कश्मीर में अब भी 30 से ज्यादा विदेशी आतंकी बने सुरक्षाकर्मियों के लिए चुनौती!
Foreign Terrorists Kashmir: कश्मीर घाटी में आतंकी ढांचे पर लगातार प्रहार के बावजूद घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में छिपे विदेशी आतंकियों की मौजूदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है। अगस्त में सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से उपलब्ध आकलन में घाटी में करीब 30 पाकिस्तानी नागरिक लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी सक्रिय बताए गए थे। इसके साथ ही पुलिस रिकार्ड में एक स्थानीय सक्रिय आतंकी की भी पहचान की गई थी। हालिया अभियानों में कुछ आतंकियों के मारे जाने के बाद यह संख्या बदल चुकी है, इसलिए इसे मौजूदा अंतिम संख्या नहीं माना जा सकता।
शुरुआती अभियान में बच गया था मूसा
मूसा के मारे जाने से पहले सुरक्षा बलों ने सितंबर में पीर पंजाल से लेकर मध्य कश्मीर तक लगातार अभियान चलाए। 30 सितंबर को बडगाम के ऊपरी यूसमर्ग इलाके में पाकिस्तानी लश्कर आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को संयुक्त अभियान में मार गिराया गया। सेना, पुलिस और सीआरपीएफ ने खुफिया सूचना के आधार पर कोराग क्षेत्र में घेराबंदी की थी। मूसा सितंबर के शुरुआती अभियान में सुरक्षा घेरा तोड़कर निकल गया था और उसके बाद लंबे समय तक उसकी तलाश चलती रही।
इससे पहले चार सितंबर के अभियान में यूसमर्ग क्षेत्र में पाकिस्तानी लश्कर आतंकी यासिर मारा गया था। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार यासिर और मूसा पीर पंजाल के रास्ते कश्मीर की ओर बढ़े थे। यासिर की तलाश करीब तीन महीने तक चली थी, जो बताता है कि जंगलों में छिपे आतंकियों को तलाशना कितना लंबा अभियान बन सकता है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि वास्तविक संख्या इससे अधिक या कम हो सकती है, क्योंकि जंगलों में छिपे आतंकियों की सटीक संख्या लगातार बदलती रहती है।
अधिकारियों के मुताबिक, आतंकी गतिविधियों की आशंका केवल घाटी तक सीमित नहीं है। 17 सितंबर को उधमपुर के जंगलों में जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी मारे गए। अभियान के दौरान एके राइफल, एम-4 कार्बाइन, ग्लॉक पिस्तौल और चार ग्रेनेड बरामद हुए। इसके बाद भी इलाके में तलाशी और निगरानी जारी रखी गई।
अब क्या है सुरक्षाबलों की रणनीति?
29 सितंबर को भी राजौरी, पुंछ और कठुआ में करीब 12 स्थानों पर संदिग्ध गतिविधियों की सूचना के बाद तलाशी अभियान शुरू किए गए। इससे स्पष्ट है कि सुरक्षा ग्रिड अब केवल मुठभेड़ वाले स्थानों तक सीमित न रहकर संभावित आवाजाही वाले जंगलों और संपर्क क्षेत्रों पर भी निगरानी बढ़ा रहा है।
अधिकारी मानते हैं कि फोकस अब केवल आतंकियों को ढूंढने पर नहीं है बल्कि सुरक्षा एजेंसियां जंगलों में छिपे आतंकियों के साथ उनके संभावित ठिकानों, स्थानीय संपर्कों और हथियार पहुंचाने वाले नेटवर्क की पहचान पर भी जोर दे रही हैं। 2026 में सेना के अभियानों का एक प्रमुख हिस्सा आतंकियों की तलाश के साथ घुसपैठ रोकने और हथियारों व ठिकानों के नेटवर्क को तोड़ने पर केंद्रित रहा है।
कश्मीर में अभियानों की तस्वीर का एक पहलू
- घाटी में अगस्त का आकलन : करीब 30 पाकिस्तानी आतंकी।
- घाटी में स्थानीय सक्रिय आतंकी : एक की पहचान उस समय पुलिस रिकॉर्ड में थी।
- सितंबर : यासिर और मूसा समेत कई विदेशी आतंकी अभियानों में मारे गए।
- 17 सितंबर : उधमपुर में 2 जैश आतंकी ढेर।
- 29 सितंबर : राजौरी-पुंछ-कठुआ में करीब 12 स्थानों पर तलाशी।
पीर पंजाल के जंगलों में लंबे समय से अभियान। आतंकियों के साथ उनके स्थानीय मददगारों और सुरक्षित ठिकानों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

