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नर्सिंग के छात्रों ने पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन से क्लाइमेट एक्शन के लिए सस्टेनेबल लिविंग सीखी
इंदौर सेंट फ्रांसिस कॉलेज ऑफ नर्सिंग के 45 छात्रों (चौथे वर्ष) का एक समूह इंदौर के सनावदिया स्थित जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट में शैक्षणिक भ्रमण पर आया। कुल 45 छात्रों ने सस्टेनेबल लिविंग, पर्यावरण संरक्षण, रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) और सामुदायिक सशक्तिकरण के बारे में जानने के लिए इस दौरे में भाग लिया।
यह समूह सुबह 9:15 बजे सेंटर पहुंचा। भ्रमण के दौरान, छात्रों ने औषधीय पौधों, जैविक खेती के तरीकों, सोलर कुकर, रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम और अन्य पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को देखा। सेंटर ने पर्यावरण पर कम से कम असर डालते हुए सस्टेनेबल तरीके से जीने के व्यावहारिक उपाय दिखाए।
जिम्मी मगिलिगन सेंटर की डायरेक्टर डॉ. जनक पलटा मगिलिगन का जीवन सस्टेनेबल लिविंग का जीवंत उदाहरण है- 'वे अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल आदतों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सादगी को अपनाती हैं और शिक्षा, रिन्यूएबल एनर्जी, वृक्षारोपण, जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सशक्तिकरण के माध्यम से लोगों को सस्टेनेबल डेवलपमेंट का प्रशिक्षण पूरी तरह से निशुल्क देती हैं यह जीवनशैली आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन तरीका है।'
सुबह 10:30 बजे, छात्रों ने सेंटर की संस्थापक और पद्मश्री पुरस्कार विजेता डॉ. जनक पलटा मगिलिगन के साथ एक इंटरैक्टिव सेशन में भाग लिया। उन्होंने समाजसेवा और सामुदायिक विकास में अपने 40 से अधिक वर्षों के अनुभवों को साझा किया, खासकर ग्रामीण समुदायों और महिलाओं को सशक्त बनाने के अपने प्रयासों के बारे में बताया। उनकी प्रेरणादायक यात्रा और उपलब्धियों ने सभी प्रतिभागियों को प्रेरित किया।
यह सेशन बहुत इंटरैक्टिव था, जिसमें छात्रों को सवाल पूछने और अपने विचार व अनुभव साझा करने का मौका मिला। छात्रों ने अपने-अपने जिलों में अपनाए जाने वाले पर्यावरण संरक्षण के तरीकों पर उत्साहपूर्वक चर्चा की।
झाबुआ के कल्याणपुरा की एक छात्रा ने बताया कि उसने दत्तीगांव के एक स्कूल हॉस्टल में पढ़ाई की थी, जहां सारा खाना जिम्मी मगिलिगन द्वारा बनाए गए सोलर किचन में पकाया जाता था। उसने कहा कि सेंटर में दिखाए गए सस्टेनेबल तरीकों को देखकर उसे अपने बचपन की याद आ गई और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में रिन्यूएबल एनर्जी के स्रोतों के इस्तेमाल का महत्व और मज़बूती से समझ आया।
इस भ्रमण ने छात्रों को पर्यावरण-अनुकूल तरीकों जैसे वृक्षारोपण, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में सस्टेनेबल विकल्पों को बढ़ावा देकर क्लाइमेट एक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
कुल मिलाकर, यह दौरा जानकारीपूर्ण, ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रहा। इससे छात्रों की सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) और सामाजिक ज़िम्मेदारी के बारे में समझ बढ़ी और उन्हें एक हरियाली भरे और ज़्यादा सस्टेनेबल भविष्य की दिशा में योगदान करने की प्रेरणा मिली।
रिपोर्ट- सुश्री सोनल नेतराम (फ़ैकल्टी सदस्य)
