इंदौर में बारिश में भी पानी का संकट, अब भी चल रहे 350 टैंकर, बोरवेल भी सूख रहे, गर्मियों में क्या होगा हाल?
- 18 इंच बारिश के बाद भी सूखे हैं इंदौर के बोरवेल
- हर साल जुलाई में बंद हो जाता है टैंकर से पानी सप्लाय
- इस बार अगस्त में भी चल रहे पानी सप्लाय के लिए टैंकर
- अगले साल गर्मी में क्या होगा इंदौर का हाल
संकट के लिए तैयार रहे इंदौर: यदि सितंबर माह में भरपूर बारिश नहीं होती है तो फिर अगले साल शहरवासियों को जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। शहर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर तालाब में 13 फीट पानी है, जबकि तालाब की क्षमता 19 फीट है। अभी भी तालाब में छह फीट पानी की आवश्यकता है। शहर के बिलावली, पिपलियापाला और पिपलियाहाना तालाब भी आधे खाली हैं। पिपलियाहाना तालाब को भरने के लिए नगर निगम सड़कों पर बहने वाले पानी को पाइपों के जरिए चैनल से तालाब तक लाया, लेकिन कम वर्षा होने के कारण तालाब खाली है।पिछले साल अगस्त माह तक कई तालाब भर चुक थे और अतिरिक्त पानी तालाबों से चैनलों के जरिए बाहर निकाला गया था।
जुलाई तक हो जाता है वाटर रिचार्ज: बता दें कि सामान्य मानसून में जुलाई तक भू-जल स्तर रिचार्ज हो जाता है और बोरवेल अपनी क्षमता के अनुसार पानी देने लगते हैं। इस साल 18 इंच बारिश होने के बाद भी कई इलाकों में बोरवेल सूखने लगे हैं। कई निजी बोरिंग में भी पानी कम आने लगा है।
गर्मियों में संकट लेगा विकराल रूप: अगर अगस्त में भी टैंकरों की आवश्यकता पड़ रही है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगामी गर्मी के मौसम में जल संकट कितना भीषण हो सकता है, इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। बता दें कि पिछले साल भी इंदौर में पानी का संकट गहराया था और निगम को कई टैंकर चलाने पडे थे।
भू-जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) की विफलता: यह इस बात का भी प्रमाण है कि शहर में कंक्रीट का दायरा बढ़ने और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के सही ढंग से काम न करने के कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर जाने के बजाय बहकर निकल जाता है।

