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Motivational Story : सभी दरवाजे खोलकर जियो

शुक्रवार,जुलाई 9, 2021
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मैंने सुना है कि एक बार चीन के एक सम्राट ने अपने प्रधानमंत्री को फांसी की सजा दे दी। जिस दिन प्रधानमंत्री को फांसी दी जाने वाली थी, सम्राट उससे मिलने आया, उसे अंतिम विदा कहने आया। वह उसका बहुत वर्षों तक वफादार सेवक रहा था, लेकिन उसने कुछ किया था, ...
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ओशो रजनीश अपनी कहानियों के माध्यम से लोगों को अपनी बातें समझाते हैं। उनकी कहानियों बड़ी ही रोचक और अपने तरीके से गढ़ी गई होती है। उनकी कहानियों के खजाने में से एक कहानी सोलन की पढ़ते हैं जो आपको प्रेरित करेगी।
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ओशो रजनीश ने कबीर पर बहुत कुछ कहा, उनके प्रवचनों पर ही आधारित कई पुस्तकों का निर्माण हुआ। जैसे 'कहे कबीर दिवाना', 'सुनो भाई साधो', 'लिखा लिखी की है नहीं', 'गूंगे केरी सरकरा', 'कहै कबीर मैं पूरा पाया' 'कबीर वाणी' आदि कई पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। ओशो ...
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ओशो रजनीश ने सैंकड़ों प्रेरक कहानियां अपने प्रवचनों में सुनाई है। उनकी कहानियां बड़ी ही सरल और अद्भुत होती हैं। उनकी कहानियां, उद्धरण या प्रवचन सुनकर कई लोगों के जीवन बदल गए हैं। उनके प्रेरक उद्धरणों में से एक यहां पढ़ें।
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नकारात्मक विचार सोचना या नकारात्मक कल्पनाओं का आना ऑटोमेटिक होता है क्योंकि हमें नकारात्मक सोचना नहीं पड़ता है यह खुद ब खुद ही दिमाग में आ जाता है। हम कोशिश करते हैं कि नकारात्मक कल्पना दिमाग में ना आए फिर भी आ ही जाती है। ऐसा इसलिए कि हमारे चारों ...
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ओशो रजनीश ने एक बार 99वें के फेर में फंसने की 2 मजेदार कहानी अपने किसी प्रवचन में सुनाई थी। उन्हीं में से एक कहानी आप यहां पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा कि आखिर क्या होता है 99वें के फेर में फंसने का मतलब। कम-से-कम एक मतलब तो आप जान ही जाएंगे। दूसरी ...
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योग सूत्र के गहन गंभीर ज्ञान पर ओशो का लेक्चर सोपक्रमं निरूपक्रमं च कर्म तत्‍संयमादपारान्‍तज्ञानमरिष्‍टेभये वा।- योग सूत्र ओशो रजनीश ने मृत्यु के संबंध में कई प्रवचन दिए है। मृत्यु और उसके बाद के जीवन के रहस्य का भी खुलासा किया है। ओशो मानते हैं कि ...
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नागार्जुन से एक चोर ने कहा था कि तुम ही एक आदमी हो जो शायद मुझे बचा सको। यूं तो मैं बहुत महात्‍माओं के पास गया, लेकिन मैं जाहिर चोर हूं, मैं बड़ा प्रसिद्ध चारे हूं, और मेरी प्रसिद्धि यह है कि मैं आज तक पकड़ा नहीं गया हूं, मेरी प्रसिद्धि इतनी हो गई ...
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ओशो रजनीश का जन्म 11 दिसम्बर, 1931 को कुचवाड़ा गांव, बरेली तहसील, जिला रायसेन, राज्य मध्यप्रदेश में हुआ था। उन्हें जबलपुर में 21 वर्ष की आयु में 21 मार्च 1953 मौलश्री वृक्ष के नीचे संबोधि की प्राप्ति हुई। 19 जनवरी 1990 को पूना स्थित अपने आश्रम में ...
