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राहुल गांधी के 'धुरंधर' पवन खेड़ा पहुंचे सोनम वांगचुक से मिलने, मोदी सरकार पर साधा निशाना

Pawan Khera meets Sonam Wangchuk
Pawan Khera meets Sonam Wangchuk: कांग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के प्रमुख और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वांगचुक का हालचाल जाना और अन्य प्रदर्शनकारियों से भी मुलाकात की। उल्लेखनीय है कि नीट पेपर लीक को लेकर वांगचुक करीब 20 दिन से अनशन कर रहे हैं। इस दौरान उनकी हालत काफी खराब हो चुकी है। 
 
खेड़ा ने एक्स पर एक पोस्ट कर कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध करना एक संवैधानिक अधिकार है। जब नागरिक अपनी बात रखने के लिए उपवास करते हैं, तो सरकार का फर्ज है कि वह उनकी बात सुने न कि नज़रअंदाज करे। यही 'राज धर्म' है। श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1984 में यही किया था। डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने 2011 में यही किया था। वे समझते थे कि सरकार की पहली ज़िम्मेदारी बातचीत करना है, भले ही असहमति हो। लेकिन, इस सरकार ने उदासीनता का रास्ता चुना है।ALSO READ: 'आपने देश की अंतरात्मा जगा दी, अब अनशन खत्म कीजिए'— शशि थरूर की सोनम वांगचुक से भावुक अपील

उदासीन और संवेदनहीन सरकार 

उन्होंने कहा- वर्तमान सरकार ने शिक्षा सुधारों की मांग पर बातचीत करने से इनकार कर दिया है, चाहे यह मांग राहुल गांधी और देश भर में NSUI और IYC कार्यकर्ताओं ने उठाई हो या जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने। ऐसी उदासीनता सिर्फ़ अहंकार नहीं है, यह संवेदनहीनता है और लोकतंत्र के लिए बिल्कुल भी उचित नहीं है। 
 
आज, कांग्रेस पार्टी की ओर से, मैं श्री सोनम वांगचुक और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों से मिला और उनसे आग्रह किया कि वे अपनी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अपना उपवास समाप्त करें। अपने लोगों को खोने से कोई आंदोलन मजबूत नहीं होता। हम आगे भी लड़ने के लिए जीवित रहते हैं।

क्यों भूख हड़ताल कर रहे हैं सोनम वांगचुक? 

सोनम वांगचुक की इस भूख हड़ताल का सबसे बड़ा और मुख्य कारण राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET (UG) 2026 परीक्षा में हुई कथित धांधली, पेपर लीक और अनियमितताएं हैं। वांगचुक 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के आंदोलन के समर्थन में 28 जून से अनशन पर हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि परीक्षा प्रणाली में हुए इस बड़े खिलवाड़ की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें।
 
उनका कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और परीक्षा प्रणालियों में कमियों के कारण देश के लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में जा रहा है और कई छात्र मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। लंबे समय से लद्दाख में वैकल्पिक और व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने वाले वांगचुक देश की शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि भारत की मौजूदा परीक्षा और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की भारी कमी है, जिसे सुधारा जाना बेहद जरूरी है।
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