चांद या मंगल पर कैसा होगा इंसानों का आशियाना? भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने शेयर किया खास 'BHEEM' प्रोजेक्ट का वीडियो
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर 'BHEEM' (भारतीय रहने योग्य विस्तार योग्य अलौकिक आवास) प्रोजेक्ट का वीडियो साझा किया है। आईआईएससी बेंगलुरु की आलोक लैब में तैयार इस तकनीक से इंसानों के चंद्रमा या मंगल ग्रह पर रहने का रास्ता साफ हो सकता है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं
शुक्ला ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, बी.एच.ई.ई.एम. (B.H.E.E.M.) — भारतीय रहने योग्य, विस्तार योग्य, अलौकिक आवास (Bharatiya Habitable Expandable Extraterrestrial Habitat)। जब हम रूस में अपनी ट्रेनिंग पूरी करके लौटे, तो हमने अपने अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण के भारतीय चरण की शुरुआत की। इसमें लॉन्च व्हीकल और ऑर्बिटल मॉड्यूल के सिस्टम को सीखना, साथ ही व्यापक शारीरिक और अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण शामिल था। लेकिन हमारे प्रशिक्षण का एक और, काफी अलग पहलू भी था—एकेडमिक रिसर्च।
उन्होंने कहा कि हमें भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण से संबंधित किसी विषय को चुनने, उसकी अपनी समझ को गहरा करने और, उम्मीद है कि, भारत के भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए उपयोगी हो सकने वाला कुछ योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। मैंने उस अंतरिक्ष यान से आगे की सोचना तय किया जिसमें हम उड़ान भरने की ट्रेनिंग ले रहे थे और इस बारे में सोचना शुरू किया कि उतरने के बाद मनुष्य कहाँ रह सकते हैं।B.H.E.E.M. — Bharatiya Habitable Expandable Extraterrestrial Habitat.
— Shubhanshu Shukla (@gagan_shux) September 1, 2026
When we returned from our training in Russia, we began the Indian leg of our astronaut training. This involved learning the systems of the launch vehicle and orbital module, along with extensive physical and… pic.twitter.com/2Ubt0FiVbj
शुक्ला ने कहा कि मेरा शोध का क्षेत्र बाह्य अंतरिक्ष आवास (एक्सट्राटेरेस्ट्रियल हैबिटेट्स) था—ऐसी तकनीकें और अवधारणाएं जो अंततः इंसानों को पृथ्वी से परे रहने और काम करने की अनुमति दे सकती हैं। उस काम का परिणाम अंततः iisc bangalore की आलोक लैब में B.H.E.E.M. के रूप में सामने आया।
अनगिनत विशाल चुनौतियों को हल करना बाकी
भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि चंद्रमा, मंगल या अन्य बाह्य अंतरिक्ष गंतव्यों पर इंसानों की स्थायी उपस्थिति स्थापित होने से पहले अनगिनत विशाल चुनौतियों को हल करना बाकी है।
उन्होंने कहा कि विकिरण और अत्यधिक तापमान से लेकर जीवन रक्षक प्रणालियों, ऊर्जा, निर्माण और इस सीधे से सवाल तक कि—हम कहां रहेंगे? ठीक यही कारण है कि हमें आज से ही इस बारे में सोचना शुरू करने की आवश्यकता है।
क्या होगा दूसरी दुनिया में आवास बनाने की दिशा में पहला कदम?
शुक्ला ने अनुसार, यदि हम चाहते हैं कि आज से 20 साल बाद इंसान पृथ्वी से परे रहें, तो इस पर काम आज से 20 साल बाद शुरू नहीं हो सकता। इसकी शुरुआत आज ही करनी होगी। किसी दूसरी दुनिया में आवास बनाने की दिशा में पहला कदम शायद उसकी पहली ईंट रखना न हो। यह केवल यह कल्पना करने की हिम्मत जुटाना हो सकता है कि वह आवास कैसा दिख सकता है।

