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मलयालम सिनेमा के एक सुनहरे युग का अंत, नेशनल अवॉर्ड विनर सलीम कुमार का निधन
साउथ फिल्म इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता, स्क्रीनप्ले राइटर, निर्देशक और मशहूर मिमिक्री कलाकार सलीम कुमार का निधन हो गया है। उन्होंने 56 वर्ष की उम्र में कोच्चि के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली।
अस्पताल द्वारा जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, सलीम कुमार को तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ के बाद वेंटिलेटर पर रखा गया था, जहां शनिवार रात 10:43 बजे कार्डियक अरेस्ट की वजह से उनका निधन हो गया।
सलीम कुमार पिछले काफी समय से मल्टीपल ऑर्गन कॉम्प्लिकेशंस से जूझ रहे थे। वे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD), क्रॉनिक किडनी डिजीज और कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित थे। कुछ साल पहले उनका लिवर ट्रांसप्लांट भी हुआ था।
शनिवार तड़के सलीम कुमार को तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल लाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों और लाइफ-सपोर्ट सिस्टम के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर मिलते ही उनके गृह नगर नॉर्थ परवूर और पूरे केरल में शोक की लहर दौड़ गई।
सलीम कुमार के आकस्मिक निधन पर साउथ सिनेमा के सुपरस्टार ममूटी ने बेहद भावुक पोस्ट लिखा। ममूटी ने कहा़, सलीम, जो खुद हंसा और दूसरों को हंसाया, जिसने सोचा और दूसरों को सोचने पर मजबूर किया, जो कभी खुद रोया और दूसरों को रुलाया... आज वह सिर्फ हमें रुला कर चला गया। भाई, तुम्हारा जाना एक कभी न खत्म होने वाला दुख है।
मिमिक्री स्टेज से नेशनल अवार्ड तक का सफर
10 अक्टूबर 1969 को जन्मे सलीम कुमार का फिल्मी सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कोचीन कलाभवन से एक मिमिक्री कलाकार के रूप में की थी। साल 1997 में फिल्म 'इष्टमानु नूरु वट्टम' से सिनेमा की दुनिया में कदम रखने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपनी बेजोड़ कॉमिक टाइमिंग और अनोखे चेहरे के भावों के दम पर वे देखते ही देखते मलयालम सिनेमा के सबसे पसंदीदा कॉमेडियन बन गए।
'कल्याणरामन', 'सीआईडी मूसा', 'मीसा माधवन' और 'मायावी' जैसी फिल्मों में निभाए गए सलीम कुमार के किरदारों को आज भी केरल के घर-घर में याद किया जाता है। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर बनने वाले मलयालम मीम्स का वे आज भी सबसे बड़ा चेहरा हैं।
सलीम कुमार ने केवल दर्शकों को हंसाया ही नहीं, बल्कि अपनी गंभीर अदाकारी से सबकी आंखें नम भी कीं। साल 2010 में आई फिल्म 'अदामिन्ते माकन अबू' में एक बूढ़े इत्र विक्रेता की भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। इसके अलावा उन्होंने चार बार केरल राज्य फिल्म पुरस्कार भी अपने नाम किया।
सलीम कुमार न सिर्फ एक महान कलाकार थे, बल्कि एक बेहद संवेदनशील इंसान भी थे। साल 2018 में जब केरल में भीषण बाढ़ आई थी, तब उन्होंने अपने घर 'लाफिंग विला' के दरवाजे दर्जनों बेघर हुए लोगों के लिए खोल दिए थे। उन्होंने लगभग 45 लोगों को अपने घर में पनाह दी। इसके अलावा उन्हें खेती-किसानी से बेहद लगाव था।
