मध्यप्रदेश में आरटीआई के केसों में पहली बार नया प्रयोग
- वीडियो कॉल पर सुनवाई, व्हाट्सएप पर आदेश, एक ही दिन में आदेश का पालन
- मध्यप्रदेश में मोबाइल फोन पर केस की सुनवाई पहली बार
- आरटीआई की 7000 अपीलें लंबित हैं, दो महीने से काम ठप होने से मोबाइल फोन पर सुनवाई
- आयोग ने चेताया-आदेश का पालन न हुआ तो 25 हजार की पेनाल्टी से बचना मुश्किल होगा
आयोग में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सीमित सुविधा को देखते हुए यह संभव नहीं था कि नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हो सके। इसलिए पहली बार मोबाइल पर वीडियो कॉल के जरिए दूर के दो जिलों उमरिया और शहडोल की लंबित अपीलों पर सुनवाई की गई। सूचना के अधिकार के तहत आवेदन लगाने वालों और उनके विभागों के लोक सूचना अधिकारियों को सबसे पहले इसके लिए तैयार किया गया। दोनों पक्षों की सहमति मिलने के बाद व्हाट्सएप पर ही उन्हें सुनवाई का सूचना पत्र दिया गया। सोमवार को पहले दो मामलों की सुनवाई के बाद निराकरण किया गया और इसका फैसला भी हाथों-हाथ व्हाट्सएप के जरिए भेजा गया, जो डाक से उन्हें बाद में मिलेगा।
आयोग ने फैसले में लिखा है कि कोरोना महामारी के कठिन समय में सरकारी कामकाज में नई तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए। यही इस वैश्विक संकट में हमारा सबक है कि हम रोजमर्रा के काम में तकनीक का इस्तेमाल करें। इससे सुनवाई के लिए लंबी यात्रा का समय और खर्च दोनों ही बचाए जा सकते हैं।
उमरिया: आवेदक शशिकांत सिंह ने शिक्षा विभाग में एक ही बिंदु पर शिक्षकों के रिक्त पदों की जानकारी अक्टूबर 2019 में मांगी थी, जो 30 दिन की समय सीमा में उन्हें नहीं दी गई। आज की सुनवाई में लोक सूचना अधिकारी उमेश धुर्वे को तत्काल यह जानकारी देने का आदेश किया गया। दोपहर बाद आदेश की प्रति व्हाट्सएप पर भेजी गई। लेकिन तब तक आवेदक शिक्षा विभाग के कार्यालय पहुंचे और उन्हें जानकारी मिल चुकी थी। उन्होंने बाद में कहा कि मामलों को टालने की आम प्रवृत्ति है। अधिकारी जानकारी देने से बचते हैं। लोग बिलावजह परेशान होते हैं।
शहडोल: स्थानीय निवासी जगदीश प्रसाद ने तीन बिंदुओं की जानकारी शिक्षा विभाग से नवंबर 2019 मांगी थी। यह निजी स्कूलों की मान्यता और शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता से संबंधित जानकारी थी। प्रथम अपील अधिकारी के आदेश का भी इसमें पालन नहीं किया गया था। दो बिंदुओं से संबंधित दस्तावेज सुनवाई के दौरान ही उपलब्ध कराए गए। लेकिन अपीलार्थी ने कहा के वे एकसाथ पूरी जानकारी लेना चाहेंगे। आयोग ने आदेश दिया कि एक महीने के भीतर पूरी जानकारी दी जाए।
-विजय मनोहर तिवारी, राज्य सूचना आयुक्त, मध्यप्रदेश

