जेन धर्म को जानें
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जेन का विकास चीन में लगभग 500 ईस्वी में हुआ। चीन से यह 1200 ईस्वी में जापान में फैला। प्रारंभ में जापान में बौद्ध धर्म का कोई संप्रदाय नहीं था किंतु धीरे-धीरे वह बारह सम्प्रदायों में बँट गया जिसमें जेन भी एक था।
ऐसा माना जाता है कि सेमुराई वर्ग को अधिक आज्ञापालक तथा शूरवीर बनाने के लिए ही जेन संप्रदाय का सूत्रपात हुआ था। दरअसल जेन संप्रदाय शिंतो और बौद्ध धर्म का समन्वय था। माना यह भी जाता है कि बौद्ध धर्म को जापान ने सैनिक रूप देने की चेष्ठा की थी, इसीलिए उन्होंने शिंतो धर्म के आज्ञापालक और देशभक्ति के सिद्धांत को भी इसमें शामिल कर सेमुराइयों को मजबूत किया। सेमुराई जापान का सैनिक वर्ग था। 1868 में उक्त सैनिकों के वर्ग का अंत हो गया।
उनके अनुसार धर्मग्रंथों के अध्ययन या कर्मकांडों से ज्ञान की उपलब्धि नहीं होती, बल्कि इसके लिए चिंतन और आत्म-निरीक्षण की आवश्यकता है। मनुष्य का जीवन क्षणिक और भ्रमपूर्ण है, इसीलिए प्रत्येक क्षेत्र में शूरवीरता दिखाने की आवश्यकता है।
- अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'