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ओशो रजनीश का जन्म 11 दिसम्बर, 1931 को कुचवाड़ा गांव, बरेली तहसील, जिला रायसेन, राज्य मध्यप्रदेश में हुआ था। उन्हें जबलपुर में 21 वर्ष की आयु में 21 मार्च 1953 मौलश्री वृक्ष के नीचे संबोधि की प्राप्ति हुई। 19 जनवरी 1990 को पूना स्थित अपने आश्रम में ...
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ओशो रजनीश का जन्म 11 दिसम्बर, 1931 को कुचवाड़ा गांव, बरेली तहसील, जिला रायसेन, राज्य मध्यप्रदेश में हुआ था। उन्हें जबलपुर में 21 वर्ष की आयु में 21 मार्च 1953 मौलश्री वृक्ष के नीचे संबोधि की प्राप्ति हुई। 19 जनवरी 1990 को पूना स्थित अपने आश्रम में ...
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ओशो रजनी‍श अपने प्रवचनों में मजेदार और प्रेरक कहानियां सुनाते रहते हैं। उनकी कही गई कहानियां बहुत प्रसिद्ध भी होती हैं और खुद के द्वारा कही गई भी होती है। इसके अलावा कुछ ऐसी घटनाएं उनके साथ घटी होती है जो कि अपने आप में एक कहानी का रूप ले लेती है। ...
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अहंकार और आशा के संबंध में ओशो रजनीश ने एक बहुत ही मजेदार कहानी सुनाई थी। अहंकार है कि टूटता नहीं और आशा है कि छूटती ही नहीं। दरअसल, यह कहानी लालच पर आधरित मानी जा सकती है।
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जिंदगी में कई बार हार का सामना करना पड़ता है। कुछ लोग हार से टूट जाते हैं, कुछ लोग फिर से जुट जाते हैं और कुछ लोग हार को जीत की ओर रखा एक कदम मानते हैं। परंतु यह कहानी ऐसे व्यक्ति की है जिसके सामाने जीवन मरण का प्रश्न था तो उसे तो जीतना ही था। मतलब ...
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तुम जैसे हो, उससे अन्यथा होने की चेष्टा न करो। आंख में आंसू नहीं आते, क्या जरूरत है? सूखी हैं आंखें, सूखी भली। सूखी आंखों का भी मजा है। आंसू भरी आंखों का भी मजा है। और परमात्मा को सब तरह की आंखें चाहिए, क्योंकि परमात्मा वैविध्य में प्रकट होता है। ...
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मुझे पता है कि तुम जीवन से ऊब गए हो। यदि तुम सचमुच ऊब गए हो तो आत्महत्या नहीं करो, क्योंकि आत्महत्या तुम्हें फिर इसी जीवन में घसीट लाएगी और हो सकता है कि इससे भी अधिक भद्दा जीवन तुम्हें मिले, जैसा कि अभी तुम्हारा है; क्योंकि आत्महत्या तुम्हारे भीतर ...
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भगवान बुद्ध पर दिए अपने प्रवचनों में ओशो ने महामारी का जिक्र किया है। ओशो कहते हैं कि एक समय वैशाली में दुर्भिक्ष हुआ था और महामारी फैली थी। लोग कुत्तों की मौत पर रहे थे। मृत्यु का तांडव नृत्य हो रहा था। मृत्यु का ऐसा विकराल रूप तो लोगों ने कभी नहीं ...
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संबोधि शब्द बौद्ध धर्म का है। इसे बुद्धत्व भी कहा जा सकता है। देखा जाए तो यह मोक्ष या मुक्ति की शुरुआत है।
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ओशो का जन्म मध्यप्रदेश के कुचवाड़ा में 11 दिसंबर 1931 को हुआ था। उन्हें 21 वर्ष की आयु में जबलपुर में संबोधि की प्राप्ति हुई। स्वास्थ्य संबंधी प्रतिकूलताओं के कारण ओशो ने 19 जनवरी 1990 को पूना स्थित अपने आश्रम में सायं 5 बजे के लगभग अपनी देह त्याग ...
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