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माथे पर दिल का निशान, कभी भटकता था सड़कों पर, Peace Dog Aloka का दिल्ली में हुआ ग्रैंड वेलकम [VIDEO]

Aloka hindi news
कभी भारत की सड़कों पर घूमने वाला एक साधारण सा कम्युनिटी डॉग आज दुनिया भर में ‘पीस डॉग’ के नाम से जाना जाता है। यह कहानी है अलोका की, जिसने अपनी वफादारी, शांत स्वभाव और अनोखी यात्रा के दम पर लाखों लोगों का दिल जीत लिया। माथे पर बने दिल के आकार के प्राकृतिक निशान वाला यह भारतीय परिया डॉग अब शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। हाल ही में भारत लौटने पर दिल्ली में उसका गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जहां उसकी प्रेरणादायक कहानी ने एक बार फिर लोगों को भावुक कर दिया।
 112 दिनों की पदयात्रा में बदल गई जिंदगी
 
अलोका की कहानी वर्ष 2022 में शुरू हुई, जब बौद्ध भिक्षु भिक्खु पन्नाकारा (Paññākāra) के नेतृत्व में एक दल भारत और नेपाल के बीच लंबी शांति यात्रा पर निकला था। यात्रा के शुरुआती दिनों में एक छोटा सा आवारा कुत्ता उनके साथ चलने लगा। रास्ते में कई अन्य कुत्ते भी कुछ समय तक साथ रहे, लेकिन अलोका ने यात्रा का साथ नहीं छोड़ा।
 
करीब 112 दिनों तक हजारों किलोमीटर की पदयात्रा में वह भिक्षुओं के साथ बना रहा। उसकी वफादारी, धैर्य और दृढ़ता से प्रभावित होकर भिक्खु पन्नाकारा ने उसे अपने परिवार का हिस्सा बना लिया। यहीं से एक सड़क के कुत्ते का सफर वैश्विक पहचान की ओर बढ़ने लगा।

 अमेरिका से लेकर एशिया तक फैलाया शांति का संदेश
 
गोद लिए जाने के बाद अलोका सिर्फ एक पालतू जानवर बनकर नहीं रहा, बल्कि शांति और करुणा के संदेश का साथी बन गया। उसने अमेरिका के कई राज्यों में आयोजित शांति यात्राओं में हिस्सा लिया और हजारों किलोमीटर की दूरी तय की। टेक्सास से लेकर वॉशिंगटन डीसी तक की लंबी यात्रा के दौरान उसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
 
इसके अलावा श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देशों में भी वह भिक्षुओं के साथ पहुंचा। जहां-जहां अलोका गया, वहां लोगों ने उसे केवल एक कुत्ते के रूप में नहीं बल्कि इंसानों और जानवरों के बीच प्रेम, भरोसे और सह-अस्तित्व के प्रतीक के रूप में देखा।
 दिल्ली में हुआ भव्य स्वागत, करुणा का दिया संदेश
 
भारत वापसी पर अलोका और बौद्ध भिक्षुओं के प्रतिनिधिमंडल का दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में स्वागत किया गया। इस दौरान शांति, माइंडफुलनेस और करुणा जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
 
भिक्खु पन्नाकारा ने कहा कि शांति बाहर नहीं, बल्कि हमारे भीतर मौजूद है। उनका मानना है कि जब इंसान अपने भीतर झांकना सीखता है, तभी वास्तविक शांति का अनुभव कर सकता है। अलोका की मौजूदगी ने इस संदेश को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

 मेनका गांधी ने क्यों कहा 'हर गली के कुत्ते में है एक अलोका'?
 
दिल्ली में पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी अलोका से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि अलोका की कहानी भारत के कम्युनिटी डॉग्स के प्रति लोगों की सोच बदल सकती है।
 
मेनका गांधी के अनुसार, यदि लोग हर सड़क के कुत्ते में वही वफादारी, साहस, धैर्य और प्रेम देख पाएं जो दुनिया अलोका में देख रही है, तो समाज का नजरिया काफी बदल सकता है। उन्होंने कहा कि जानवर भी भावनाएं रखते हैं और इंसानों की तरह सम्मान और दया के हकदार हैं।
 
 सिर्फ एक कुत्ता नहीं, उम्मीद और इंसानियत का प्रतीक
 
आज अलोका की पहचान केवल एक रेस्क्यू डॉग की नहीं है। वह इस बात का जीवंत उदाहरण बन चुका है कि प्रेम, भरोसा और करुणा की कोई सीमा नहीं होती। एक समय सड़क पर भटकने वाला यह भारतीय कुत्ता अब दुनिया भर में लाखों लोगों को यह संदेश दे रहा है कि इंसान और जानवर मिलकर भी शांति और सद्भाव की एक नई कहानी लिख सकते हैं।
 
अलोका का सफर हमें याद दिलाता है कि कभी-कभी सबसे बड़ी प्रेरणा उन जगहों से मिलती है, जहां हम उसकी उम्मीद भी नहीं करते।
लेखक के बारे में
कृति शर्मा
कृति शर्मा एक पैशनेट स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और डिजीटल कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें वेबदुनिया के साथ लगभग 3 साल का अनुभव है।  अपने करियर की शुरुआत उन्होंने पॉकेट एफएम में स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर की थी। इंदौर के रेनैसां कॉलेज से BAJMC और  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म.... और पढ़ें