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16 shradh paksha 2026: श्राद्ध पक्ष में षष्ठी के श्राद्ध का महत्व, जानिए कैसे और किसका करते हैं श्रद्ध

shashti shradh 2026
पितृपक्ष में षष्ठी तिथि का श्राद्ध उन दिवंगत पितरों के लिए किया जाता है, जिनका देहावसान किसी भी माह के शुक्ल या कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को हुआ हो। लोक-परंपरा में इसे 'छठ श्राद्ध' के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से तर्पण और दान करने से पितरों को मोक्ष और शांति मिलती है तथा वे अपनी संतान को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। वर्ष 2026 में षष्ठी तिथि का श्राद्ध गुरुवार, 01 अक्टूबर 2026 को संपन्न किया जाएगा।
 

पंचांग एवं शुभ मुहूर्त

षष्ठी तिथि का प्रारंभ: 01 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:35 बजे से
षष्ठी तिथि का समापन: 02 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:15 बजे तक

श्राद्ध पूजन के मुख्य मुहूर्त (01 अक्टूबर 2026):

कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक।
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:34 बजे से दोपहर 01:22 बजे तक।
अपराह्न काल: दोपहर 01:22 बजे से अपराह्न 03:45 बजे तक।

षष्ठी श्राद्ध (छठ श्राद्ध) की प्रामाणिक एवं सरल विधि

षष्ठी तिथि का श्राद्ध उन पितरों के लिए किया जाता है, जिनका देहावसान किसी भी माह की षष्ठी तिथि को हुआ हो। इसे पूर्ण श्रद्धा और सात्विकता के साथ इस क्रम में संपन्न करें:

1. प्रातःकाल की तैयारी एवं शुद्धि

स्नान व आचमन: सुबह शीघ्र उठकर स्नान करें और स्वच्छ एवं पवित्र वस्त्र (संभव हो तो धोती/कुर्ता) धारण करें।
स्थान शुद्धि: श्राद्ध पूजा के स्थान को साफ करके गाय के गोबर व गंगाजल से पवित्र करें।

2. जल एवं तिल से तर्पण

दिशा: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें या खड़े हों।
सामग्री: हाथ में कुशा (घास), तांबे का पात्र, जल, गाय का कच्चा दूध, अक्षत और काले तिल लें।
तर्पण क्रिया: अंजलि में जल लेकर पितरों का स्मरण करते हुए अंजलि से जल गिराएं। तर्पण करते समय "ॐ पितृभ्यः नमः" मंत्र का जप करें।

3. पिण्डदान

पिण्ड निर्माण: पके हुए चावल, जौ के आटे या खोये में दूध और तिल मिलाकर गोल पिण्ड बनाएं।
अर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का ध्यान करते हुए पिण्ड अर्पित करें।

4. पंचबलि (पाँच जीवों को भोजन)

ब्राह्मण भोजन कराने से पूर्व तैयार सात्विक भोजन (खीर, पूड़ी, सब्जी) में से पाँच छोटे अंश (ग्रास) निकालें:
  1. गो-बलि: गाय के लिए
  2. श्वान-बलि: कुत्ते के लिए
  3. काक-बलि: कौवे के लिए
  4. देवादि-बलि: देवों/अतिथि के लिए
  5. पिपीलिकादि-बलि: चींटियों के लिए

5. ब्राह्मण भोजन एवं क्षमा याचना

ब्राह्मण भोज: योग्य एवं सात्विक ब्राह्मण को सम्मानपूर्वक आदर के साथ भोजन कराएं।
दान-दक्षिणा: भोजन के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, बर्तन और दक्षिणा देकर उनका आशीर्वाद लें।
क्षमा याचना: पूजा के अंत में हाथ जोड़कर पितरों से जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें और परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद लें।

श्राद्ध कर्म के दौरान ध्यान रखने योग्य सावधानियां

तामसिक आहार से दूरी: इस दिन घर में लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा और अन्य तामसिक वस्तुओं का प्रयोग व सेवन पूरी तरह वर्जित है।
संयम व आचरण: श्राद्ध के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें, बाल व नाखून न कटवाएं और घर में किसी भी प्रकार के क्लेश या विवाद से बचें।
बाहरी भोजन का निषेध: श्राद्ध कर्म करने वाले व्यक्ति को इस दिन दूसरों के घर या बाहर का भोजन ग्रहण करने से बचना चाहिए।
मांगलिक कार्य वर्जित: पितृपक्ष की अवधि के दौरान नया व्यवसाय, विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे उत्सव व मांगलिक कार्य न करें।
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