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कमजोर दिल वालों के लिए नहीं था Mexico-England मैच: मैक्सिको का दबदबा, इंग्लैंड का जज्बा: 10 खिलाड़ियों से खेलकर भी जीता ब्लॉकबस्टर मुकाबला
फीफा वर्ल्ड कप 2026 में अगर अब तक किसी मुकाबले ने दर्शकों की धड़कनें सबसे ज्यादा बढ़ाई हैं, तो वह इंग्लैंड और मेजबान मैक्सिको के बीच खेला गया राउंड ऑफ 16 का मुकाबला रहा। यह सिर्फ एक फुटबॉल मैच नहीं बल्कि रोमांच, संघर्ष, विवाद और साहस की ऐसी कहानी थी, जिसमें हर कुछ मिनट बाद मैच का रंग बदलता नजर आया। दो पेनल्टी, एक रेड कार्ड, पांच गोल और अंतिम सीटी तक बना सस्पेंस, इस मुकाबले में वह सब कुछ देखने को मिला जिसकी उम्मीद विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले से की जाती है। आखिरकार इंग्लैंड ने 10 खिलाड़ियों के साथ लंबा समय खेलने के बावजूद 3-2 से जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल का टिकट कटाया।
मुकाबले की शुरुआत खराब मौसम के कारण करीब एक घंटे की देरी से हुई, लेकिन जैसे ही खेल शुरू हुआ, दोनों टीमों ने आक्रामक अंदाज दिखाया। शुरुआती आधे घंटे तक मैक्सिको ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और इंग्लैंड पर लगातार दबाव बनाया। हालांकि असली धमाका 36वें मिनट में हुआ, जब बुकायो साका के शानदार मूव के बाद जूड बेलिंघम ने इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी।
मैक्सिको इस झटके से उबर भी नहीं पाया था कि सिर्फ 98 सेकंड बाद 38वें मिनट में हैरी केन के शानदार पास पर बेलिंघम ने अपना दूसरा गोल दाग दिया। दो मिनट के भीतर दो गोल ने पूरे स्टेडियम को सन्न कर दिया और इंग्लैंड 2-0 से आगे निकल गया।
हालांकि मेजबान टीम ने हार नहीं मानी। 42वें मिनट में फ्री-किक के बाद जूलियन क्विनोनेस ने शानदार फिनिश करते हुए स्कोर 2-1 कर दिया। इस गोल ने मैच में फिर जान डाल दी और हाफ टाइम तक मुकाबला पूरी तरह खुला हुआ दिखाई दिया।
दूसरे हाफ की शुरुआत इंग्लैंड के लिए मुश्किलों से भरी रही। डिफेंडर जारेल क्वांसाह ने जीसस गालार्डो पर खतरनाक टैकल किया। VAR समीक्षा के बाद रेफरी ने उन्हें सीधे रेड कार्ड दिखा दिया। इसके बाद इंग्लैंड को लगभग पूरा दूसरा हाफ 10 खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा। रेड कार्ड के फैसले के बाद मैदान पर दोनों टीमों के खिलाड़ियों और स्टाफ के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।
संख्यात्मक कमी के बावजूद इंग्लैंड ने हार नहीं मानी। 60वें मिनट में उसे पेनल्टी मिली और कप्तान हैरी केन ने कोई गलती नहीं करते हुए गेंद को गोल में भेज दिया। इंग्लैंड ने फिर दो गोल की बढ़त हासिल कर ली और स्कोर 3-1 हो गया।
लेकिन मुकाबला अभी खत्म नहीं हुआ था। 69वें मिनट में इंग्लैंड के बॉक्स में फाउल के बाद मैक्सिको को भी पेनल्टी मिली। अनुभवी स्ट्राइकर राउल जिमेनेज ने इसे गोल में बदलकर स्कोर 3-2 कर दिया। इसके बाद पूरे स्टेडियम में रोमांच चरम पर पहुंच गया।
आखिरी 20 मिनट और फिर 11 मिनट के अतिरिक्त समय में मैक्सिको ने लगातार हमले किए। गेंद पर उसका नियंत्रण भी ज्यादा रहा और उसने इंग्लैंड के गोल पर कई खतरनाक मौके बनाए। लेकिन गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड ने शानदार बचाव किए, जबकि डेक्लान राइस और जूड बेलिंघम ने डिफेंस में भी अहम भूमिका निभाई। इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने हर हमले के सामने दीवार बनकर खड़े रहते हुए आखिर तक बढ़त बचाए रखी।
यह मुकाबला सिर्फ स्कोरलाइन के लिए नहीं, बल्कि इंग्लैंड के जज्बे के लिए भी याद रखा जाएगा। एक खिलाड़ी कम होने के बावजूद टीम ने संयम नहीं खोया और विश्व कप के सबसे कठिन नॉकआउट मुकाबलों में से एक जीतकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। वहीं मैक्सिको ने पूरे मैच में दबाव तो बनाया, लेकिन मिले अवसरों को गोल में बदलने में वह इंग्लैंड जितना प्रभावी साबित नहीं हो सका। यही दोनों टीमों के बीच सबसे बड़ा अंतर बन गया।
