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lock down poem : पथिकों की डगर को मखमली रखना
भगवन मेरे, पथिकों की डगर को मखमली रखना हाथों को निवाले भी उजास भी पूरा का पूरा रहने देना सूरज में चांद की ... -
lockdown poem : हे ईश्वर! तुझे ही तो सब कुछ फिर से चमकाना है सूरज सा.
कितना पकड़ेगा वह शेष छुटी हुई इस गुनगुनी साँझ को कि जब लौटता था खेतों से , तो धूल का पूरा का पूरा गुबार खेत की ... -
उत्तरायण पर कविता : मन की मकर राशि में छा जाओ देव बनकर
कि देखो, फागुन भी टोह ले रहा और खेतों की मेड़ पर उग आईं हैं टेसू चटकाती सुर्ख होती डालियां तो किसी शीत ... -
हिन्दी दिवस पर कविता : आज हिन्दी की तलब लगी मुझे
आज हिन्दी की तलब लगी मुझे सुबह-औसारे और चारों तरफ से आने लगी एक प्याला सुहानी सुबह... हां, हिन्दी में सोचने, और ...
