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संसद के मानसून सत्र में मोदी-शाह की जोड़ी फिर रचेगी इतिहास?

संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार कई अहम विधेयक को लाने की तैयारी में

Monsoon Session of Parliament
2014 में केंद्र में सत्ता में आई मोदी सरकार पिछले 12 सालों में बड़े फैसलों से संसदीय इतिहास के पन्नों में अगस्त माह को नए ढंग से दर्ज करती आई है। इस बार भी संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरु होने की संभावना है जो अगस्त तक चलेगा। संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार कई अहम विधयकों को सदन में पेश कर सकती है। पिछले बजट सत्र में परिसीमन बिल पर जिस तरह से सरकार को मुंह की खानी पड़ी थी उसके बाद अब मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र को लेकर बेहद गंभीर नजर आ रही है।

मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के मानसून सत्र में कई अहम संवैधानिक संशोधन विधेयकों को सदन की पटल पर रखने की तैयारी में है। मानसून सत्र में सरकार का मुख्य ध्यान उन विधेयकों पर है जो पिछले बजट सत्र  में सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण पारित नहीं हो सके थे। ऐसे में यह सवाल अब सियासी गलियारों में चर्चा के केंद्र में है कि मोदी सरकार क्या इस बार फिर अगस्त महीने में देश में एक नया सियासी इतिहास रचेगी। 
 
परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण-सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा अब जोरों से  है कि मोदी सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव में नए परिसीमन और महिला आरक्षण के साथ जाना चाहती है। इसलिए सरकार मानसून सत्र में इससे जुड़ा विधेयक लाने की तैयारी में है। गौरतलब है कि पिछले बजट सत्र में सरकार को तब बड़ा झटका लगा था जब लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण को जल्द लागू करने से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक,सरकार के पास दो-तिहाई बहुमत न होने के कारण गिर गया था। इसके साथ ही सरकार को परिसीमन विधेयक भी वापस लेना पड़ा था।

सियासी गलियारों में चर्चा है कि मानसून सत्र में मोदी सरकार 132वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में परिसीमन को दोबारा पेश करने जा रही है। इस बार दक्षिण भारतीय राज्यों के कड़े विरोध और उनकी चिंताओं को देखते हुए बिल में कुछ बड़े बदलाव किए जा सकते हैं, ताकि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बना रहे। इसके पारित होने से साल 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा की सीटों में बड़ी वृद्धि का रास्ता साफ होगा।
 
पीएम-सीएम जेल में रहने पर हटाने संबंधी विधेयक- मोदी सरकार संसद के मानसून सत्र में  प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री रिमूवल बिल लाने जा रहा है। इस प्रस्तावित कानून के तहत यदि देश के प्रधानमंत्री, किसी राज्य के मुख्यमंत्री या केंद्र व राज्य सरकार के किसी मंत्री को किसी गंभीर अपराध (जैसे भ्रष्टाचार) के मामले में गिरफ्तार किया जाता है और वे लगातार 30 दिनों तक न्यायिक या पुलिस हिरासत में रहते हैं, तो उन्हें स्वतः ही उनके पद से हटा दिया जाएगा। इस विधेयक की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को अंतिम  मंजूरी दे सकती है, जिसके तुरंत बाद इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले सत्र में पेश किया जाएगा।
 
एक देश, एक चुनाव पर निर्णायक कदम- देश में लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के संकल्प को पूरा करने के लिए सरकार 'समान चुनाव विधेयक' (129वां संविधान संशोधन) को इस सत्र में मुख्य एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा सकती है। यह विधेयक फिलहाल संसदीय समिति के पास समीक्षा के अधीन है। माना जा रहा है कि सरकार इस मानसून सत्र के दौरान समिति की रिपोर्ट पटल पर रखवाकर इस पर व्यापक चर्चा कराएगी और इसे पारित कराने का पूरा प्रयास करेगी।
 
मानसून सत्र में मोदी सरकार की अग्निपरीक्षा- मानसून सत्र में सरकार को अगर इन अहम विधयकों को पास कराना होगा, तो उसके सामने पहली बड़ी चुनौती दो तिहाई बहुमत जुटाना है। लोकसभा में अभी सरकार के पास दो तिहाई बहुमत नहीं है, ऐसे में उसके सामने पहला लक्ष्य सदन में आवश्यक बहुमत का जुगाड़ करना है। पिछले दिनों लोकसभा में NDA की सदस्य संख्या में उस वक्त  इजाफा हुआ है जब टीएमसी  के 20 सांसद और उद्वव ठाकरे की पार्टी के  6 सांसद अपने पार्टी से बगावत कर NDA के साथ आ गए है। इन सांसदों  के आने के बाद भी अभी सरकार सदन में दो तिहाई  बहुमत के 360 के आंकड़े से बहुत दूर है।

ऐसे में सदन में बहुमत जुटाने के लिए बीजेपी की नजर अब एनसीपी, समाजवादी पार्टी और डीएमके जैसी क्षेत्रीय पार्टियों पर टिकी है। तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसदों द्वारा संसद में अलग गुट की मान्यता मांगने के मामले पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का फैसला इसी सत्र के दौरान आ सकता है। यदि इन बागी धड़ों को अलग गुट के रूप में मान्यता मिलती है, तो संसद में विपक्षी संख्याबल कमजोर होगा और सरकार के लिए दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा जुटाना बेहद आसान हो जाएगा। 
 
अगस्त और मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले- बीते 12 सालों में मोदी सरकार ने अगस्त महीने में ऐसे बड़े फैसले किए है जिसने देश के पूरे राजनीतिक और समाजिक परिदृश्य को  बदल दिया है। अगस्त 2019 मोदी सरकार ने तीन तलाक पर कानून बनाया था। 2019 दूसरी बार सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने संसद के अपने पहले सत्र में इस कानून को पास कराकर 1 अगस्त 2019 को मुस्लिम महिलाओं को एक नई आजादी दे दी थी।  इसके साथ ही मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर में धारा 370 को हटाने का ऐतिहासिक फैसला किया था वहीं 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर की आधारशिला अपने हाथों से रख कर 5 अगस्त की तारीख को इतिहास में दर्ज के साथ 1980 से भाजपा के गठन के बाद देश की जनता से उसके सबसे बड़े चुनावी वादे को पूरा कर दिया था।
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विकास सिंह
special correspondent.... और पढ़ें