नगालैंड में सुरक्षाबलों की गोलीबारी से मरने वाले आम लोगों की संख्‍या 14 हुई, दंगों में 1 जवान शहीद, इंटरनेट सर्विस बंद

Last Updated: सोमवार, 6 दिसंबर 2021 (09:06 IST)
कोहिमा/गुवाहाटी/नई दिल्ली। के मोन जिले में एक के बाद एक गोलीबारी की 2 घटनाओं में सुरक्षाबलों की गोलियों से कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई जबकि 11 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने रविवार को बताया कि गोलीबारी की पहली घटना संभवत: गलत पहचान का मामला हो सकती है।
इसके बाद हुए दंगों में एक सैनिक की भी मौत हो गई। गोलीबारी की पहली घटना तब हुई जब शनिवार शाम कुछ दिहाड़ी मजदूर एक कोयला खदान से पिकअप वैन में सवार होकर गाना गाते हुए घर लौट रहे थे। आम नागरिकों की मौत के कारण मोबाइल इंटरनेट सेवाएं और बल्क मैसेजिंग सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं

सेना के जवानों को प्रतिबंधित संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-के (एनएससीएन-के) के युंग ओंग धड़े के उग्रवादियों की गतिविधि की सूचना मिली थी और इसी गलतफहमी में इलाके में अभियान चला रहे सैन्यकर्मियों ने वाहन पर कथित रूप से गोलीबारी की, जिसमें 6 मजदूरों की जान चली गई।

पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि जब मजदूर अपने घर नहीं पहुंचे तो स्थानीय युवक और ग्रामीण उनकी तलाश में निकले तथा इन लोगों ने सेना के वाहनों को घेर लिया। इस दौरान हुई धक्का-मुक्की व झड़प में एक सैनिक मारा गया और सेना के वाहनों में आग लगा दी गई। इसके बाद सैनिकों द्वारा आत्मरक्षार्थ की गई गोलीबारी में सात और लोगों की जान चली गई।
इस घटना के खिलाफ उग्र विरोध और दंगों का दौर रविवार को भी जारी रहा और गुस्साई भीड़ ने आज दोपहर को कोन्याक यूनियन और असम राइफल्स कैंप के कार्यालयों में तोड़फोड़ की। नगालैंड सरकार ने एक अधिसूचना के माध्यम से 'भड़काऊ वीडियो, तस्वीरों या लिखित सामग्री के प्रसार' को रोकने के लिए जिले में मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं के साथ-साथ एक साथ कई एसएमएस करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।
पुलिस ने कहा कि इस गोलीबारी में मारे गए 14 लोगों का पोस्टमॉर्टम मोन में कराया जा रहा है और आशंका जताई की मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि घायलों में से दो की हालत गंभीर है और उन्हें बेहतर उपचार के लिये असम भेजा गया है, जबकि शेष का उपचार नगालैंड में ही चल रहा है।

सेना ने घटना की ‘कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी’ का आदेश देते हुए बताया कि इस दौरान एक सैन्यकर्मी की मौत हो गई और कई अन्य सैनिक घायल हो गए। इसने कहा कि यह घटना और उसके बाद जो हुआ, वह ‘अत्यंत खेदजनक’है तथा लोगों की मौत होने की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की उच्चतम स्तर पर जांच की जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार ने आईजीपी नगालैंड की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (कोहिमा) लेफ्टि. कर्नल सुमित के शर्मा ने कहा कि नगालैंड में मोन जिले के तिरु में उग्रवादियों की संभावित गतिविधियों की विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर इलाके में एक विशेष अभियान चलाए जाने की योजना बनाई गई थी। यह घटना और इसके बाद जो हुआ, वह अत्यंत खेदजनक है।
मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने का वादा किया और समाज के सभी वर्गों से शांति बनाए रखने का आग्रह किया। मोन म्यामांर की सीमा के पास स्थित है, जहां से एनएससीएन-के का युंग ओंग धड़ा अपनी उग्रवादी गतिविधियां चलाता है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे को घटना की जानकारी दी गई है।

असम और नगालैंड के राज्यपाल जगदीश मुखी ने शांति की अपील करते हुए एक बयान में कहा कि एसआईटी सभी कोणों से घटना की जांच करेगी, जबकि इसमें शामिल सैन्य कर्मियों के खिलाफ कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का गठन किया गया है।'

रियो ने ट्वीट किया कि मोन के ओटिंग में आम लोगों की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना अत्यंत निंदनीय है। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। मामले की एसआईटी से उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और कानून के अनुसार न्याय किया जाएगा। मैं सभी वर्गों से शांति बनाए रखने का आग्रह करता हूं।
शाह ने कहा एसआईटी करेगी जांच : गृह मंत्री ने भी शोक प्रकट किया और ट्वीट कर घटना में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, “राज्य सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय एसआईटी इस घटना की गहन जांच करेगी, ताकि शोक संतप्त परिवारों के लिये न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि यह हृदयविदारक है। भारत सरकार को सही-सही जवाब देना चाहिए। गृह मंत्रालय वास्तव में क्या कर रहा है, जब न तो आम नागरिक और न ही सुरक्षाकर्मी हमारी अपनी ही सरजमीं में सुरक्षित हैं?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ‘नगालैंड से चिंताजनक खबर। शोक संतप्त परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं। हमें घटना की विस्तृत जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पीड़ितों को न्याय मिले ।’
‘ईस्टर्न नगालैंड पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन’ (ईएनपीओ) ने इस घटना के विरोध में क्षेत्र के छह जनजातीय समुदायों से राज्य के सबसे बड़े पर्यटन कार्यक्रम ‘हॉर्नबिल’ महोत्सव से भागीदारी वापस लेने का आग्रह किया।

संगठन ने एक बयान जारी कर कहा कि ईएनपीओ भारतीय सेना की अंधाधुंध गोलीबारी में ओटिंग गांव के 10 से अधिक दिहाड़ी मजदूरों की मौत होने की घटना पर गहरा शोक व्यक्त करता है और घटना की घोर निंदा करता है।

ईएनपीओ ने छह जनजातियों से राज्य की राजधानी के पास किसामा में हॉर्नबिल महोत्सव स्थल ‘नगा हेरिटेज विलेज’ में अपने-अपने ‘मोरुंग’ में घटना के खिलाफ काले झंडे लगाने को कहा। इसने कहा कि सभी संबंधित पक्षों को समझना चाहिए कि यह आदेश/कदम राज्य सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सुरक्षाबलों के खिलाफ नाराजगी जताने और छह जनजातीय समुदायों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए है। मुख्यमंत्री के सलाहकार अबु मेहता ने कहा कि घटना में मारे गए लोगों के लिए किसामा में दो मिनट का मौन रखा जाएगा और प्रार्थना की जाएगी।
गुस्साई भीड़ ने की तोड़फोड़ : घटना से गुस्साई भीड़ ने मोन जिले में असम राइफल्स के शिविर और कोन्याक यूनियन के कार्यालय में कथित तौर पर तोड़फोड़ की। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भीड़ ने तोड़फोड़ करते हुए 13 लोगों की मौत में शामिल सुरक्षा बलों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई किए जाने की मांग की। तोड़फोड़ की वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है, जबकि प्राधिकारियों ने जिले में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। अभी यह पता नहीं चला है कि क्या तोड़फोड़ की इन घटनाओं में कोई हताहत हुआ है। जिला प्राधिकारियों और स्थानीय पुलिस की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।



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