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ईरान जंग में अमेरिका को भारी नुकसान! ड्रोन और जेट गिरने से बढ़ा दबाव, 200 अरब डॉलर की मांग
ईरान के खिलाफ 28 फरवरी से जारी भीषण जंग में अमेरिकी सेना ने मिसाइलों और ड्रोन से भारी तबाही मचाई। हालांकि इस युद्ध में अमेरिका के 16 विमान, 12 MQ-9 रीपर ड्रोन, 3 F-15 फाइटर और 1 KC-135 टैंकर नष्ट हुए हैं।
ईरान पर हमले के लिए भेजे गए रीपर ड्रोन को ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइलों ने मार गिराया है। हर रीपर ड्रोन की कीमत लगभग 250 करोड़ रुपए हैं। रीपर ड्रोन में हेलफायर मिसाइलें लगी होती हैं, ये 27 घंटे तक लगातार उड़ सकता है। दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकता है।
अमेरिका ने दावा किया कि 3 F-15 फाइटर जेट्स को कुवैत की वायुसेना ने गलती से फ्रेंडली फायर में गिरा दिए। ये तीनों लड़ाकू विमान ईरान के खिलाफ मिशन पर थे। KC-135 विमान अमेरिकी लड़ाकू विमान में ईंधन भरते समय इराक में हादसे का शिकार हो गया। इस हादसे में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई।
इस बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने एक वीडियो जारी कर अमेरिकी F-35 फाइटर जेट पर हमले का दावा किया। अमेरिका ने इस इमरजेंसी लैंडिंग बताया। यह लड़ाकू विमान ईरान के ऊपर युद्धक मिशन पर था।
रक्षा विभाग ने युद्ध के लिए मांगे 200 अरब डॉलर
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर से ज्यादा की मंजूरी मांगी है जबकि अब तक करीब 30 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। यह 200 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त अनुरोध अमेरिका के पहले से ही ऊंचे, लगभग 900 अरब डॉलर से अधिक वार्षिक रक्षा बजट के ऊपर है।
खाड़ी देशों को हथियार बेचेगा अमेरिका
इस बीच अमेरिका ने UAE, कुवैत, जॉर्डन को हथियार बेचने का फैसला किया है। अमेरिका संयुक्त अरब अमीरात को 8 अरब डॉलर से अधिक के एयर डिफेंस सिस्टम और उनसे जुड़ा सामान बेचेगा। वह कुवैत को 8 अरब डॉलर की मिसाइल रक्षा प्रणालियां और रडार प्रणालियों की बिक्री करेगा साथ ही जार्डन को भी 7.05 करोड़ डॉलर कीमत के विमान और गोला-बारूद बेचेगा। इस प्रस्ताव को भी अमेरिकी कांग्रेस में मंजूरी के लिए भेजा गया है।
edited by : Nrapendra Gupta
