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जब रात 2 बजे कॉलेज से हो गया था इम्तियाज अली का अपरहण, निर्देशक ने बताया किस्सा

Imtiaz Ali kidnapping story
बॉलीवुड फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' को लेकर लगातार चर्चा में बने हुए हैं। इसी बीच उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों का एक ऐसा खौफनाक और फिल्मी किस्सा साझा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर हर किसी को हैरान कर दिया है। 
 
इम्तियाज अली ने बताया कि कैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान एक मामूली से पोस्टर विवाद ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि आधी रात को एक स्थानीय गैंग ने उनका अपहरण कर लिया था। इम्तियाज अली ने साल 1993 में दिल्ली के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन पूरी की थी। 
अनफिल्टर्ड विद समदिश को दिए एक इंटरव्यू में इम्तियाज ने उस दौर की यादों को ताजा किया। उन्होंने बताया कि उस समय यूनिवर्सिटी कैंपसों में छात्र संगठनों के बीच काफी तीखी प्रतिद्वंद्विता हुआ करती थी। इसी राजनीतिक माहौल के बीच एक रात कुछ ऐसा हुआ जिसने इम्तियाज को सीधे खतरे में डाल दिया।
 
इम्तियाज ने बताया कि उनके हॉस्टल की मुख्य दीवार पर किसी ने एक राजनीतिक पोस्टर चिपका दिया था। इम्तियाज ने उन लड़कों से कहा कि वे पोस्टर को सामने की मुख्य दीवार पर लगाने के बजाय बगल की साइड वॉल पर लगाएं। हालांकि, उन लड़कों ने जानबूझकर उसे सामने ही रहने दिया। इसके बाद इम्तियाज ने उनके सामने ही पोस्टर को वहां से हटाकर साइड की दीवार पर लगा दिया। उस वक्त तो वे लड़के चले गए, लेकिन कहानी में ट्विस्ट कुछ दिनों बाद आया।
 
इम्तियाज ने बताया, कुछ दिनों बाद रात के करीब 2 बजे मेरे एक हॉस्टल के साथी ने आकर मुझसे कहा कि भाग जाओ, क्योंकि कुछ लोग तुम्हें ढूंढते हुए आ रहे हैं। वे लोग वहां पहुंचे और मुझसे बोले, 'हमारे साथ चलो।' जब मैंने पूछा कि कहां, तो मैंने देखा कि वे मुझे ले जाने के लिए बकायदा एक साइकिल रिक्शा लेकर आए थे।
 
गैंग के लोग इम्तियाज को जबरन उस साइकिल रिक्शा में बिठाकर यूनिवर्सिटी इलाके में ही स्थित एक सरकारी क्वार्टर जैसी जगह पर ले गए। उस गुप्त ठिकाने पर एक स्थानीय गैंग लीडर मौजूद था, जिसका संबंध एक राजनीतिक संगठन से था। उसने इम्तियाज से पोस्टर हटाने को लेकर पूछताछ शुरू की। इम्तियाज ने बेहद शांति से अपनी स्थिति स्पष्ट की और बताया कि उन्होंने पोस्टर को फाड़ा नहीं था, बल्कि सिर्फ हॉस्टल की इमारत की खूबसूरती बनाए रखने के लिए उसे सामने से हटाकर किनारे की दीवार पर शिफ्ट किया था।
तभी वहां एक अप्रत्याशित मोड़ आया, जिसने इम्तियाज अली की जान बचाई। इम्तियाज ने आगे बताया, गैंग लीडर ने अपने एक आदमी से पूछा कि क्या इसने सच में पोस्टर फाड़ा था? उस आदमी ने घबराकर कहा, 'बात तो एक ही है ना भाई, चाहे हटाया या फाड़ा।' यह सुनते ही गैंग लीडर बुरी तरह भड़क गया। उसने अपने ही आदमी से कहा, 'तुमने मुझसे कहा था कि उसने पोस्टर फाड़ा है और अब कह रहे हो सिर्फ हटाया है?' दोनों के बीच बहस बढ़ गई और गैंग लीडर ने झूठ बोलने के जुर्म में अपने ही आदमी को सटासट दो थप्पड़ जड़ दिए। बस उसी हंगामे के बीच मैं वहां से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहा।
 
कॉलेज के दिनों का यह डरावना अनुभव किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा ही लगता है। फिलहाल, इम्तियाज अली अपनी नई पीरियड रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' की रिलीज की तैयारियों में व्यस्त हैं, जो 12 जून को सिनेमाघरों में दस्तक  देने जा रही है। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना, शरवारी वाघ और नसीरुद्दीन शाह मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। 
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