1. चुनाव 2026
  2. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026
  3. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 न्यूज़
  4. Will young voters become kingmakers in Bengal

Exit Poll: पश्चिम बंगाल में क्या युवा वोटर्स बनेंगे किंगमेकर, रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई सियासी दलों की धड़कनें?

west bengal exit poll result
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों में अब 24 घंटे का समय शेष बचा है। इसके साथ ही बंगाल में नई सरकार बनने का काउंटडाउन भी शुरु हो गया है। चुनाव परिणाम को लेकर अटकलों का दौर जारी है। राज्य में इस साल हुए रिकॉर्ड 93 प्रतिशत मतदान, विशेषकर युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं की भारी भागीदारी ने राजनीतिक पंडितों के राजनीतिक दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। चुनाव आयोग के आंकड़ों और बूथों पर लगी लंबी कतारों से स्पष्ट है कि 18-25 आयु वर्ग के मतदाता इस बार किसी भी अन्य वर्ग की तुलना में अधिक मुखर और सक्रिय रहा हैं।
 ALSO READ: Exit Poll: बंगाल में बदलाव की बयार की Inside story
बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार युवाओं से जुड़े मुद्दे हावी रहे। राज्य में बढ़ती बेरोजगारी और रोजगार की तलाश में लोगों का पलायन इस बार चुनाव में बड़ा मुद्दा रहा। इसके साथ शिक्षक भर्ती घोटाले के साथ उच्च शिक्षा ऐसे मुद्दें थे जिसने युवाओं को सीधे प्रभावित किया। शिक्षक भर्ती  विवाद और 26 हजार से अधिक नियुक्तियों के रद्द होने से युवाओं में काफी असंतोष देखा गया।
 ALSO READ: फलोदी, कोलकाता नहीं, अमेरिकी ‘पॉलीमार्केट’ ने कर दी बंगाल चुनाव पर विस्‍फोटक भविष्‍यवाणी, ट्रेडिंग में व्हेल ट्रेडर्स की एंट्री
पारंपरिक रूप से बंगाल में चुनाव राजनीतिक विचारधारा और पहचान की राजनीति पर टिके होते थे, वहीं 2026 के चुनावों में बदलाव की एक लहर देखी जा रही है। पहली बार वोट डालने वाली महिला मतदाताओं के लिए महिला सुरक्षा और उच्च शिक्षा सबसे बड़े मुद्दे बनकर उभरे हैं।

दूसरी ओर, रोजगार और तकनीकी विकास की मांग करने वाले युवा वोटर्स ने साफ कर दिया है कि वे केवल वादों पर नहीं, बल्कि विजन पर वोट कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में युवा मतदाता किसी भी दल विशेष के प्रति फिक्स्ड नहीं हैं, जिससे वे इस बार असली किंगमेकर बन गए हैं।
 ALSO READ: पश्चिम बंगाल में M फैक्टर के दम पर ममता बनर्जी ने किया जीत का दावा, इतनी सीटें जीतने की कहीं बात
यहीं कारण है कि युवा वोटर्स को रिझाने के लिए भाजपा और टीएमसी ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। सूबे मे सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने युवा श्री जैसे कार्यक्रमों के दम पर युवाओं को साधने की कोशिश की। टीएमसी ने युवा साथी योजना के तहत बेरोजगार युवाओं को 15 सौ रुपया प्रति माह का भत्ता देने का वादा किया, युवाओं को साधने की कोशिश है।

वहीं भाजपा ने लिएंडर पेस जैसे चेहरों को पार्टी में शामिल कराकरटाउन हाल कार्यक्रम कर कर युवा वर्ग के बीच अपनी पैठ बनाई। इसके साथ भाजपा ने रोजगार के मुद्दों और भ्रष्टाचार के आरोपों को सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोला। भाजपा ने अपने भरोसा पत्र में बेरोजगार युवाओं को 3 हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता देने का भी वादा किया। 

बंगाल के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि  93 प्रतिशत से अधिक मतदान होना इस बात का संकेत है कि जनता बदलाव या स्थिरता के लिए बहुत उत्साहित है। इसमें युवाओं का बढ़ता ग्राफ यह दर्शाता है कि वे इस चुनाव को अपने भविष्य के फैसले के तौर पर देख रहे हैं। असल मायने में बंगाल की सत्ता का फैसला अब उन हाथों में है, जो पहली बार लोकतंत्र के इस महापर्व का हिस्सा बन रहे हैं। चुनाव के दौरान युवा मतदाताओं का साइलेंट वोटिंग पैटर्न यह तय करेगा कि 2026 में बंगाल की सत्ता का ताज किसके सिर सजेगा।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल मतदाता 6.44 करोड़ हैं। इनमें 1.4 से 1.7 करोड़ युवा (18-29 आयु वर्ग) हैं। वहीं 18 से 19 वर्ष के 5.2 लाख से अधिक युवाओं ने पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग किया। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में युवा मतदाता निर्णायक बनकर उभरे हैं और राज्य का हर चौथा मतदाता युवा है। ऐसे में बेरोजगारी और भर्ती घोटाला समेत कई मुद्दे हैं, जिनके आधार पर अगर युवाओं ने वोट किया तो चुनाव में बड़ा खेला हो सकता है।
लेखक के बारे में
विकास सिंह
special correspondent.... और पढ़ें