ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उसने कहा है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की शर्तों पर युद्ध खत्म नहीं करेगा। ईरान ने कहा है कि युद्ध का अंत तभी होगा जब उसकी शर्तें पूरी होंगी। इसके लिए उसने 5 प्रमुख शर्तें रखी हैं। प्रेस टीवी के मुताबिक अधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि इस युद्ध का अंत तब होगा, जब ईरान तय करेगा न कि ट्रंप। हालांकि प्रेस टीवी ने उस अधिकारी का नाम नहीं बताया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मध्य पूर्व में शांति के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
युद्ध 28 फरवरी को सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य शीर्ष नेताओं की हत्या के बाद शुरू हुआ था। पाकिस्तान के माध्यम से भेजे गए अमेरिकी प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने और हिजबुल्लाह व हमास जैसे समूहों को समर्थन बंद करने की बात कही गई थी, जिसे ईरान ने वर्तमान स्थिति में मानने से इनकार कर दिया है।
क्या हैं ईरान की 5 शर्तें
1. हमलों और हत्याओं पर पूर्ण रोक : ईरान का कहना है कि अमेरिका और इजरायल उसके क्षेत्र में जारी हवाई हमलों और शीर्ष नेतृत्व की 'लक्षित हत्याओं' को तुरंत और पूरी तरह बंद करें।
2. भविष्य के लिए सुरक्षा गारंटी : ईरान ऐसी ठोस अंतरराष्ट्रीय कानूनी गारंटी चाहता है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भविष्य में उसकी संप्रभुता पर दोबारा हमला नहीं होगा।
3. युद्ध क्षतिपूर्ति : युद्ध के दौरान ईरान के बुनियादी ढांचे, तेल डिपो और सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान की आर्थिक भरपाई अमेरिका और उसके सहयोगियों को करनी होगी।
5. सभी मोर्चों पर युद्ध विराम: ईरान की मांग है कि युद्ध केवल उसके साथ ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के उन सभी 'प्रतिरोध समूहों' के खिलाफ भी बंद होना चाहिए जो इस संघर्ष में शामिल हैं।
5. होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर संप्रभुता : ईरान ने मांग की है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर उसके संप्रभु अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए।
व्हाइट हाउस ने कहा- होगा अब तक का जोरदार प्रहार
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने प्रेस कॉन्फ्रेंसे में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की प्राथमिकता हमेशा शांति रही है, लेकिन अगर ईरान वर्तमान स्थिति की वास्तविकता को स्वीकार करने में विफल रहता है, अगर वे यह समझने में विफल रहते हैं कि वे सैन्य रूप से हार चुके हैं और आगे भी हारते रहेंगे, तो राष्ट्रपति ट्रंप यह सुनिश्चित करेंगे कि उन पर अब तक का सबसे जोरदार प्रहार किया जाए। उन्होंने कहा कि शनिवार शाम को राष्ट्रपति ट्रंप की सख्त चेतावनी के बाद अमेरिका को यह स्पष्ट कर दिया गया था कि ईरान बातचीत करना चाहता है। राष्ट्रपति ट्रंप सुनने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा कि जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की थी, संयुक्त राज्य अमेरिका पिछले तीन दिनों से सार्थक बातचीत में लगा हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति ने युद्ध विभाग को अस्थायी रूप से केवल ईरानी पावर प्लांट और ऊर्जा बुनियादी ढांचे के खिलाफ नियोजित हमलों को स्थगित करने का निर्देश दिया है। ईरानी शासन के शेष तत्वों के पास राष्ट्रपति ट्रंप के साथ सहयोग करने, अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को स्थायी रूप से छोड़ने और अमेरिका व हमारे सहयोगियों को सक्रिय रूप से धमकी देना बंद करने का एक और अवसर है।
अमेरिकी F-18 जेट गिराने का दावा
ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी नौसेना के F-18 फाइटर जेट को मार गिराया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम ने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे दुश्मन विमान को निशाना बनाया। यह कार्रवाई दक्षिणी इलाकों में की गई। हालांकि अमेरिका की ओर से भी फिलहाल F-18 जेट गिराए जाने पर कोई बयान सामने नहीं आया है।
एक तरफ शांति दूसरी तरफ सेना की तैनाती
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संभावित हमलों को शुक्रवार तक टालने के बीच खबरें हैं कि पेंटागन अपनी एलीट '82वीं एयरबोर्न डिवीजन' के हजारों सैनिकों को क्षेत्र में तैनात करने की योजना बना रहा है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद-बकीर गालिबाफ ने चेतावनी दी।
IDF का बड़ा दावा
आईडीएफ (IDF) ने दावा किया कि उसने इस्फ़हान में ईरान के एकमात्र पनडुब्बी निर्माण केंद्र और अन्य हथियार कारखानों को निशाना बनाया है। इजरायल रक्षा मंत्री काट्ज़ के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से अब तक इजरायल ईरान पर 15,000 से अधिक बम गिरा चुका है। Edited by : Sudhir Sharma