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Last Modified: शुक्रवार, 30 जनवरी 2026 (17:24 IST)

भारत रंग महोत्सव: 'जश्न-ए-बचपन' में आया 'नन्हा साइंटिस्ट'

Bharat Rang Mahotsav 2026
'जश्न-ए-बचपन' में 'नन्हा साइंटिस्ट' एडिसन इलेक्ट्रिक बल्ब के साथ बच्चों के दिमाग की बत्ती भी जला गया! मोहित जैन लिखित-निर्देशित इस मज़ेदार नाटक के साथ 25वें भारत रंग महोत्सव (भारंगम) में पहली बार 'जश्न-ए-बचपन' शुरू हुआ। थिएटर इन एजुकेशन (TIE) के इस पूरे आयोजन में बच्चों का जोश देखने काबिल रहा। 
 
नन्हे दर्शकों के बीच फिल्म प्रोड्यूसर कृषिका लुल्ला भी पहुंची। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी और रजिस्ट्रार प्रदीप. के मोहंती ने उनके साथ मंच साझा किया। TIE के प्रभारी रिकेन गोमले ने ज़ूम से वर्चुअली जुड़कर अपनी बात कही। 
 

बच्चों के खिले चेहरे, ताज़गी का अहसास

कृषिका ने अपने सम्बोधन में कहा, बच्चों के लिए थिएटर में बेहतर काम की संभावना है। बच्चों के साथ सभी को अच्छा लगता है। उनके खिले चेहरे देखकर ताज़गी महसूस होती है। उनकी बातें और ख़ामोशी सब हमारे मन को अच्छी लगती हैं। इससे पहले निदेशक त्रिपाठी ने नाट्य विद्यालय की तरफ़ से उनका स्वागत किया। दीप जलाने की औपचारिक रस्म अदा की।  
 
एनएसडी के निदेशक चितरंजन त्रिपाठी ने कहा, जश्न-ए-बचपन सच में जश्न है। यह ज्ञान का जश्न है, कला का जश्न है, ये नये आडियाज़ का जश्न है। ये दोस्ती और शांति का भी जश्न है। यह हर तरह से एक अनोखा उत्सव है जो नन्हे बच्चों को नाटकों के जरिए शिक्षित करके समाज और देश का एक ज़िम्मेदार नागरिक बनाने की प्रक्रिया है। नन्हे कलाकारों को और बड़ा कलाकार बनाने का प्रेरक मंच है। 
 

जश्न-ए-बचपन में मोहंती की भूमिका

अपने सम्बोधन में चितरंजन ने बच्चों के इस उत्सव के लिए रजिस्ट्रार प्रदीप के. मोहंती को बधाई दी। उन्होंने कहा, 2018 में मोहंती जी के प्रयासों से इसकी शुरूआत हुई थी। तकनीकी वजहों से यह आगे नहीं हो पाया था लेकिन अब यह भारत रंग महोत्सव में हो रहा है। एक ऐसा वृहद महोत्सव जो देश के कुल 52 और विदेश के 16 शहरों में जारी है। 
 

भारंगम में बच्चों के लिए बड़ी शुरूआत 

रजिस्ट्रार प्रदीप. के. मोहंती ने कहा, जश्ने बचपन का 7 साल बाद फिर से शुरू हो पाना चितरंजन जी की इच्छा शक्ति के बिना संभव नहीं था। उन्होंने इसे भारत रंग महोत्सव में बाल संगम और आदि रंग महोत्सव के साथ शुरू किया है, यह और भी बड़ी बात है। बाल संगम और जश्ने बचपन एक साल के अंतर से होते थे मगर पहला मौका जब दोनों ही एक साथ भारत रंग महोत्सव में हो रहे हैं। 
 
उन्होंने कहा, बच्चों के लिए यह काम राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की इकाई थिएटर इन एजुकेशन (संस्कार रंग टोली) के ज़रिये 25 सालों से जारी है। यह बेहद महत्वपूर्ण काम है। इस काम का सरकार को पूरे देश में विस्तार होना चाहिए। ये बहुत ही अच्छा काम है, और इस काम से देश को सचमुच में अच्छा बनाया जा सकता है।  
 

महोत्सव में अब सिर्फ बड़ों के नाटक नहीं

TIE के प्रभारी रिकेन गोमले ने कहा, भारत रंग महोत्सव की पहचान बड़ों के लिए होने वाले नाटकों की रही है, मगर अब बच्चों के लिए नाटक भी इसमें शामिल हो गए हैं। बड़ों और बच्चों के नाटकों का अंतर ही मिट गया है। बच्चों के काम का कई स्तरों पर विस्तार हुआ है। इसके लिए चितरंजन जी को ग्रैंड सैल्यूट। रजिस्ट्रार मोहंती जी का इसलिए शुक्रिया कि उन्होंने बच्चों के काम के लिए कभी कोई फाइल नहीं रोकी, हर अच्छे काम को प्रोत्साहित किया। 
 
कार्यक्रम के अंत में निर्देशक मोहित जैन के लिए समन्वयक जंयता राभा का गुलदस्ता और प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। TIE की स्थापना से जुड़े रहे वरिष्ठ निर्देशक हफीज़ ख़ान और एनएसडी में बच्चों के लिए नाटकों के लेखक शकील अख़्तर ने यह औपचारिकता निभाई। कार्यक्रम का संचालन TIE के आशीष आत्रे ने किया। 
 
आशीष ने बताया कि ‘भारंगम’ में बच्चों के 24 नाटक हो रहे हैं। महाराष्ट्र, अरुणाचल और कर्नाटक की टीमें भी परफॉर्म करने आ रही हैं। महोत्सव में TIE संडे क्लब के 16 नाटक भी होंगे। ज़्यादातर नाटक संगीत नाटक अकादमी के परिसर में मौजूद मेघदूत प्रेक्षागृह में होंगे। 
 

नाटक से सीखी बच्चों ने दो बातें

‘नन्हा साइंटिस्ट’ नाटक इलेक्ट्रिक बल्ब का आविष्कार करने वाले महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन के बचपन पर आधारित है। इसकी मज़ेदार प्रस्तुति से नन्हे दर्शकों ने दो ख़ास बातें सीखी। पहला- ‘सवाल करते रहना चाहिए’। दूसरा- ‘जब तक सफलता न मिले, कोशिश करते रहना चाहिए’। बच्चों ने सिर्फ इस नाटक को बड़ी दिलचस्पी से देखा बल्कि वे मंचन के वक्त नाटक के किरदारों से पूरी तौर पर जुड़े रहे। 
 
नाटक में बच्चे उस वक्त भावुक होकर तालियां बजाने लगे जब एडिसन ने कहा, मैं असफल या FAILURE नहीं हूं मैं सीख रहा हूं और अब मुझे पता है कि 1000 हज़ार तरीके ऐसे हैं जिनसे बल्ब नहीं बनाया जा सकता! एडिसन ने दोहराया 'चाहे कोई कुछ भी कहे, कामयाबी मिलने तक कोशिश करते रहना चाहिए, हार नहीं मारना चाहिए और सवाल पूछते रहना चाहिए भले कोई मंद बुद्धि कहे। जो कुछ आप करना चाहते हैं, उसके लिए जिज्ञासा और सीखना, पढ़ना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।'
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