मशहूर गुजराती संगीतकार गौरंग व्यास का निधन, 100 से ज्यादा फिल्मों में दिया था संगीत, पीएम मोदी ने जताया दुख
गुजराती संगीत और सिनेमा जगत को समृद्ध बनाने वाले प्रख्यात संगीतकार, अरेंजर और गायक गौरंग व्यास का 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। कई दशकों तक गुजराती लोक संगीत, सुगम संगीत और क्षेत्रीय सिनेमा में अपनी रचनाओं से जादू बिखेरने वाले गौरंग व्यास के जाने से कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
गौरंग व्यास संगीत की अनमोल विरासत वाले परिवार से ताल्लुक रखते थे। वे गुजराती संगीत के सर्वकालिक महान संगीतकारों में शुमार अविनाश व्यास के सुपुत्र थे। अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए उन्होंने न केवल पारंपारिक तानों को सहेजा, बल्कि आधुनिक दौर के अनुसार उसमें नयापन भी पिरोया।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अपने पिता के सहायक के रूप में प्रसिद्ध फिल्म 'जेसल तोरल' से की थी। इसके बाद फिल्म 'लाखो फुलानी' से उन्होंने बतौर स्वतंत्र संगीत निर्देशक अपनी नई पारी शुरू की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
— Narendra Modi (@narendramodi) September 3, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर गौरंग व्यास के साथ एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। पीएम मोदी ने लिखा, गुजराती संगीत जगत के जाने-माने संगीतकार श्री गौरंग व्यास के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। अपने पिता अविनाश व्यास की समृद्ध संगीत परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने गुजराती संगीत के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। उनके जाने से गुजरात ने एक प्रतिभाशाली सर्जक को खो दिया है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
100 से अधिक फिल्मों में दिया संगीत, दिग्गज गायकों के साथ किया काम
अपने विशाल करियर में गौरंग व्यास ने 100 से भी ज्यादा फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया। केतन मेहता की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित फिल्म 'भवनी भवाई' में उनका संगीत बेहद लोकप्रिय रहा। इसके अलावा 'मनियारो', 'नसीबनी बलिहारी', 'परकी थापन', 'लीलूडि धरती' और 'मैयारमन मांडू नथी लागतु' जैसी सुपरहिट फिल्मों में उनके संगीत ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संगीत संयोजन में महारत रखने वाले गौरंग व्यास ने भारतीय संगीत के सबसे बड़े नामों के साथ काम किया। उनकी धुनों को लता मंगेशकर, आशा भोसले, किशोर कुमार, मन्ना डे, महेंद्र कपूर, सुमन कल्याणपुर, भूपिंदर सिंह और प्रफुल्ल दवे जैसे महान गायकों ने अपनी आवाज दी। उनका रचा गीत 'मनियारो ते हलु हलु थाई रे वियो' और 'हू तू तू तू, जमी रमतनी रुतु' आज भी गुजरात के घर-घर में चाव से सुने जाते हैं।
भक्ति और गरबा एल्बमों से घर-घर पहुंचे
गौरंग व्यास का योगदान सिर्फ सिनेमा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भक्ति, लोकगीत और गरबा पर आधारित कई सुपरहिट गैर-फिल्मी एल्बम भी तैयार किए। इनमें जलारामनी झुंपड़ी, भजन अनमोल, गंगा सतीना भजनों, कहत कबीर, प्राचीन प्रभातियां और नॉन-स्टॉप डांडिया-रास शामिल हैं। नवरात्रि के दौरान उनके बनाए डांडिया ट्रैक्स आज भी गरबा प्रेमियों की पहली पसंद हैं।
गुजराती संगीत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए गौरंग व्यास को उनके करियर में 11 राज्य-स्तरीय 'बेस्ट म्यूजिक डायरेक्शन' अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 2022 में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उन्हें 'लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड' से नवाजा था। 2024 में गुजरात राज्य संगीत अकादमी और गुजरात टूरिज्म द्वारा उन्हें विशेष राज्य सम्मान प्रदान किया गया था।

