Animal Liberation Conference : इंदौर शहर में 9, 10 और 11 जनवरी 2026 को एनिमल लिबरेशन कॉन्फ्रेंस इंडिया 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह 3 दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पशु अधिकार कार्यकर्ता, वकील, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिकों को एक मंच प्रदान करेगा। इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत में पशु अधिकारों से जुड़े प्रयासों को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का लक्ष्य रखा गया है। इस सम्मेलन का समापन 11 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पशु अधिकार मार्च के साथ किया जाएगा।
इस सम्मेलन का आयोजन इंदौर एनिमल लिबरेशन द्वारा डायरेक्ट एक्शन एवरीडे (DxE) के सहयोग से किया जा रहा है। यह सम्मेलन केवल जागरूकता फैलाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लोगों को यह समझाने पर केंद्रित होगा कि वे अपने शहरों और इलाकों में जानवरों के लिए प्रभावी और संगठित तरीके से काम कैसे कर सकते हैं।
इंदौर एनिमल लिबरेशन के को-फाउंडर अजय किरडिया ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में प्रतिभागियों को पशु अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण और व्यावहारिक विषयों पर जानकारी दी जाएगी। इसमें पशु क्रूरता से जुड़े कानूनों को समझना, उनके सही इस्तेमाल की प्रक्रिया, जानवरों पर हो रहे अत्याचारों की जांच और दस्तावेजीकरण, मीडिया और सोशल मीडिया का प्रभावी उपयोग, स्थानीय स्तर पर पशु अधिकारों को मजबूत करने की रणनीति तैयार करने पर भी चर्चा की जाएगी।
इंदौर एनिमल लिबरेशन सुरेश व्यास एवं सुश्री दुर्गा बलानी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस के बुनियादी सिद्धांतों में से एक यह है कि बिना जमीनी अनुभव के कोई भी सामाजिक प्रयास मजबूत नहीं बन सकता। इसी कारण सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर विज़न बिल्डिंग, जांच, विरोध और आउटरीच के माध्यम से बनाई गई ज़मीनी स्तर पर काम करने के अवसर भी मिलेंगे।
इस सम्मेलन का समापन 11 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पशु अधिकार मार्च के साथ किया जाएगा। यह मार्च भारत में पशु अधिकारों से जुड़े एक अत्यंत गंभीर और लंबे समय से अनदेखे मुद्दे पर केंद्रित होगा : जानवरों के साथ यौन शोषण को कानून की श्रेणी में लाना।
पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के अंतर्गत जानवरों के साथ यौन शोषण एक गंभीर अपराध माना जाता था, लेकिन भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद इस तरह की हिंसा पर स्पष्ट रूप से कोई अपराधी कानून मौजूद नहीं है। हालांकि सरकार ने पशु क्रूरता निवारण (संशोधन) विधेयक, 2022 में इस समस्या को संबोधित करने और जानवरों के साथ यौन शोषण को स्पष्ट अपराध की श्रेणी में रखने का प्रयास किया है, लेकिन यह विधेयक अब तक संसद में पारित नहीं हुआ है।
इंदौर एनिमल लिबरेशन के सिद्धार्थ डफरिया ने बताया कि राष्ट्रीय पशु अधिकार मार्च के माध्यम से सरकार से यह मांग की जाएगी कि जानवरों के साथ यौन शोषण को स्पष्ट रूप से अपराध घोषित किया जाए, इसके लिए कड़ी सज़ा और जेल का प्रावधान किया जाए, ऐसे मामलों को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो में दर्ज किया जाए और पशु क्रूरता निवारण (संशोधन) विधेयक, 2022 को बिना किसी देरी के संसद से पारित किया जाए।
इंदौर एनिमल लिबरेशन एक स्थानीय पशु अधिकार समूह है, जो पशुओं पर हो रही क्रूरता के खिलाफ आवाज़ उठाता है और समाज में वीगन तथा प्लांट-बेस्ड जीवनशैली को बढ़ावा देता है।
Edited By : Chetan Gour