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हिन्दी कविता : ये ढूंढ ही लाता है...
ये पकड़ता है इंसान, ये पालता है आत्मा। ये लांघता है सीमा ये सताता है कर्म, बर्फ-सा ठंडा, अग्नि-सा गर्म, श्याम-श्वेत ... -
हिन्दी कविता : एक सवाल?
सांस लेना, प्रार्थना करना। बोलना, खाना-पीना। उठना-बैठना, हंसना-रोना, नाचना-गाना -
नारी का चित्रण करती एक कविता : स्त्री
स्त्री होना, एक सहज सा अनुभव है। क्यों, क्या क्या वो सब है, कुछ नहीं। नारी के रूप को सुन, गुन मैं संतुष्ट नहीं ... -
नारी पर कविता : मैं यहां नहीं हूं...
मैं हूं नारी, मैं हूं प्रताड़ित। मैं हूं मरती, मैं हूं छिदती। मैं हूं दबती, मैं हूं जलती... -
हिन्दी कविता : जीवन क्या है?
जीवन, प्रभु की लिखी सुन्दर कविता है। जीवन, खुद के लिए स्वयं लिखी गीता है । जीवन, गर्मी की रात में आती कंपकंपी है, जीवन, ... -
हिन्दी कविता : कली
सूर्य की पहली रूपहली किरण, जब इस धरातल पर पड़ी। दमक उठा पर्वतों पर उसका सोना, झरनों नदियों में चमकी चांदी की लड़ी...
