मलयालम एक्टर संतोष नायर का कार एक्सीडेंट में निधन, इलाज के दौरान आया हार्ट अटैक, पत्नी की भी हालत नाजुक
मलयालम सिनेमा से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अपनी बेहतरीन अदाकारी से दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले दिग्गज अभिनेता संतोष के नायर का एक दर्दनाक सड़क हादसे में निधन हो गया है। 65 वर्षीय संतोष नायर अपने पीछे अपनी पत्नी और एक बेटी को छोड़ गए हैं।
संतोष नायर के निधन की खबर से दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई है। यह घटना 5 मई की सुबह करीब 6:30 बजे केरल के पथानामथिट्टा जिले के एनाथु इलाके में हुई। संतोष नायर अपनी पत्नी शुभश्री के साथ कार में यात्रा कर रहे थे, तभी उनकी कार अनियंत्रित होकर सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक से जा टकराई।
यह टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के अगले हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा और संतोष नायर की छाती सीधे स्टीयरिंग व्हील से टकरा गई, जिससे उन्हें गंभीर आंतरिक चोटें आईं। दुर्घटना के बाद उन्हें तुरंत अडूर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्हें दिल का दौरा (Heart Attack) भी पड़ा। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे इस आघात को सहन नहीं कर पाए और उनका निधन हो गया।
वहीं, इस हादसे में उनकी पत्नी शुभश्री को भी पसलियों में गंभीर चोटें आई हैं और वे फिलहाल अस्पताल में उपचाराधीन हैं। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।
संतोष नायर का जन्म 12 नवंबर 1960 को तिरुवनंतपुरम में हुआ था। उनके पिता सी. एन. केशवन नायर एक सेवानिवृत्त हेडमास्टर थे और उनकी माता पी. राजलक्ष्मी अम्मा एक सेवानिवृत्त शिक्षिका थीं। उनके माता-पिता के इथियोपिया चले जाने के कारण, उनका पालन-पोषण मुख्य रूप से उनके नाना-नानी द्वारा पेट्टा में उनकी दो बहनों के साथ किया गया था।
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा तिरुवनंतपुरम के सेंट जोसेफ हायर सेकेंडरी स्कूल से पूरी की। इसके बाद, उन्होंने महात्मा गांधी कॉलेज से गणित में उच्च शिक्षा प्राप्त की। कॉलेज के दिनों में वे छात्र राजनीति में भी काफी सक्रिय थे। संतोष नायर ने अपने शौक और कला के प्रति प्रेम को चुना और अभिनय की राह अपनाई।
संतोष नायर ने साल 1982 में रिलीज हुई फिल्म 'इथु नंगलुडे कथा' से अपने करियर की शुरुआत की थी। चार दशकों से अधिक के अपने शानदार सफर में, उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में काम किया। उन्हें 'अप्रैल 18' और 'इविडे थुडंगन्नु' (1984) जैसी फिल्मों में उनके नकारात्मक किरदारों के लिए काफी सराहा गया।
इसके अलावा, उन्होंने सुपरस्टार मोहनलाल के साथ 'चंद्रोत्सवम' (2005) और 'इरुपाथम नूतंदु' (1987) जैसी कई फिल्मों में भी यादगार भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने 'वसंता सेना', 'निशेधि', 'कृष्णा गोपालकृष्णन' और 'खाकी' जैसी फिल्मों में भी अपने अभिनय की छाप छोड़ी। इसके अलावा उन्होंने टीवी शो 'स्वप्नम' और 'श्रीकृष्णन' में भी अभिनय किया था।
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