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  4. Balancing caste equations poses a major challenge for the BJP and Congress in the Datia by-election.

दतिया उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के सामने जातीय समीकरण साधना बड़ी चुनौती, गेमचेंजर साबित होंगे OBC वोटर्स

Datia by-election
दतिया विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस ने भले ही अब तक अपने उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक एलान नहीं किया हो लेकिन सियासी समीकरण को साधने में दोनों ही पार्टियों के नेता जुट गए है। दरअसल दतिया उपचुनाव में राजनीतिक दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जातीय समीकरण को अपने पक्ष में साधने की होगी। बीजेपी जिसको 2023 में कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, उसके सामने जातीय समीकरण को साधना सबसे बड़ा चैलेंज है।

खासतौर पर बीजेपी के संभावित उम्मीदवार नरोत्तम मिश्रा के सामने यह उपचुनाव चुनाव केवल अपनी प्रतिष्ठा बचाने का नहीं बल्कि 2023 विधानसभा चुनाव से मिली हार का जीत में बदलने का भी अवसर माना जा रहा है। यही वजह है कि बीजेपी की पहली प्राथमिकता जातियों के माइक्रो मैनेजमेंट पर फोकस करना होगी। वहीं कांग्रेस भी अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत रखने के साथ प्रभावशाली जातियों में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही।
 
दतिया सीट पर जातीय समीकरण- दतिया विधानसभा सीट पर कुल 3 लाख 56 हजार 651 मतदाता हैं। इनमें 1 लाख 88 हजार 959 पुरुष और 1 लाख 67 हजार 692 महिला मतदाता शामिल हैं। दतिया में चुनावी मुकाबले में ओबीसी और अनुसूचित जाति (एसी) के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाएंगे। कुशवाह, यादव,अहिरवार और लोधी समाज के वोटर्स को इस चुनाव का गेमचेंजर माना जा रहा है।
 
ओबीसी वोटर्स पर सबसे ज्यादा नजर- दतिया विधानसभा में ओबीसी मतदाताओं की संख्या करीब 90 हजार के आसपास है। इसमें कुशवाह, यादव, लोधी और बघेल समाज का खासा प्रभाव है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन समुदायों का रुझान चुनाव के नतीजे तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसलिए भाजपा और कांग्रेस दोनों इन वर्गों तक पहुंच बनाने के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार कर रहे हैं।
 
एससी वोटर्स भी तय करेंगे जीत-हार-विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति मतदाताओं की संख्या करीब 60 हजार है। इनमें  अहिरवार समुदाय के मतदाता 30 हजार से अधिक बताए जाते हैं। इसके अलावा खटीक, जाटव, कोरी और वाल्मीकि समाज के मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस वर्ग का झुकाव परंपरागत रूप से कांग्रेस की ओर माना जाता रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए इस वोट बैंक में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाना बड़ी चुनौती होगी।
 
मुस्लिम वोटर्स का भी रहेगा प्रभाव-दतिया विधानसभा क्षेत्र में 8 हजार से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं। चुनावी विश्लेषण के अनुसार इस वर्ग का झुकाव कांग्रेस की ओर माना जाता है। हालांकि कम अंतर वाले मुकाबले में यह वोट बैंक भी निर्णायक साबित हो सकता है।
 
सामान्य वर्ग में ब्राह्मण वोटर्स सबसे प्रभावी- सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या 60 हजार से अधिक है। इनमें ब्राह्मण मतदाता 30 से 35 हजार के बीच माने जाते हैं। इसके अलावा बनिया, राजपूत, कायस्थ और सिंधी समाज के मतदाता भी चुनावी समीकरण को प्रभावित करते हैं।
 
उपचुनाव में यदि कांग्रेस ब्राह्मण चेहरे के रूप में अवधेश नायक को मैदान में उतारती है, तो ब्राह्मण वोटों का ध्रुवीकरण और बंटवारा दोनों ही चुनाव का बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। ऐसे में भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा के सामने इस वर्ग को एकजुट बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
 
वहीं अगर कांग्रेस पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की पत्नी शोभा भारती को चुनाव में उतारती है तो  मुकाबला सामान्य बनाम ओबीसी होगा। ऐसे में बीजेपी के सामने ओबीसी वोटर्स को साधना बड़ी चुनौती होगा। दतिया विधानसभा में 30- 35 हजार से अधिक कुशवाह मतदाता हैं। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार 2023 के विधानसभा चुनाव में इस वर्ग की नाराजगी भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित हुई थी। यहीं कारण है कि बीजेपी ने चुनाव के बाद कुशवाह समाज को साधने के प्रयास तेज किए गए। भाजपा ने कुशवाह समाज से आने वाले रघुवीर कुशवाह को जिला अध्यक्ष बनाकर इस वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने का संदेश दिया। वहीं कुशवाह समाज के अलावा यादव, लोधी और अहिरवार समुदाय भी चुनावी गणित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन वर्गों में बढ़त हासिल करने वाली पार्टी को सीधे चुनावी लाभ मिलने की संभावना रहेगी। यही कारण है कि दोनों दल बूथ स्तर तक जातीय समीकरणों के माइक्रो मैनेजमेंट की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
 
दतिया उपचुनाव में विकास,संगठन और उम्मीदवार की छवि जैसे मुद्दों के साथ जातीय समीकरण सबसे अहम फैक्टर बनने जा रहे हैं। भाजपा के सामने चुनौती अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत रखने के साथ ओबीसी और एससी वर्ग में स्वीकार्यता बढ़ाने की होगी, जबकि कांग्रेस अपने पारंपरिक समर्थन को बनाए रखते हुए प्रभावशाली जातियों में बढ़त बनाने की कोशिश करेगी।
 
लेखक के बारे में
भोपाल ब्यूरो
वेबदुनिया भोपाल ब्यूरो मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ प्रदेश के विभिन्न जिलों की महत्वपूर्ण खबरों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र है। भोपाल ब्यूरो से प्रदेश की सियासत, अपराध, व्यापार, खेल,  धर्म-संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी खबरें सटीकता और निष्पक्षता के साथ प्रकाशित की जाती हैं।.... और पढ़ें