'अब भारत में पहले जैसी शांति नहीं...' संजय दत्त के बयान पर मचा बवाल, विवाद बढ़ता देख एक्टर ने दी सफाई
बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त अपने बेबाक बयानों और खास अंदाज के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में शेखर सुमन के यूट्यूब चैट-सैटायर शो 'शेखर टूनाइट' में पहुंचे संजय दत्त ने कुछ ऐसा कह दिया, जिसने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी।
शो के दौरान अपने आइकॉनिक किरदार 'मुन्ना भाई' के अंदाज में दिए गए उनके बयानों पर इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। विवाद को गहराता देख अब अभिनेता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर अपनी सफाई दी है।
अब भारत में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती
विवाद की शुरुआत शो के उस हिस्से से हुई, जहां संजय दत्त ने देश के माहौल पर अपने दिल की बात रखी। उन्होंने भावुक होकर कहा, इस देश के लोग बहुत प्यारे, दरियादिल और मेहमाननवाज हैं। हमने दुनिया को हमेशा बहुत कुछ दिया है और हमें वैसा ही बने रहना चाहिए। लेकिन मुझे अब अपने ही देश में वह शांति महसूस नहीं होती जो पहले हुआ करती थी। मैं भगवान शिव से प्रार्थना करता हूं कि वे पुराने दिन जल्द से जल्द वापस आ जाएं।
संजय दत्त का यह बयान इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो गया और कई नेटिजन्स ने इस पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। शो के आखिरी सेगमेंट में जब संजय दत्त को 5 मिनट के लिए देश का काल्पनिक प्रधानमंत्री बनने को कहा गया, तो वे तुरंत अपने सुपरहिट किरदार 'मुन्ना भाई' के रूप में आ गए।
मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि किसी भी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुँचाना, उनका अपमान करना या उनका अनादर करना मेरा उद्देश्य कभी नहीं रहा है। मेरी टिप्पणियाँ एक स्क्रिप्टेड बातचीत के संदर्भ में की गई थीं, जिसका उद्देश्य हल्का-फुल्का और हास्यपूर्ण संवाद करना था। इसके पीछे की भावना मुन्ना भाई जैसी फिल्मों में दिखाई गई हास्य और व्यंग्य की शैली के समान थी, विशेष रूप से गांधीगिरी की उस सोच से प्रेरित थी, जिसका उद्देश्य प्रेम, एकजुटता और सद्भावना का संदेश देना था। दुर्भाग्यवश, मेरी बातों को उस मूल संदर्भ से अलग तरीके से समझा गया।
— Sanjay Dutt (@duttsanjay) October 4, 2026
पीएम मोदी के विदेशी दौरों पर तंज
मुन्ना भाई की बोली में संजय दत्त ने कहा, "मेरे प्यारे देशवासियों, आज अपुन पीएम बनके बहुत खुश है। लेकिन आप लोग एकदम टेंशन नहीं लेने का, अपुन इस खुशी को मनाने विदेश नहीं जाने वाला। अपुन इधर ही रहेगा, आप सबके बीच, वरना पीएम और जनता के बीच कनेक्शन कैसे बनेगा?"
उन्होंने सरकारी विज्ञापनों और होर्डिंग्स में तस्वीरों के अतिरेक पर टिप्पणी करते हुए कहा, "जहां-जहां मेरी फोटो लगी है, उसे कम कर दूंगा। देश को देश की फोटो दिखनी चाहिए। मेरी जगह महात्मा गांधी की फोटो लगाओ, क्योंकि उनके विचारों को देखना ज्यादा जरूरी है।"
विवाद बढ़ता देख संजय दत्त ने दी सफाई
सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और आलोचनाओं का सामना करने के बाद संजय दत्त ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर पूरी स्थिति स्पष्ट की। संजय दत्त ने लिखा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मेरा इरादा कभी भी किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्थान की भावनाओं को ठेस पहुंचाने, उनका अपमान करने या अनादर करने का नहीं था। यह पूरी बातचीत एक स्क्रिप्टेड फॉर्मेट का हिस्सा थी, जिसका मकसद केवल हल्का-फुल्का और मजेदार संवाद करना था।"
उन्होंने आगे कहा कि उनकी बातें 2006 की मशहूर फिल्म 'लगे रहो मुन्ना भाई' की 'गांधीगिरी' की शैली में थीं, जिसमें अहिंसा और सद्भाव का संदेश दिया गया था। अभिनेता ने अफसोस जताते हुए कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया और उन्हें संदर्भ से बाहर जाकर देखा गया, जबकि उनका मकसद केवल देश में प्यार, एकता और भाईचारे का संदेश देना था।

