जानिए आखिरी बार भारत श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट और सीरीज कब हारा था
भारत की टीम श्रीलंका पहुंच चुकी है और वहां जाकर अभ्यास सत्र में पसीना भी बहा रही है। भारत की टीम श्रीलंका पर हमेशा भारी पड़ी है। इसका अंदाजा इस ही बात से लगाया जा सकता है कि श्रीलंका ने भारत को आखिरी बार टेस्ट मैचों में 11 साल पहले अपने मैदान पर हराया था। दिलचस्प बात यह है कि टीम को यह जीत 15 अगस्त 2015 को मिली थी और 15 अगस्त को ही पहला टेस्ट इस ही मैदान पर शुरु होने वाला है। यह टेस्ट भी सीरीज का पहला ही टेस्ट था। हालांकि भारत ने अगले 2 टेस्ट जीतकर सीरीज पर 2-1 से कब्जा बनाया था।इसके अलावा श्रीलंका टीम ने आखिरी बार भारत को 2001 में अपने घरेलू मैदान पर हराया था।
11 साल पहले 176 रनों का पीछा करते हुए 112 रनों पर सिमट गई थी भारत
टीम इंडिया के पास 69वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर देशवासियों को जीत का शानदार तोहफा देने का मौका था, लेकिन शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के शर्मनाक प्रदर्शन से भारत को श्रीलंका के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट के चौथे दिन 63 रन से पराजय का सामना करना पड़ा।भारत को जीत के लिये 176 रन का लक्ष्य मिला था लेकिन टीम इंडिया ने तत्कालीन सर्वश्रेष्ठ लेफ्ट आर्म स्पिनर रंगना हेरात के सामने घुटने टेक दिए और पूरी टीम 49.5 ओवर में 112 रन पर ढेर हो गई।
हेरात ने करिश्माई गेंदबाजी करते हुए अकेले अपने दम पर मैच का नक्शा पलट दिया और 21 ओवर की घातक गेंदबाजी मे 48 रन पर सात विकेट लेकर जीत श्रीलंका की झोली में डाल दी। ऑफ स्पिनर थारिंडू कौशल ने हेरात का बखूबी साथ निभाते हुए 17.6 ओर में 47 रन पर तीन विकेट लिए। हेरात को पहली पारी में कोई विकेट नहीं मिला था, लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने भारतीय उम्मीदों पर कहर बरपा दिया।
भारत ने मैच के पहले तीन दिन अपना दबदबा बनाया था, लेकिन चौथे दिन की सुबह बाजी भारत के हाथ से निकल कर श्रीलंका के पास चली गई।लोकेश राहुल शुक्रवार को पांच रन बनाकर आउट हुए थे, जबकि चौथे दिन नाइट वाचमैन इशांत शर्मा दस, रोहित शर्मा चार, कप्तान विराट कोहली तीन, शिखर धवन 28, रिद्धिमान साहा दो, हरभजनसिंह एक, रविचंद्रन अश्विन तीन और अजिंक्य रहाणे 36 रन बनाकर निपट गए। रहाणे ने 76 गेंदों की अपनी पारी में चार चौके लगाए जबकि शिखर ने 83 गेंदों पर 28 रन में तीन चौके लगाए।
जीत का लक्ष्य मुश्किल नहीं था, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने खुद पर अनावश्यक दबाव बनाते हुए श्रीलंकाई स्पिनरों खासकर हेरात को हावी होने का मौका दे दिया। भारत ने कल के एक विकेट पर 23 रन से आगे खेलना शुरू किया, शिखर 13 और नाइटवाचमेन इशांत पांच रन पर नाबाद रहे।
हेरात ने सुबह इशांत को पगबाधा कर जो कहर बरपाना शुरू किया वह भारतीय पारी के शर्मनाक अंत तक जारी रहा। रोहित शर्मा दूसरी पारी में भी फ्लाप रहे, पहली पारी मे नौ रन पर सिमटने में रोहित दूसरी पारी में चार रन ही बना सके। हेरात ने उन्हें बोल्ड कर दिया।
पहली पारी में शानदार 103 रन बनाने वाले कप्तान विराट कोहली ऑफ स्पिनर कौशल की गेंद पर कौशल सिल्वा को कैच थमा बैठे। भारत का चौथा विकेट 45 के स्कोर पर गिरा। एक छोर पर टिककर खेल रहे शिखर ने आखिर कौशल की गेंद पर अपना धैर्य खोया और आगे बढ़कर खेलने की कोशिश में गेंदबाज को रिटर्न कैच थमा बैठै। विकेट कीपर सिद्धिमान साहा हेरात की गेंद को कतई समझ नहीं पाये और विकेटकीपर दिनेश चांडीमल ने उन्हें स्टम्प कर दिया। हरभजन को हेरात ने फारवर्ड शार्ट लेग पर सिल्वा के हाथों कैच करा दिया।
