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राज्यसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की 4 बड़ी गलतियां, जिससे BJP को मिला क्लीन स्वीप का मौका !
भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद भोपाल से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस चुनाव आयोग पर हमलावर है। भोपाल में कांग्रेस के नेता रोशनपुरा चोहरे पर भूख हड़ताल पर बैठे हुए है। इसके साथ चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर भी यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने चुनाव आयोग और बीजेपी को घेरते हुए राज्यसभा चुनाव में सीट चोरी का आरोप लगाया है। इसके साथ कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर सवाल उठाए है।
वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को निरस्त होने के पीछे कांग्रेस बड़े नेताओं की साजिश बताया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस ने हार के भय से अपने प्रत्याशी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर और सुनियोजित तरीके से छिपाने का प्रयास किया, लेकिन अब सच्चाई जनता के सामने आ चुकी है।
ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस ने वह क्या बड़ी गलतियां कर दी, जिससे बीजेपी को क्लीन स्वीप का मौका मिल गया।
1-राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीतिक चूक-राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन खारिज होने का बड़ा कारण कांग्रेस की रणनीतिक चूक भी माना जा रहा है। उम्मीदवार घोषित होने के बाद भी कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने आखिरी दिन नामांकन किया। ऐसे में सवाल यह ख़ड़ा हो रहा है कि प्रतिष्ठा की लडाई वाले चुनाव में नामांकन से पहले कांग्रेस की तरफ से क्यों नामांकन फॉर्म की जांच सहीं से नहीं की गई। इसके साथ सवाल यह भी है कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराज तेलंगाना की प्रभारी है और वहीं पर दर्ज एक केस को आधार बनाकर उनका नामांकन खारिज किया गया, ऐसे में सवाल यह है कि कांग्रेस के रणनीति पर कई सवाल खड़े हो रहे है।
कांग्रेस उम्मीदवार का नामांकन खारिज होने के बाद कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ मामले की जानकारी कांग्रेस के नेताओं की ओर से दी गई। इस पर जब मीडिया ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से सवाल किया तो उन्होंने चुप्पी सांध ली और प्रेस कॉफ्रेंस को खत्म कर दिया।
2-राज्यसभा चुनाव डमी उम्मीदवार नहीं उतारना बड़ी चूक- राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से डमी उम्मीदवार नहीं उतराना बड़ी चूक माना जा रहा है। अगर कांग्रेस डमी उम्मीदवार को उतारती तो मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद भी वह लड़ाई में रहती है और संख्या बल के आधार पर चुनाव जीत सकती थी। चुनाव में इस चूक पर जब पीसीसी चीफ जीतू पटवारी से सवाल किया गया तो उन्होंने माना कि कांग्रेस से गलती हुई है लेकिन वह कांग्रेस पार्टी की गलती नहीं मानते हुए इस बात की दुआई देते नजर आए है कि मध्यप्रदेश के इतिहास में राज्यसभा चुनाव में अब तक कभी डमी उम्मीदवार नहीं उतरा गया इसलिए कांग्रेस ने नहीं उतारा था, लेकिन अब आगे कांग्रेस सतर्क रहेगी और इस बात का ध्यान रखेगी।
3-प्रत्याशी चयन में कांग्रेस आलाकमान की चूक- प्रतिष्ठा की लड़ाई वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से कई दिग्गज दावेदार थे लेकिन जिस तरह कांग्रेस आलाकमान ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया, उसको लेकर भी कई तरह के सवाल खड़े हुए है। राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने जिस तरह से पहले दो उम्मीदवारों और बाद में तीसरे उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारा वह बीजेपी की वेट एंड वॉच की रणनीति का हिस्सा था। अगर कांग्रेस की ओर से कमलनाथ या दूसरे किसी बड़े चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा जाता तो कांग्रेस के विधायकों में किसी भी टूट की संभावनाएं सिरे से खारिज हो जाती है लेकिन मीनाक्षी नटराजन के उम्मीदवार बनने के बाद बीजेपी को कांग्रेस के खेमे में एक संभावना दिखने लग और उसने अपना तीसरा उम्मीदवार उतार दिया।
4- कांग्रेस क्षत्रपों का एकजुट नहीं होना- राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस क्षत्रपों का एकजुट नहीं होना भी एक बड़ी चूक माना जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की खाली हुई सीट पर जिस तरह से कांग्रेस आलाकमान ने कमलनाथ जैसे दिग्गज नेताओं को दरकिनार कर मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया, उसके बाद कांग्रेस के क्षत्रपों में नाराजगी साफ दिखाई देने को मिली। मीनाक्षी नटराजन के उम्मीदवार घोषित होने के तीन बाद भी कमलनाथ की सोशल मीडिया के माध्यम से उनको बधाई नहीं देना, सियासी गलियारों काफी चर्चा का विषय रहा।
इसके साथ ही मीनाक्षी नटराज के उम्मीदवारी के दिग्विदय समर्थक नरेश ज्ञानचंदानी का इस्तीफा देना भी एक धड़े की नाराजगी के तौर पर देखा गया। वहीं मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद जब पीसीसी में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने मीडिया से बात की तो पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के आग्रह पर भी मंच पर मौजूद दिग्विजय सिंह ने मीडिया से बात नहीं की। इसके लेकर भी भाजपा कांग्रेस पर तंज कर रही है। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्यसभा की इस सीट पर कांग्रेस के कई नेताओं की नजर थी और वे दावेदारी कर रहे थे। जब उन्हें टिकट नहीं मिला, तो पार्टी के भीतर की नाराजगी सामने आई और उन्हीं लोगों ने संबंधित तथ्यों एवं कारनामों को सार्वजनिक कर दिया।
