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दतिया उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार पर सस्पेंस, टिकट की खींचतान और भितरघात से आसान हो सकती नरोत्तम मिश्रा की राह?

Datia Assembly by-election
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है। प्रदेश की सबसे हाईप्रोफइल सीट माने जाने वाली दतिया में 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। नामांकन प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 13 जुलाई तक प्रत्याशी अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 

दतिया सीट का उपचुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 2023 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन गृह मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता रहे नरोत्तम मिश्रा को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2008 से लगातार दतिया से विधायक चुने जाते रहे नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने 7,500 से अधिक मतों के अंतर से हरा कर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था। अब उपचुनाव में भाजपा इस सीट को दोबारा अपने कब्जे में लेने की रणनीति बना रही है, जबकि कांग्रेस अपनी जीत बरकरार रखने की चुनौती से जूझ रही है।
 
दतिया में चुनाव की  तारीखों के एलान के साथ अब उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चा शुरु हो गई है। बीजेपी की ओर से पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का सिंगल नाम दावेदारों में है। वहीं कांग्रेस की तरफ से कई नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे है। 
 
कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान-दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती उसके भीतर ही दिखाई दे रही है। पार्टी में टिकट के कई मजबूत दावेदार सामने हैं, जिससे आंतरिक खींचतान बढ़ गई है। कांग्रेस की ओऱ से टिकट के दावेदारों में पहला नाम 2023 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी से कांग्रेस में अवधेश नायक का है और वह टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहले उन्हें टिकट दिया था, लेकिन दतिया से लेकर भोपाल तक राजेंद्र भारती समर्थकों के विरोध के बाद उनका टिकट काट दिया गया और राजेंद्र भारती को प्रत्याशी बनाया गया। ऐसे में यदि इस बार अवधेश नायक को टिकट मिलता है तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
 
वहीं 2023 विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले राजेंद्र भारती इस बार अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। हाल ही में राजेंद्र भारती और अनुज भारती की कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि पार्टी उन्हें मौका दे सकती है। कांग्रेस के एक वर्ग का मानना है कि राजेंद्र भारती को लेकर सहानुभूति का माहौल बन सकता है, जिसका लाभ उनके बेटे को मिल सकता है।
 
इसके अलावा दतिया से विधायक रह चुके घनश्याम सिंह भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है। हालांकि 2023 में उन्होंने सेवढ़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद संगठन में उनकी पकड़ और क्षेत्रीय सक्रियता उन्हें दावेदारों की सूची में बनाए हुए है।
 
कांग्रेस की कमजोर कड़ी बन सकती है अंदरूनी कलह- राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी समस्या टिकट को लेकर बढ़ता असंतोष है। यदि पार्टी किसी एक दावेदार को टिकट देती है तो दूसरे खेमे के असंतुष्ट होने की आशंका बनी रहेगी। विशेष रूप से यदि अवधेश नायक को टिकट मिलता है तो राजेंद्र भारती का पूरा समर्थन मिलना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि ऐसी स्थिति में अनुज भारती किसी अन्य दल या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। ऐसा होने पर कांग्रेस के पारंपरिक वोटों में विभाजन हो सकता है, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है।
 
इसके अलावा 2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ जो एंटी-इंकम्बेंसी का माहौल था, वह अब पहले जैसा नहीं माना जा रहा। क्षेत्र में विकास और सरकारी योजनाओं को लेकर भाजपा नए सिरे से माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं सत्ता में होने के कारण प्रशासनिक और संगठनात्मक मजबूती भी भाजपा के पक्ष में महत्वपूर्ण कारक मानी जा रही है।
 
जातीय समीकरण तय करेंगे चुनाव की दिशा- दतिया उपचुनाव में जातीय समीकरण भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार विपक्षी वोटों में सेंध लगाने के लिए यादव और कुशवाहा समाज से भी उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं। इससे चुनाव का मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बढ़ सकती है। उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी के दमोदर यादव भी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। दमोदर यादव लंबे समय से दतिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय राजनीति में उन्हें ऐसे उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है जो विपक्षी मतों में सेंध लगा सकते हैं। हाल के दिनों में उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने के बाद दतिया की राजनीतिक फिजा में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि उनके चुनाव मैदान में उतरने से कांग्रेस के वोटों का बंटवारा हो सकता है। 
 
कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की क्यों गई सदस्यता?- कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को जिस मामले में सजा मिली है वह पूरा मामला 27 साल पुराना  साल 1998 का है, जब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम पर संचालित एक संस्थान की 10 लाख रुपये की एफडी कराई थी, जिस पर तत्कालीन ब्याज दर 13.5 प्रतिशत थी। बाद में जब बैंक ने ब्याज दरें कम कर दीं, तब राजेंद्र भारती ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक के तत्कालीन लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में काट-छाँट की और एफडी की समय सीमा को बढ़ाकर 15 साल कर दिया, जिससे पुरानी ब्याज दर का लाभ मिलता रहे। इस मामले का खुलासा साल 2011 में हुआ जब बैंक के तत्कालीन प्रशासक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की मांग की। हालांकि पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने पर मामला जिला न्यायालय और फिर उच्च न्यायालय तक पहुँचा। बाद में राजेंद्र भारती की मांग को पूरे मामले को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर किए है। गुरुवार को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने बैंक एफडी हेराफेरी और जालसाजी के  मामले में 3 साल की सजा सुनाई है।  कोर्ट ने कांग्रेस विधायक को दो धराओं में 3--3 साल और एक धारा में 2 साल की सजा सुनाई है। हलांकि कोर्ट ने कांग्रेस विधायक को जमानत भी दे दी थी। कोर्ट के फैसले के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता खत्म कर दी और अब उपचुनाव हो रहा है।
 
 
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विकास सिंह
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