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बिहार में भाजपा ने रणनीति बदली

Bihar assembly election
पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में अब कटौती होने जा रही है। ऐसा उनकी अत्यधिक रैलियों के जनता में संभावित नकारात्मक असर से संबंधित खुफिया रिपोर्ट मिलने के बाद तय किया गया है।
हालांकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री और भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर दो दिन पहले दिल्ली में संवाददाताओं के सवालों के जवाब में इस बात से इनकार कर चुके हैं कि प्रधानमंत्री के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में किसी तरह का फेरबदल किया जा रहा है या उनकी रैलियों की संख्या में कटौती की जा रही है, लेकिन हकीकत यही है कि नई रणनीति के तहत मोदी अब चुनाव के बाकी तीन चरणों में सिर्फ दस से बारह रैलियों को ही संबोधित करेंगे। 
 
प्रधानमंत्री का बिहार के लिए पहले जो कार्यक्रम तय हुआ था उसके मुताबिक सूबे में उनकी लगभग चालीस रैलियां होना थीं। यानी हर जिला मुख्यालय पर एक रैली। उसी कार्यक्रम के तहत चुनाव के पहले दो चरणों में मोदी अभी तक 16 रैलियों को संबोधित कर चुके हैं। उनकी ताबड़तोड़ रैलियों को विपक्षी दल मुद्दा बना रहे हैं। वे इसे भाजपा नेतृत्व खासकर प्रधानमंत्री की हताशा और घबराहट का परिचायक बता रहे हैं।
 
विपक्ष के इस प्रचार से भाजपा के बिहारी नेता भी चिंतित और परेशान हैं। उनकी परेशानी की वजह यह भी है कि प्रधानमंत्री की इतनी अधिक रैलियों से पार्टी में विभिन्न जातियों के नेताओं पर भी रैलियों के लिए भीड़ जुटाने का जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ रहा है, जिससे पार्टी उनका इस्तेमाल चुनाव प्रचार में नहीं कर पा रही है।
 
पार्टी सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट ने भी पार्टी नेतृत्व को अपनी रणनीति बदलने को मजबूर किया है। पार्टी की बदली हुई रणनीति के तहत ही अब पार्टी की प्रचार सामग्री में बिहारी नेताओं को भी जगह दी जा रही है। अभी तक सारी प्रचार सामग्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को केंद्र में रखकर ही तैयार कराई गई थी। होर्डिंग्स, पोस्टर, बैनर पर्चों आदि सभी में मोदी और शाह के ही चित्र थे। लेकिन शनिवार को राजधानी पटना सहित कई चुनाव क्षेत्रों में भाजपा के बिहारी नेताओं के चित्र वाले होर्डिंग्स भी लगे देखे गए।
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अनिल जैन