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नेपाल में बाढ़ का सैलाब, 5 जिलों में हाई अलर्ट, 105 भारतीय पर्यटक लापता, हाई-रिस्क एडवाइजरी जारी

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तिब्बत की ओर से अचानक आई भीषण बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई है। लेन्दे खोला (भोटेकोशी नदी) में अचानक आई बाढ़ से टिमुरे बाजार और रसुवा सीमा नाके के कस्टम क्षेत्र को व्यापक नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में वाहन और अन्य सामान बाढ़ के तेज बहाव में बह गए हैं। कई जलविद्युत परियोजनाओं और बस्तियों को भी नुकसान पहुंचने की भी खबर है।

इस बीच, नेपाल सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं। इनके मुताबिक भीषण बाढ़ में 400 विदेशी टूरिस्ट लापता हैं। इनमें 105 भारतीय शामिल हैं। बाढ़ में अब तक 16 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब 40 लोग घायल हुए हैं। 


5 जिलों में हाई अलर्ट : हालात की गंभीरता को देखते हुए 5 जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। पीएम बालेन शाह के निर्देश पर सेना ने मोर्चा संभाल लिया है और हेलीकॉप्टर्स के जरिए उफनते पानी के बीच फंसी जिंदगियों को बचाने के लिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार सुबह तिब्बत से अचानक आई ज़बरदस्त बाढ़ ने उत्तरी नेपाल में भारी तबाही मचाई है और नदी के बहाव की दिशा में पड़ने वाले कई जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। पानी का यह अचानक बहाव सुबह करीब 9:00 बजे भोटे कोशी नदी में आया और फिर आगे बढ़कर त्रिशूली नदी में नुवाकोट की ओर बढ़ा।


9 पुलिसकर्मी लापता : तेज बहाव में वाहन और सामान बह गए, जबकि एक पुल भी टूट गया। बाढ़ के बाद टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात 9 पुलिसकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बाढ़ के बाद से इनसे संपर्क नहीं हो पाया है। हालांकि, बॉर्डर पोस्ट पर मौजूद 25 से 30 दूसरे लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

बाढ़ के असर को देखते हुए बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिला हाई अलर्ट पर हैं। आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में करीब 3 मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई है।


तिब्बत से आई बाढ़ से तबाही : शुरुआती जानकारी के मुताबिक उत्तरी रसुवा में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है खासकर तिमुरे बाजार इलाके, तिमुरे कस्टम ऑफिस और स्याब्रुबेसी में नुकसान हुआ है। वहीं जिला अधिकारी जान-माल और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान की विस्तृत जानकारी जुटा रहे हैं। हाइड्रोलॉजी के विशेषज्ञों का मानना ​​है कि पानी का यह अचानक बहाव स्थानीय बारिश के कारण नहीं बल्कि तिब्बत में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी ग्लेशियर झील के फटने से आया है।

हाइड्रोलॉजी और मौसम विज्ञान विभाग, स्थानीय प्रशासनिक कार्यालयों के साथ मिलकर चीनी अधिकारियों से संपर्क कर रहा है और घटना के स्रोत का पता लगाने के लिए सैटेलाइट डेटा की जांच कर रहा है। इस बीच रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन में नदी के किनारे वाले इलाकों के लिए हाई-रिस्क एडवाइजरी जारी की गई है। अनुमान है कि बुधवार शाम तक पानी का स्तर मुग्लिंग में मार्श्यांगडी नदी के संगम तक पहुंच जाएगा। नेपाल आपदा प्रबंधन अधिकारी प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षा उपाय करने की सलाह दे रहे हैं।

रेस्क्यू हेलिकॉप्टर को लौटना पड़ा : रसुवा के टिमुरे में फंसे लोगों को निकालने के लिए भेजा गया हेलिकॉप्टर बिना उतरे काठमांडू लौट आया। बाढ़ के पानी में स्थानीय हेलिपैड बह गया था, इसलिए पायलट को उतरने के लिए सुरक्षित जगह नहीं मिली। पायलट ने काठमांडू पोस्ट को बताया कि ऊपर से देखने पर टिमुरे गांव का बड़ा हिस्सा नजर ही नहीं आ रहा था। उन्होंने कहा कि त्रिशूली नदी का पानी अचानक बहुत तेजी से बढ़ा, जैसे अचानक किसी बंद नदी का पानी बाहर निकल आया हो।

ग्लेशियल झील फटने की आशंका : रसुवा में पिछले 24 घंटे में 7 मिमी से ज्यादा बारिश नहीं हुई, इसलिए बाढ़ की वजह स्थानीय बारिश नहीं मानी जा रही। अधिकारियों को शक है कि तिब्बत में ग्लेशियल झील फटने (GLOF) से अचानक पानी भोटे कोशी में आया। ICIMOD-UNDP की 2020 की स्टडी के मुताबिक, भोटे कोशी बेसिन में 122 ग्लेशियल झीलें हैं। कौन-सी झील फटी, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है; सैटेलाइट इमेज और तकनीकी जांच से स्रोत का पता लगाया जा रहा है।


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