भारत के सात विकेट 68 रन पर गिर चुके थे और उसकी हार तय हो चुकी थी। भारतीय बल्लेबाजों ने एक भी साझेदारी करने की कोशिश नहीं की वर्ना मैच का परिणाम कुछ और ही होता। रहाणे एक छोर पर जैसे हारी हुई लड़ाई लड़ रहे थे और दूसरे छोर पर उनका साथ देने के लिये कोई बल्लेबाज मौजूद नहीं था। अश्विन ने हेरात की गेंद पर धमिका प्रसाद को कैच थमाया और भारत का आठवां विकेट 81 के स्कोर पर गंवा दिया।
रहाणे भारत के स्कोर को 100 के पार तक तो ले गये लेकिन फिर हेरात ने उनकी संघर्षपूर्ण पारी का काम तमाम कर दिया। रहाणे 97 गेंदों में 36 रन बनाकर टीम के 102 के स्कोर पर आउट हुए। अमित मिश्रा ने 15 रन बनाने के बाद जैसे ही कौशल की गेंद पर दिमुथ करुणारत्ने को कैच थमाया भारतीय पारी में 49.5 ओवर में 112 रन पर ढेर हो गई।
गाले टेस्ट इस परिणाम के बाद दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहले हिस्से में भारत के लिए अश्विन के दस विकेट, शिखर और विराट के पहली पारी में शतक और मैच में रहाणे के आठ कैच के विश्व रिकॉर्ड को रखा जा सकता है तो दूसरी तरफ श्रीलंका की दूसरी पारी में चांडीमल के नाबाद 162 रन और हेरात के 48 रन पर सात विकेट को रखा जा सकता है।
मैच में नाबाद 162 रन की निर्णायक पारी खेलने वाले चांडीमल को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया। जिन्होंने श्रीलंका को पारी की हार के संकट से बाहर निकालकर मैच में लड़ने लायक स्थिति में पहुंचाया और फिर हेरात के करिश्मे ने टीम इंडिया की तीन दिन की तमाम मेहमन पर पानी फेर दिया। भारतीय कप्तान विराट ने भी मैच के बाद स्वीकार किया कि दबाव में टीम इंडिया अच्छा नहीं खेली और यही उसकी हार का सबसे बड़ा कारण रहा।
2001 में श्रीलंका दौरे पर गई टीम इंडिया ने 1-2 से गंवाई थी सीरीज
वहीं साल 2001 में तत्कालीन टेस्ट कप्तान सौरव गांगुली के नेतृत्व में श्रीलंका के खिलाफ टीम इंडिया को 1-2 से टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी। श्रीलंका ने पहला टेस्ट दस विकेटों से जीता था। दूसरे टेस्ट को 7 विकेट से जीतने के बाद टीम इंडिया ने वापसी की। तीसरे टेस्ट में श्रीलंका ने भारत को पारी से शर्मनाक हार थमाते हुए सीरीज जीती। इस सीरीज के मैन ऑफ द सीरीज मुथैया मुरलीधरन थे।
टीम इंडिया के पास 69वें स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर देशवासियों को जीत का शानदार तोहफा देने का मौका था, लेकिन शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के शर्मनाक प्रदर्शन से भारत को श्रीलंका के खिलाफ पहले क्रिकेट टेस्ट के चौथे दिन 63 रन से पराजय का सामना करना पड़ा।भारत को जीत के लिये 176 रन का लक्ष्य मिला था लेकिन टीम इंडिया ने तत्कालीन सर्वश्रेष्ठ लेफ्ट आर्म स्पिनर रंगना हेरात के सामने घुटने टेक दिए और पूरी टीम 49.5 ओवर में 112 रन पर ढेर हो गई।
हेरात ने करिश्माई गेंदबाजी करते हुए अकेले अपने दम पर मैच का नक्शा पलट दिया और 21 ओवर की घातक गेंदबाजी मे 48 रन पर सात विकेट लेकर जीत श्रीलंका की झोली में डाल दी। ऑफ स्पिनर थारिंडू कौशल ने हेरात का बखूबी साथ निभाते हुए 17.6 ओर में 47 रन पर तीन विकेट लिए। हेरात को पहली पारी में कोई विकेट नहीं मिला था, लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने भारतीय उम्मीदों पर कहर बरपा दिया।
