भारत सरकार ने कच्चे तेल के आयात को कम करने और प्रदूषण घटाने के उद्देश्य से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया है। हालांकि, इस फैसले के बाद कई उपभोक्ताओं और विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि: पुराने वाहनों में माइलेज कम हो सकता है।
- इंजन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
- रखरखाव की लागत बढ़ सकती है।
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पेट्रोल पंपों पर सामान्य पेट्रोल (Pure Petrol) का विकल्प नहीं मिल रहा है।
अरविंद केजरीवाल ने भी उठाए थे सवाल
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर E20 पेट्रोल को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि जिन वाहनों को एथेनॉल मिश्रित ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किया गया है, उनमें-
- माइलेज घट सकता है।
- इंजन जल्दी खराब हो सकता है।
- वाहन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
उन्होंने सरकार से पेट्रोल पंपों पर Pure Petrol का विकल्प उपलब्ध कराने और E20 पेट्रोल की कीमत कम करने की मांग भी की थी।
केंद्र सरकार ने क्या दिया तर्क
10 जुलाई को केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि पूरे देश में Pure Petrol, E10 और E20 जैसे अलग-अलग ग्रेड का पेट्रोल उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से काफी कठिन होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, E20 लागू करने से पहले वाहन निर्माताओं से व्यापक चर्चा की गई थी और वाहनों की अनुकूलता, इंजन प्रदर्शन, उत्सर्जन (Emission) और ईंधन दक्षता (Fuel Efficiency) का मूल्यांकन किया गया था।
उपभोक्ताओं के लिए क्यों अहम है फैसला?
रायपुर उपभोक्ता आयोग का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देशभर में E20 पेट्रोल का विस्तार किया जा रहा है। ऐसे में यह आदेश भविष्य में उन उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा सकता है, जिनके वाहन E20 ईंधन के उपयोग से प्रभावित होने का दावा करते हैं।

