जनक दीदी पौधे लगाकर मनाएंगी अपना 41वाँ रक्षा-बंधन
'जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' की निदेशक और प्रसिद्ध पर्यावरणविद डॉ. जनक पलटा मगिलिगन (जिन्हें सभी प्यार से 'जनक दीदी' कहते हैं) इस वर्ष अपना 41वाँ "रक्षा-बंधन" का पावन पर्व एक अनूठे और प्रेरणादायक अंदाज़ में मनाने जा रही हैं। पिछले 40 वर्षों की अपनी अनवरत परंपरा को जारी रखते हुए, वे इस बार भी अपने पर्यावरण-प्रेमी भाई-बहनों के साथ मिलकर सनावदिया स्थित अपने निवास 'गिरिदर्शन' के पीछे स्थित 'दुतनी टेकरी' पर सामूहिक रूप से पौधारोपण कर इस त्योहार को मनाएंगी।
भारतीय संस्कृति में "रक्षा-बंधन" का त्योहार भाई-बहन के पवित्र और अटूट रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र (राखी) बाँधती हैं और भाई जीवन भर अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है।
लेकिन जनक दीदी ने रक्षा-बंधन के इस पारंपरिक विचार को एक व्यापक और व्यावहारिक स्वरूप दिया है। उनका मानना है कि जब तक हमारी प्रकृति और पर्यावरण सुरक्षित नहीं रहेगा, तब तक मानव जीवन की सुरक्षा भी अधूरी है। इसी विचार के तहत वे इस दिन केवल इंसानों की ही नहीं, बल्कि पूरी सृष्टि और प्रकृति की रक्षा के लिए पौधे लगाती हैं।
प्रकृति संरक्षण के इस पावन अभियान में हर साल जनक दीदी के 'वृक्षमित्रों' (पर्यावरणप्रेमी साथियों) की संख्या लगातार बढ़ रही है। केवल पौधे लगाना ही नहीं, बल्कि उनके बड़े होने तक उनकी उचित देखभाल और सुरक्षा की ज़िम्मेदारी भी तय की गई है। इस अभियान में वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक (CCF) श्री पी. एन. मिश्रा और 'जैविक सेतु' संस्था का विशेष सहयोग व भागीदारी सुनिश्चित की गई है, ताकि लगाए गए सभी पौधे सुरक्षित रहकर एक समृद्ध जंगल का रूप ले सकें।

