Pakistan के 23 आतंकियों पर मोदी सरकार का बड़ा 'प्रहार', UAPA के तहत जारी हुई नई List
मोदी सरकार ने भारत के खिलाफ सक्रिय पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क पर एक और बड़ा प्रहार करते हुए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़े 23 आतंकियों को आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित किया है। यह कदम सरकार की "प्रहार" रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत के खिलाफ उभरते और बदलते आतंकवादी खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना है।
जारी सूची में शामिल 23 आतंकियों में 13 लाहौर स्थित लश्कर-ए-तैयबा नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि 10 बहावलपुर स्थित जैश-ए-मोहम्मद से संबंधित हैं। इनमें 16 पाकिस्तान के नागरिक हैं, जबकि सात भारतीय मूल के ऐसे आतंकी हैं जो पाकिस्तान से भारत विरोधी गतिविधियों का संचालन कर रहे हैं।
सरकार का कहना है कि हाल ही में भारत के कूटनीतिक प्रयासों के बाद अमेरिका ने 18 जुलाई 2025 को लश्कर के मुखौटा संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF)' को विदेशी आतंकवादी संगठन और वैश्विक आतंकवादी समूह घोषित किया था। केंद्र सरकार के अनुसार, नई सूची का उद्देश्य आतंकवाद के लिए कट्टरपंथ, भर्ती और सीमा पार घुसपैठ को रोकना है। साथ ही यह संदेश देना भी है कि भारत आतंकवाद के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति पर कायम है और आतंकवादी नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने के लिए कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। इन सभी के खिलाफ विभिन्न मामलों में गिरफ्तारी वारंट और आतंकवाद से जुड़े कई मामलों की जांच लंबित है।
सूची में शामिल आतंकी केवल हमलों की साजिश तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आतंकवादी संगठनों के लिए प्रचार, भर्ती, प्रशिक्षण, हथियारों की तस्करी, घुसपैठ और सीमा पार आतंकियों को भारत भेजने जैसी गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नामित आतंकियों में सैफुल्लाह खालिद प्रमुख है, जिसे अमेरिका पहले ही वैश्विक आतंकवादी घोषित कर चुका है। वह लश्कर-ए-तैयबा का डिप्टी चीफ माना जाता है। वहीं हाफिज अब्दुर रऊफ भी इस सूची में शामिल है। वह 7 मई 2025 को भारत द्वारा आतंकवादी ठिकानों पर चलाए गए "ऑपरेशन सिंदूर" में मारे गए आतंकियों के जनाजे का नेतृत्व करता दिखाई दिया था। अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा रऊफ लश्कर के मुरीदके कैंप में पाकिस्तान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भी देखा गया था।
जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े नामित आतंकियों में मुफ्ती मोहम्मद असगर खान, जिसे कश्मीर ऑपरेशन का प्रमुख कमांडर बताया जाता है, और मसूद इलियास कश्मीरी शामिल हैं। मसूद इलियास कश्मीरी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जैश का प्रमुख माना जाता है और संगठन की भर्ती तथा सोशल मीडिया गतिविधियों की जिम्मेदारी संभालता है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वह अप्रैल 2022 के सुनजवां आतंकी हमले के प्रमुख आरोपियों में भी शामिल है।
सरकार के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद के कई कमांडर सुरंगों और ड्रोन के माध्यम से आतंकियों, हथियारों और गोला-बारूद की भारत में घुसपैठ कराने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इनमें अब्दुल्ला जेहादी, मोहम्मद मुसद्दिक और वसीम नूर जैसे नाम शामिल हैं। आतंकी संगठनों के लिए युवाओं की भर्ती भी एक प्रमुख रणनीति बनी हुई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सोशल मीडिया के जरिए जम्मू-कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जाता है।
