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1 दिन में 35 करोड़ से अधिक पौधारोपण कर यूपी फिर बनाएगा रिकॉर्ड : योगी आदित्यनाथ

UP Set to Break Another Record by Planting Over 35 Crore Saplings in a Single Day
- मुख्यमंत्री का आह्वान, हर विद्यार्थी एक पौधा जरूर लगाए, हर आंगनबाड़ी केंद्र 5 सहजन के पौधे रोपे जाएं
- वर्तमान में हरित आवरण 9.96%, वर्ष 2030 तक 15% और 2047 तक 20% हरित आवरण का लक्ष्य
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की वृहद पौधारोपण अभियान- 2026 की तैयारियों की समीक्षा
- 9 वर्ष में वन एवं वृक्ष आवरण में 3 लाख 38 हजार एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई
Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस वर्ष एक दिन में 35 करोड़ पौधारोपण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा है कि विगत वर्षों में जनभागीदारी से प्रदेश ने वृक्षारोपण में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और अब इसे जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा। रविवार को वृहद पौधारोपण अभियान-2026 की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र में न्यूनतम 05 सहजन के पौधे लगाए जाएं, जबकि स्कूल-कॉलेजों में हर छात्र कम से कम एक पौधा लगाए।

मुख्यमंत्री ने गंगा एक्सप्रेस-वे के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सतत जन-अभियान के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में पिछले वर्षों में वृक्षारोपण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2009 से 2016 के बीच जहां 51.48 करोड़ पौधे लगाए गए थे, वहीं वर्ष 2017 से 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 242.13 करोड़ हो गई।

इसी अवधि में वन एवं वृक्ष आवरण में 3 लाख 38 हजार एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है और हरित आवरण लगभग 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कार्बन स्टॉक में वृद्धि के मामले में भी प्रदेश राष्ट्रीय औसत (1.13 प्रतिशत) से आगे है और 2.46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को हरित क्रांति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2030 तक 15 प्रतिशत और 2047 तक 20 प्रतिशत हरित आवरण का लक्ष्य हर हाल में हासिल करना है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वर्ष 2026 के अभियान को पूरी तरह वैज्ञानिक, योजनाबद्ध और परिणामोन्मुख बनाया जाए। उन्होंने माइक्रो प्लानिंग को अभियान की आधारशिला बताते हुए ग्रामीण और शहरी स्तर पर तैयार सभी माइक्रो प्लानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने को कहा। 
 
मुख्यमंत्री ने पौधों की गुणवत्ता और उपलब्धता पर विशेष जोर देते हुए निर्देश दिए कि सभी विभागों को वन विभाग की नर्सरियों से निःशुल्क एवं उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 1935 विभागीय नर्सरियां संचालित हैं और 50 करोड़ से अधिक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिसके लिए 34 नई नर्सरियों की स्थापना भी की गई है। उद्यान, रेशम और निजी क्षेत्र की नर्सरियों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है।
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों की सुरक्षा और उनकी जीवितता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आधुनिक तकनीक के माध्यम से सतत मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि ‘हरीतिमा’ ऐप, जीआईएस मैपिंग, क्यूआर कोड आधारित ट्रैकिंग तथा प्लांटेशन मॉनीटरिंग सिस्टम (पीएमएस) और नर्सरी मैनेजमेंट सिस्टम (एमएमएस) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वृक्षारोपण की निगरानी की जा रही है। वर्ष 2025 के विशेष सर्वेक्षण में वन विभाग द्वारा लगाए गए पौधों की जीवितता 80 प्रतिशत दर्ज की गई।
मुख्यमंत्री ने शहीदों, स्वाधीनता संग्राम सेनानियों व अन्य हुतात्माओं के नाम पर वन/वाटिका के स्थापित करने पर बल दिया, नदियों के किनारे, हाइवे आदि के किनारे भी पौधे लगाए जाएं। मुख्यमंत्री ने इस वर्ष अयोध्या में रामायणकालीन पौधे लगाने पर जोर दिया। 
 
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि 30 मई तक अपनी-अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर लें और निर्धारित समयबद्ध कार्यक्रम के अनुसार वृक्षारोपण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। 
 
बैठक के दौरान वन एवं पर्यावरण विभाग की ओर से मुख्यमंत्री को 'शेखा झील पक्षी विहार, अलीगढ़' के रामसर साइट घोषित किए जाने का प्रमाण पत्र भी सौंपा गया। बता दें कि उत्तर प्रदेश में कुल 12 रामसर स्थल नामित किए जा चुके हैं, जो कुल 38,992.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल आच्छादित करते हैं। शेखा झील पक्षी विहार रामसर स्थल 40.309 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ प्रदेश का सबसे छोटा रामसर स्थल है। 2016 में इसे पक्षी विहार के रूप में अधिसूचित किया गया था।
Edited By : Chetan Gour
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