भारत ने मैच के पहले तीन दिन अपना दबदबा बनाया था, लेकिन चौथे दिन की सुबह बाजी भारत के हाथ से निकल कर श्रीलंका के पास चली गई।लोकेश राहुल शुक्रवार को पांच रन बनाकर आउट हुए थे, जबकि चौथे दिन नाइट वाचमैन इशांत शर्मा दस, रोहित शर्मा चार, कप्तान विराट कोहली तीन, शिखर धवन 28, रिद्धिमान साहा दो, हरभजनसिंह एक, रविचंद्रन अश्विन तीन और अजिंक्य रहाणे 36 रन बनाकर निपट गए। रहाणे ने 76 गेंदों की अपनी पारी में चार चौके लगाए जबकि शिखर ने 83 गेंदों पर 28 रन में तीन चौके लगाए।
जीत का लक्ष्य मुश्किल नहीं था, लेकिन भारतीय बल्लेबाजों ने खुद पर अनावश्यक दबाव बनाते हुए श्रीलंकाई स्पिनरों खासकर हेरात को हावी होने का मौका दे दिया। भारत ने कल के एक विकेट पर 23 रन से आगे खेलना शुरू किया, शिखर 13 और नाइटवाचमेन इशांत पांच रन पर नाबाद रहे।
पहली पारी में शानदार 103 रन बनाने वाले कप्तान विराट कोहली ऑफ स्पिनर कौशल की गेंद पर कौशल सिल्वा को कैच थमा बैठे। भारत का चौथा विकेट 45 के स्कोर पर गिरा। एक छोर पर टिककर खेल रहे शिखर ने आखिर कौशल की गेंद पर अपना धैर्य खोया और आगे बढ़कर खेलने की कोशिश में गेंदबाज को रिटर्न कैच थमा बैठै। विकेट कीपर सिद्धिमान साहा हेरात की गेंद को कतई समझ नहीं पाये और विकेटकीपर दिनेश चांडीमल ने उन्हें स्टम्प कर दिया। हरभजन को हेरात ने फारवर्ड शार्ट लेग पर सिल्वा के हाथों कैच करा दिया।
भारत के सात विकेट 68 रन पर गिर चुके थे और उसकी हार तय हो चुकी थी। भारतीय बल्लेबाजों ने एक भी साझेदारी करने की कोशिश नहीं की वर्ना मैच का परिणाम कुछ और ही होता। रहाणे एक छोर पर जैसे हारी हुई लड़ाई लड़ रहे थे और दूसरे छोर पर उनका साथ देने के लिये कोई बल्लेबाज मौजूद नहीं था। अश्विन ने हेरात की गेंद पर धमिका प्रसाद को कैच थमाया और भारत का आठवां विकेट 81 के स्कोर पर गंवा दिया।
गाले टेस्ट इस परिणाम के बाद दो हिस्सों में बांटा जा सकता है। पहले हिस्से में भारत के लिए अश्विन के दस विकेट, शिखर और विराट के पहली पारी में शतक और मैच में रहाणे के आठ कैच के विश्व रिकॉर्ड को रखा जा सकता है तो दूसरी तरफ श्रीलंका की दूसरी पारी में चांडीमल के नाबाद 162 रन और हेरात के 48 रन पर सात विकेट को रखा जा सकता है।
मैच में नाबाद 162 रन की निर्णायक पारी खेलने वाले चांडीमल को मैन ऑफ द मैच घोषित किया गया। जिन्होंने श्रीलंका को पारी की हार के संकट से बाहर निकालकर मैच में लड़ने लायक स्थिति में पहुंचाया और फिर हेरात के करिश्मे ने टीम इंडिया की तीन दिन की तमाम मेहमन पर पानी फेर दिया। भारतीय कप्तान विराट ने भी मैच के बाद स्वीकार किया कि दबाव में टीम इंडिया अच्छा नहीं खेली और यही उसकी हार का सबसे बड़ा कारण रहा।
2001 में श्रीलंका दौरे पर गई टीम इंडिया ने 1-2 से गंवाई थी सीरीज
वहीं साल 2001 में तत्कालीन टेस्ट कप्तान सौरव गांगुली के नेतृत्व में श्रीलंका के खिलाफ टीम इंडिया को 1-2 से टेस्ट सीरीज गंवानी पड़ी थी। श्रीलंका ने पहला टेस्ट दस विकेटों से जीता था। दूसरे टेस्ट को 7 विकेट से जीतने के बाद टीम इंडिया ने वापसी की। तीसरे टेस्ट में श्रीलंका ने भारत को पारी से शर्मनाक हार थमाते हुए सीरीज जीती। इस सीरीज के मैन ऑफ द सीरीज मुथैया मुरलीधरन थे।

