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सऊदी अरब की बड़ी तेल रिफाइनरियों पर क्यों हमले कर रहा ईरान?

ईरान की नजरें सऊदी क्राउन प्रिंस एबीएस के विजन-2030 को ध्वस्त करने पर

Iran-US-Israel war
ईरान ने लाल सागर तट पर स्थित  सऊदी अरब की रिफाइनरी पर जबरदस्त हमला एक सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि इसके व्यापक भू-राजनीतिक संकेत भी है। यह हमला सऊदी अरब की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। यह रिफाइनरी सऊदी तेल आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे हमलों से उत्पादन और निर्यात बाधित होगा,जिससे वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता और कीमतों में उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर सऊदी की विजन -2030 की रणनीति पर पड़ सकता है।

NEOM जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स पूरी तरह स्थिरता, सुरक्षा और विदेशी निवेश पर निर्भर हैं। इस प्रकार के हमले निवेशकों के भरोसे को कमजोर करते हैं,जिससे दीर्घकालिक आर्थिक योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। यह सऊदी अरब की आर्थिक, सामरिक और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को चुनौती देने का प्रयास हो सकता है। दरअसल मध्यपूर्व की जटिल भू-राजनीति में ईरान और सऊदी अरब के बीच प्रतिद्वंदिता दशकों पुरानी है,जो क्षेत्रीय प्रभुत्व के साथ वैचारिक,सामरिक और आर्थिक हितों से भी जुड़ी हुई है।
 
इजराइल और अमेरिका के साथ तनाव के बीच ईरान के ठिकानों पर हमले और उसके जवाब में सऊदी के तेल एवं गैस केंद्रों को निशाना बनाए जाने की खबरें इस संघर्ष को और जटिल बनाते हैं। यदि मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व को ईरान समर्थित हमलों से चुनौती मिलती है तो यह सऊदी अरब की दीर्घकालिक रणनीति पर सीधा प्रहार है। सऊदी की विजन -2030 योजना, जिसमें NEOM जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट शामिल है,स्थिरता और वैश्विक निवेश पर आधारित है। ऐसे में तेल प्रतिष्ठानों पर हमले निवेशकों के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं और तेल पर से निर्भरता कम करने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं।
 
ईरान की रणनीति को यदि व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो यह प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय अप्रत्यक्ष दबाव की नीति का हिस्सा हो सकता है। सऊदी के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाकर वह न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ा सकता है। इसके साथ ही मोहम्मद बिन सलमान की घरेलू और अंतरराष्ट्रीय छवि को  गहरा धक्का लग सकता है।
 
मोहम्मद बिन सलमान का विजन-2030 सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था और समाज को व्यापक रूप से बदलने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य देश की तेल पर निर्भरता को कम करके एक विविध,आधुनिक और टिकाऊ अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है। इस विजन के तहत सरकार पर्यटन,मनोरंजन,तकनीक,खनन और उद्योग जैसे गैर-तेल क्षेत्रों को तेजी से विकसित कर रही है। NEOM जैसे मेगा प्रोजेक्ट इस योजना के प्रतीक है,जो सऊदी अरब को वैश्विक निवेश और नवाचार का केंद्र बनाने का प्रयास करते हैं। विजन-2030 का एक महत्वपूर्ण पहलू सामाजिक सुधार भी है। महिलाओं को अधिक अधिकार देना,मनोरंजन उद्योग को बढ़ावा देना और समाज को अधिक खुला बनाना इसके प्रमुख कदम हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को नए अवसर प्रदान करना और उनकी आकांक्षाओं को पूरा करना है।

यह योजना निजी क्षेत्र को मजबूत करने,विदेशी निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन पर केंद्रित है। यह सऊदी अरब को 21वीं सदी के अनुरूप एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक शक्ति में बदलने की व्यापक रणनीति है। नया भविष्य जिसे NEOM नाम दिया गया है,यह  सऊदी अरब की एक महत्वाकांक्षी भविष्यवादी स्मार्ट सिटी परियोजना है, जिसे विजन-2030 के तहत विकसित किया जा रहा है। यह देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के किनारे स्थित है। NEOM का उद्देश्य एक ऐसा शहर बनाना है जो उन्नत तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हरित ऊर्जा और टिकाऊ विकास पर आधारित हो। इसमें  न्यू लाइन जैसे आधुनिक शहरी मॉडल शामिल हैं। यह परियोजना वैश्विक निवेश आकर्षित करने,रोजगार सृजन करने और सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को तेल निर्भरता से बाहर निकालने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
 
ईरान की संभावित मंशा को इस रूप में समझा जा सकता है कि वह क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को अपने खिलाफ जाने से रोकना चाहता है। अमेरिका और इज़राइल के दबाव के बीच ईरान को आशंका हो सकती है कि मोहम्मद बिन सलमान और मजबूत होकर उभरेंगे। ऐसे में ईरान ऊर्जा ठिकानों या रणनीतिक परियोजनाओं पर दबाव बनाकर सऊदी की  विजन 2030 जैसी योजनाओं की गति धीमी करना चाहता है। इसका उद्देश्य विनाश से अधिक संतुलन बनाना और प्रतिरोध स्थापित करना है।
 
(लेखर विदेशी मामलों के जानकार है)
लेखक के बारे में
डॉ.ब्रह्मदीप अलूने
(अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ).... और पढ़ें
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