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रिश्तों में क्यों होता है अलगाव?

‍ऋतु कौशिक

डोर रिश्तों की
ND
एक-दूसरे के साथ जीवन का सफर तय करने की शुरुआत करने के कुछ ही समय बाद आपको अचानक महसूस होता है कि आपके संबंधों में अब वो ऊष्मा नहीं रही, जो शुरुआत में थी। एक-दूसरे का साथ अब आपको बोझ की तरह लगने लगा है। एक-दूसरे से बातें करने के लिए अब आपको विशेष प्रयत्न करने की जरूरत होती है...ऐसा लगने लगता है जैसे वो प्यार जिसके लिए आपने साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं... अब आपके बीच से गायब होता चला जा रहा है।

आप कोशिश करते हैं कि किसी तरह रिश्ते को और लंबा खींचा जा सके, लेकिन आखिरकार एक दिन आपको लगता है कि अब अलग होना ही बेहतर है। प्रेम भरे किसी भी रिश्ते में अलगाव का कोई एक कारण नहीं होता। छोटी-छोटी बहस या तकरार का रोज का किस्सा बन जाना, एक-दूसरे की पसंद-नापसंद का एकदम भिन्न होना, धैर्य खो देना, शक करना तथा प्रेम की कमी महसूस करना...ऐसे कई कारण हैं, जिनके चलते आपसी संबंधों में कड़वाहट तथा दरारें पनपने लगती हैं।

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कभी-कभी ये भी होता है कि आप किसी व्यक्ति को जाने बिना सिर्फ भावुकता के चलते उसके साथ जिंदगी बिताने का निर्णय ले लेते हैं, लेकिन आपको कुछ ही दिनों में लगने लगता है कि आपका निर्णय गलत था। इसलिए रिश्तों को जोड़ते समय और जोड़ने के बाद काफी सारी बातों का ध्यान रखना जरूरी है। यह जानना सबसे जरूरी है कि जिस व्यक्ति से आप प्रेम कर रहे हैं या जुड़ने जा रहे हैं आप उसको कितना जानते हैं और क्या उसके व्यक्तित्व और आपके व्यक्तित्व में बहुत ज्यादा अंतर है?

इस बारे में भी सोचना आवश्यक है कि आप जिस भावना में बह रहे हैं, वह प्रेम ही है या महज आकर्षण? जब रिश्ते जुड़ जाएं तो फिर एक-दूसरे को सामान्य भाव से अपनाना तथा एक-दूसरे को समझने का वक्त निकालना सबसे महत्वपूर्ण है। यदि आप रिश्ते को अटूट बनाए रखना चाहते हैं तो आपसी सामंजस्य, एक-दूसरे की पसंद-नापसंद, एक-दूसरे की भावनाओं आदि जैसी बातों को महत्व देने के साथ ही आपसी प्रेम की गहराई भी बनाए रखनी होगी। आपस में बैठकर बातचीत करने और अपने लगाव या प्रेम को सहज भाव से प्रदर्शित करने के मौके निकालने से भी रिश्तों में दूरियों को बढ़ने से रोका जा सकता है।